रीवा के संजय गांधी अस्पताल समेत सभी सरकारी ब्लड बैंक खाली हैं, बी और एबी पॉजिटिव ब्लड की भारी कमी से मरीज परेशान हैं।

हाइलाइट्स
रीवा, स्टार समाचार वेब
विंध्य के सबसे बड़े अस्पताल के ब्लड बैंक की हालत खराब है। पर्याप्त ब्लड ही नहीं है। अस्पताल में भर्ती मरीजों की जान बचाने के लिए खुद प्रबंधन को लोगों से मदद मांगनी पड़ रही। एबी और बी पॉजिटिव ब्लड ही खत्म हो गया है। यह हालात सिर्फ एसजीएमएच के ब्लड बैंक का ही नहीं है। जिला अस्पताल और रेडक्रास की भी हालत खराब है।
आपको बता दें कि संजय गांधी अस्पताल का ब्लड बैंक सबसे बड़ा है। यहां 800 से अधिक यूनिट ब्लड स्टोर करने की क्षमता है। यह ब्लड बैंक कभी पूरी तरह से भर ही नहीं पाया। वर्ष 2025 में तो हालात ऐसे रहे कि ब्लड बैंक को मरीजों की जान बचाने के लिए काफी जूझना पड़ा। प्रशासन की मदद नहीं मिली। प्रशासन ब्लड डोनेशन कैम्प लगाने के लिए आगे नहीं आया। एक प्राइवेट संस्था ने पहली की लेकिन उनसे मिला ब्लड भी राहत नहीं दे पाया। अब हालात ऐसे हो गए है कि मरीजों की जान बचाने परिजनों को प्राइवेट सेंटरों और दलालों के पास जाना पड़ रहा है। सभी सरकारी ब्लड बैंक खाली हो गए हैं।
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कोई भी संगठन सामने नहीं आ रहा
ब्लड की कमी से अस्पताल को उबारने के लिए प्रबंधन काफी प्रयास किया लेकिन कोई भी संगठन सामने नहीं आया। संगठन ठंड के कारण कैम्प लगाने से बचते नजर आए। अब ठंड खत्म होने के बाद ही डोनेशन कैम्प लगाने की बात कही जा रही है। रीवा में कई सामजिक संगठन है, फिर भी इस कमी को दूर करने के लिए कोई भी आगे नहीं आ रहा है।
महिला की जान बचाने मांगनी पड़ी मदद
बुधवार को महिला की जान बचाने के लिए प्रबंधन को खुद लोगों से मदद मांगनी पड़ी। दरअसल महिला को जीएमएच के गायनी विभाग में एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के कारण भर्ती करना पड़ा था। महिला मरीज के ट्यूब में ही भ्रूण विकसित हो गया था। इसके कारण ट्यूब फंट गई थी। महिला को अधिक ब्लीडिंग शुरू हो गई थी। ऐसे में उसकी जान बचाने के लिए आपरेशन करना जरूरी थी। डॉक्टरों ने बी पॉजिटिव ब्लड की डिमांड कर दी थी। महिला के साथ कोई भी परिजन नहीं थे। महिला के दो छोटे बच्चे थे। पति बाहर नौकरी करता है। ऐसे में ब्लड बैंक से बी पॉजिटिव ब्लड की मांग की गई। ब्लड बैंक में बी पॉजिटिव ब्लड नहीं मिला। बाद में पब्लिक से प्रबंधन ने मदद मांगनी शुरू की।
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ब्लड बैंक बढ़ गए लेकिन समस्याएं जस की तस
रीवा में ब्लड बैंक की संख्या बढ़ गई है। पहले सिर्फ संजय गांधी अस्पताल में ही ब्लड बैंक था। इसके बाद जिला अस्पताल में भी यह सुविधा शुरू हो गई। हाल ही में रेडक्रास में भी ब्लड बैंक की शुरुआत कर दी गई है। उम्मीद थी कि अधिक ब्लड बैंक खुलने से लोगों को राहत मिलेगी, हालांकि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। सभी जगह एक जैसे हालात हैं। कभी भी पर्याप्त ब्लड नहीं है। लोगों को हर दिन इस समस्या से जूझना पड़ रहा है। सबसे अधिक परेशानी बाहर से आने वाले मरीजों को हो रही है।
प्रशासन ने एक साल पहले लगवाया था कैम्प
जिला अस्पताल, संजय गांधी अस्पताल के ब्लड बैंक को बड़े शिविर से ही अधिक मात्रा में ब्लड मिलने की उम्मीद रहती है। यह बड़ी मात्रा जिला प्रशासन की मदद से लगने वाले शिविर से ही आती है। हालांकि इसमें जिला प्रशासन ही कोताही बरतता गया। एक साल से किसी तरह का जिला प्रशासन की पहल पर ब्लड बैंक लगाया ही नहीं गया। सूत्रों की मानें तो वर्ष 2024 में कैम्प लगा था। इसके बाद जिला प्रशासन ने पहल नहीं की। इसके कारण ही हालात बदतर हो गए हैं।
सिर्फ 15 यूनिट ब्लड शेष
800 यूनिट ब्लड की क्षमता वाले सबसे बड़े ब्लड बैंक की हालत खराब है। संजय गांधी अस्पताल में वर्तमान समय में सिर्फ 15 यूनिट ब्लड शेष बचे हैं। इसमें भी दो ग्रुप के ब्लड जीरो हैं। इसमें बी पॉजिटिव और एबी पॉजिटिव शामिल है। बी पॉजिटिव ब्लड की कमी कई दिनों से बनी हुई है। मरीजों के परिजनों को खुद ही व्यवस्था करनी पड़ रही। एक्सचेंज में भी ब्लड नहीं मिल पा रहा है। जिला अस्पताल और रेडक्रास से भी लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है। सारी व्यवस्थाएं खून की कमी के कारण दम तोड़ रही है।


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