भोज मुक्त विश्वविद्यालय से जुड़े शासकीय जगन्नाथ सिंह स्मृति महाविद्यालय चितरंगी में छात्रों को मिलने वाली निःशुल्क पुस्तकें प्रबंधन की लापरवाही के कारण कूड़े की तरह पड़ी हुई हैं। आरोप है कि प्राचार्य राममिलन प्रजापति और प्रभारी विजय शंकर पांडेय छात्रों से अवैध वसूली करते हैं और शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से ठप कर चुके हैं। सवाल यह है कि क्या विश्वविद्यालय प्रबंधन भ्रष्टाचार और उदासीनता पर नकेल कस पाएगा?

हाइलाइट्स
सिंगरौली, स्टार समाचार वेब
शासकीय जगन्नाथ सिंह स्मृति महाविद्यालय चितरंगी के भोज मुक्त विश्विद्यालय का अध्ययन केंद्र संचालित है, ताकि विद्यार्थियों को सुलभ एवं आसान उच्च शिक्षा प्राप्त हो सके। बताया जा रहा है कि भोज मुक्त अंतर्गत संचालित शैक्षणिक अध्ययन केन्द्र के प्रभारी विजय शंकर पांडेय है। आरोप है कि भोज मुक्त के विद्यार्थियों पुस्तके वितरित नहीं की गई है, प्रबंधन की लापरवाही की वजह से पुस्तके कूड़े के रूप में दम तोड़ रही है।
सूत्रों की मानें तो श्री पाण्डेय के अजब-गजब एवं बड़े-बड़े कारनामें भी जन चर्चा में सुनने को मिलते रहते है। विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करना इनके लिए आम बात हो चुकी है। बताया जा रहा है कि उक्त समस्त गतिविधियां महाविद्यालय के प्राचार्य राममिलन प्रजापति के इशारे पर ही संपन्न की जाती है और तो और जानकारी यह भी मिली है कि पुस्तक वितरण करते वक़्त संबंधित विद्यार्थियों से अवैध वसूली भी की जाती है। यदि लेन-देन के मामले में श्री पांडेय एवं प्राचार्य की बात पर विद्यार्थी खरे नहीं उतरते हैं, तो विद्यार्थियों को परेशान करने में कोई कोर-कसर नही छोड़ते है। गौरतलब हो कि सरकार की की मंशा है की विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्य-पुस्तकें वितरित की जाए ताकि बिना किसी परेशानी के विद्यार्थी प्राप्त पुस्तकों का अध्ययन कर सकें। कालेज प्रबंधन की लापरवाही से किताबें कूड़े की तरह अव्यस्थित रूप से रखी गई है, जो अव्यवस्था पर तरह-तरह के सवाल खड़ा कर रहा है। ऐसे में कॉलेज प्रबंधन एवं जिम्मेदारों की उदासीनता मानी जाय या लापरवाही जो विद्यार्थियों को को किताब न बाँटकर कूड़े की तरह अवस्थित रूप से फेकी हुई हैं।
सूत्र बताते है कि महाविद्यालय के ऊपर जिला प्रशासन एवं लीड प्रबंधन का नियंत्रण एवं देखरेख न होने से निरंकुश प्राचार्य राममिलन प्रजापति एवं विजय शंकर पांडेय हर सप्ताह मे शुक्रवार को घर की ओर प्रस्थान कर जाते है और मंगलवार को आते है। ऐसे में विद्यार्थियों की पठन-पाठन के साथ अन्य गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं, और तो और हर सत्र हर कक्षाओं का संचालन भी नही हो पा रहा है, साथ ही भोज मुक्त विश्वविद्यालय प्रबंधन द्वारा अन्य व्यवस्था हेतु जारी की गई राशियों का भी व्यापक तरीके से निजी स्वार्थ में उपयोग किए जाने का आरोप लगा है। अब देखने वाली बात यह होगी की क्या विश्वविद्यालय प्रबंधन उक्त प्राचार्य एवं अतिथि विद्वान के ऊपर निरंकुश लग पाएगा या ऐसे ही भ्रष्टाचार के खेल का सिलसिला अनवरत जारी रहेगा।
मेरे पास किसी भी प्रकार का वित्तीय प्रभार नही है, ऐसे में निजी स्वार्थ में उपयोग का सवाल ही नही उठता। वहीं पुस्तक वितरण में की जा रही लापरवाही में सुधार किया जायेगा, विद्यार्थी आएंगे तो उन्हें पुस्तकें वितरित की जाएंगी।
राममिलन प्रजापति, प्राचार्य, शासकीय जगन्नाथ सिंह स्मृति महाविद्यालय चितरंगी


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