सतना के कोठी–मझगवां क्षेत्र में एक नीलगाय ने 11 वनकर्मियों की रेस्क्यू टीम को पूरे 8 घंटे तक चुनौती दी। खेतों और गांवों के बीच दौड़ती नीलगाय से किसान सहमे रहे, एक किसान घायल हुआ, अंततः शाम को उसे सुरक्षित जंगल की ओर खदेड़ा गया।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
जंगल और गांव की सरहद पर शुक्रवार का दिन किसी थ्रिलर से कम नहीं रहा। एक अकेली नीलगाय ने 11 वनकर्मियों की टीम को पूरे 8 घंटे तक छकाए रखा। सुबह से शाम तक चला यह रेस्क्यू ऑपरेशन कोठी से शुरू होकर मझगवां के गांवों तक जा पहुंचा, जहां रबी फसलों की रखवाली कर रहे किसान डर और सतर्कता के बीच समय काटते रहे। वन विभाग को सुबह करीब 10.30 बजे सूचना मिली थी। एक नीलगाय को जंगल की सीमा छोड़ खेतों की तरफ बढ़ रही है। इसके आधे घंटे बाद यानि 11 बजे से मझगवां वन परिक्षेत्र की रेस्क्यू टीम वनपरिक्षेत्राधिकारी रंजन परिहार के नेतृत्व में नीलगाय को सुरक्षित जंगल की ओर मोड़ने निकली। लेकिन नीलगाय हर बार नई दिशा पकड़ लेती। कभी गेहूं-चना के खेत में घुसकर फसल के बीच दौड़ लगाती, कभी गांव की पगडंडियों के पास से निकलती, तो कभी झाड़ियों में छिपकर टीम की नजरों से ओझल हो जाती। थक-हारकर जब वनकर्मी उसे जंगल की ओर खदेड़ते, वह फिर पलटकर खेतों की तरफ भाग निकलती। इस तरह से शाम 7 बजे तक में टीम को सफलता मिली।
सहमे रहे किसान
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान किसान अपने-अपने खेत छोड़ किनारे हो गए। महिलाओं-बच्चों और बुजुर्गों ने भी नीलगाय के गुजरने वाले रास्तों पर सतर्क दूरी बनाए रखी। किसानों का कहना है कि इन दिनों फसलें नमी, तापमान और बढ़वार की संवेदनशील अवस्था में है। ऐसे में नीलगाय का खेत में प्रवेश बड़ी तबाही ला सकता था। हालांकि समय रहते टीम की मुस्तैदी से फसल को गंभीर नुकसान से बचा लिया गया।
नयागांव का किसान घायल
नीलगाय ने कोठी से मझगवां के बीच रेस्क्यू टीम को जबरदस्त तरीके से छका रखी थी। उसे कई बार जंगल की ओर भगा दिया गया लेकिन बार बार वह रोड क्रास कर पहुंच रही थी। इस चक्कर में एक किसान भी घायल हो गया। रेस्क्यू टीम को लीड कर रहे वनपरिक्षेत्राधिकारी श्री परिहार ने बताया कि नयागांव के निवासी 40 साल के पप्पू कोल नीलगाय के हमले में घायल हो गए हैं। उनके कई जगह चोट आई है।
भरगवां जंगल की ओर भेजा
मझगवां वन परिक्षेत्र की रेस्क्यू टीम ने करीब शाम 7 बजे अथक प्रयास के बाद नीलगाय को सुरक्षित जंगल की ओर खदेड़ दिया गया। जानकारी है कि उसे भरगवां के जंगल की ओर भेज दिया गया है। तब कहीं जाकर किसानों और ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। ग्रामीणों ने अब वन-सीमा पर स्थायी प्रबंधन, फेंसिंग, और वन्यजीव-जागरूकता कार्यक्रमों की मांग उठाई है, ताकि भविष्य में ऐसी भागम-भाग किसी हादसे में न बदले।
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