मध्यप्रदेश सरकार ने सड़कों से आवारा गायों को हटाने के लिए नई योजना बनाई है, जिसके तहत 125 एकड़ भूमि पर गोशालाएं बनाई जाएंगी। लेकिन भूमाफिया जमीन आवंटन में बाधक बन रहे हैं। पिछले पांच साल में एक हजार करोड़ खर्च होने के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है।

हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
सड़कों पर गायों का जमावड़ा सबसे बड़ी समस्या बना हुआ है। यह समस्या कोई आज-कल की नहीं, न ही कुछ दिनों के लिए है, बल्कि इस समस्या से लोग सालों से जूझ रहे हैं, और आलम यही रहा तो सालों तक समस्या का समाधान नहीं हो सकेगा। हालांकि गायों को बचाने के लिए सरकार अब नई योजना ला रही है। जिसके माध्यम से 125 एकड़ भूमि गौशालाओं को दी जाएगी और उसके बदले गोबर दूध बेचकर गौशालाओं को स्वावलंबी बनाने का प्रयास किया जाएगा। इनमें निराश्रित गायें भी शामिल हैं। सरकार के मुताबिक निराश्रित गोवंश लाखों की संख्या में हैं। कहा जा रहा है कि गायों को सड़कों से हटाने के लिए भू-माफिया बाधा बन रहे हैं।
एक करोड़ खर्च, समस्या जस की तस
एक जानकारी के मुताबिक सड़कों से गायों के हटाने के लिए मप्र सरकार ने पिछले पांच साल में करीब एक हजार करोड़ रुपए खर्च किए, लेकिन समाधान नहीं निकला। अब सरकार इसके लिए नई पॉलिसी लेकर आई है। पॉलिसी को कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है। इसके तहत हर जिले में स्वावलंबी गोशालाएं बनाई जाएंगी। बताया गया है कि सतना जिले में कई स्थानों पर जमीन आवंटन की कार्यवाही चल रही है। जिसको लेकर भूमाफिया भी सक्रिय हो गए हैं और सरकारी जमीनों में लगातार आपत्ति लगाकर सरकारी योजनाओं के लिए बाधक बने हुए हैं।
कैसे दूर होगी समस्या
सड़कों पर आवारा गोवंश की बढ़ती समस्या से लोग परेशान हैं, क्योंकि इससे यातायात बाधित होता है, दुर्घटनाएं होती हैं और किसानों को फसल का नुकसान होता है। इस समस्या का समाधान करने के लिए प्रशासन को गोशालाएं बनानी होंगी और नसबंदी जैसे कार्यक्रमों का समर्थन करना होगा। नागरिकों को भी अपनी गायों की देखभाल करनी चाहिए और उन्हें आवारा नहीं छोड़ना चाहिए, तथा स्थानीय प्रशासन और पुलिस में शिकायत दर्ज करनी चाहिए।
पशुपालकों की लापरवाही
कई पशुपालक अपनी गायों को दूध न देने पर सड़कों पर छोड़ देते हैं, जिससे उनकी संख्या बढ़ रही है। मौजूदा गोशालाओं में जगह की कमी के कारण आवारा पशुओं को नहीं रखा जा पा रहा। प्रशासन आवारा पशुओं को नियंत्रित करने और गोशालाओं में भेजने में विफल रहता है, जिससे समस्या बढ़ती जा रही है। सरकार को और अधिक गोशालाएं बनानी चाहिए ताकि आवारा और लावारिस पशुओं को आश्रय मिल सके।
जागरूकता की जरूरत
गायों की आबादी को नियंत्रित करने के लिए नसबंदी कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। लोगों को आवारा पशुओं को सड़कों पर न छोड़ने और उनकी उचित देखभाल करने के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए। नागरिकों को ऐसे आवारा पशुओं के बारे में अपने स्थानीय प्रशासन, नगरपालिका और पुलिस में शिकायत दर्ज करानी चाहिए। बरसात के बाद सड़कों पर मवेशियों का जमावड़ा बढ़ गया है। सुबह से रात तक आवारा पशु सड़क पर डटे रहते है और इन्हें सड़क से भगाने की कोशिश में ही दुर्घटनाएं घट जाती है।
बाजार में अव्यवस्था
ये आवारा पशु बाजार में घुसकर अव्यवस्था उत्पन्न करते है और इन्हें भागने की कोशिश में लोग भी चोटिल हो जाते है। वहीं मवेशियों के सड़कों पर बैठने पर चालक सीधे वाहन नहीं चला पाते और कई बार मवेशियों को बचाने के चक्कर में दुर्घटनाओं का शिकार हो जाते है। आलम यह है कि शाम को जब मवेशी सड़क पर बैठते हैं तो वाहनों को निकलने के लिए जगह ही नहीं मिलती। इन मवेशियों के सड़क पर बैठने के कारण वाहन चालक तो दुर्घटनाग्रस्त होते रहते है। साथ ही वाहनों की टक्कर से मवेशी भी घायल होते रहते हैं। आवारा पशु जब आपस में लड़ते हैं तो सड़क से पैदल निकल रहे लोगों सहित दो पहिया वाहन चालकों को बेजा दिक्कत होती है, और वह भयभीत होकर दुघर्टनाग्रस्त हो जाते हैं। वही कई बार यह मवेशी सड़क किनारे खड़ी बाइक को गिरा देते, जिससे बाईक में भी टूट फूट हो जाती है। गांव में आवारा पशुओं का डेरा कभी न खत्म होने वाली समस्या बन गई है। जिसे कभी भी देखा जा सकता है।


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