देश में कर्ज के बोझ तले दबे सबसे बड़े राज्यों में पश्चिम बंगाल टॉप पर है। बंगाल को अपने रेवेन्यू का 42 फीसदी हिस्सा सिर्फ ब्याज के भुगतान में खर्च करना पड़ा है। वहीं सूची में नौवें स्थान पर मध्य प्रदेश है।आरबीआई के वित्त वर्ष-2025 के आंकड़ों से पता चलता है कि कई बड़े राज्यों में कर्ज के ब्याज का भुगतान उसके अपने टैक्स और नॉन-टैक्स रेवेन्यू का 42 प्रतिशत तक हिस्सा ले लेता है।

राज्यों में कर्ज के ब्याज का भुगतान उसके अपने टैक्स और नॉन-टैक्स रेवेन्यू का 42 प्रतिशत तक हिस्सा ले लेता है।
भोपाल/ नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
देश में कर्ज के बोझ तले दबे सबसे बड़े राज्यों में पश्चिम बंगाल टॉप पर है। बंगाल को अपने रेवेन्यू का 42 फीसदी हिस्सा सिर्फ ब्याज के भुगतान में खर्च करना पड़ा है। वहीं सूची में नौवें स्थान पर मध्य प्रदेश है। मप्र का वित्त वर्ष 2025 में टैक्स और नॉन-टैक्स रेवेन्यू 1.23 लाख करोड़ रुपए था, जिसमें से ब्याज के भुगतान पर 27,000 करोड़ रुपए या कुल कलेक्शन का करीब 22 फीसदी खर्च हुआ। बात दसवें पायदान की करें, तो यहां पर कर्नाटक है, जिसका कलेक्शन 2.03 लाख करोड़ का था और ब्याज भुगतान 19 प्रतिशत यानी 39,000 करोड़ रहा। यही नहीं, भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों पर नजर डाल लें, जिनसे पता चलता है कि कई बड़े राज्यों को कर्ज के बोझ तले दबकर अपने रेवेन्यू का एक बड़ा हिस्सा इनके ब्याज के भुगतान में खर्च करना पड़ता है।
राज्यों हो रही पैसों की कमी
आरबीआई के वित्त वर्ष-2025 के आंकड़ों से पता चलता है कि कई बड़े राज्यों में कर्ज के ब्याज का भुगतान उसके अपने टैक्स और नॉन-टैक्स रेवेन्यू का 42 प्रतिशत तक हिस्सा ले लेता है। इस भारी-भरकम ब्याज भुगतान की वजह राज्यों के पास सड़क, स्कूल, हेल्थ सर्विसेज और नए प्रोजेक्ट्स पर खर्च करने के लिए पैसों की कमी हो जाती है।
मध्यप्रदेश: हर दिन 125 करोड़ का कर्ज
मध्यप्रदेश सरकार पिछले दो वर्षों में हर दिन औसतन 125 करोड़ रुपए का कर्ज ले रही है। राज्य पर कुल कर्ज अब 4,64,340 करोड़ तक पहुंच गया है, जो राज्य के कुल वार्षिक बजट से भी 43,000 करोड़ ज्यादा है। आंकड़े गवाही देते हैं कि 22 साल पहले राज्य पर कुल कर्ज मात्र 20,000 करोड़ था। आज अकेले ब्याज चुकाने में ही सरकार को सालाना 27,000 करोड़ रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं।
प. बंगाल: 45 हजार करोड़ भरी ब्याज
वित्त वर्ष 2025 में पश्चिम बंगाल पर ब्याज भुगतान का बोझ अन्य राज्यों की तुलना में सबसे ज्यादा था। राज्य को टैक्स और नॉन टैक्स रेवेन्यू से 1.09 लाख करोड़ रुपए मिले थे, लेकिन सिर्फ ब्याज भुगतान पर 45 हजार करोड़ से अधिक खर्च किए गए। इसका मतलब हुआ कि उसके राजस्व का 42 फीसदी हिस्सा तो ब्याज चुकाने में ही चला गया।
पंजाब दूसरे-बिहार तीसरे नंबर पर
दूसरे पायदान पर पंजाब रहा, जिसने अर्जित रेवेन्यू का 34 प्रतिशत हिस्सा ब्याज भुगतान करने में खर्च कर दिया। पंजाब का राजस्व कलेक्शन 70,000 करोड़ रुपए था और इसने कर्ज के ब्याज भुगतान पर करीब 24,000 करोड़ खर्च किए। इसके बाद तीसरे नंबर पर बिहार का नाम आता है, जिसने 62,000 करोड़ रुपए के रेवेन्यू में से 21 हजार करोड़ का ब्याज भुगतान किया और ये इसका 33 प्रतिशत रहा।
केरल-तमिलनाडु: कर्ज से बेहाल
केरल द्वारा वित्त वर्ष-2025 में 1.03 लाख करोड़ का रेवेन्यू कलेक्शन किया गया था और इसका 28 फीसदी या करीब 29,000 करोड़ रुपए तो ब्याज के भुगतान में ही चला गया। पांचवें नंबर पर तमिलनाडु रहा, जिसने अपने कलेक्शन में से 62,000 करोड़ रुपए या 28 प्रतिशत का ब्याज पेमेंट किया था। इसके टैक्स रेवेन्यू सबसे अधिक रहा, लेकिन कर्ज की मार से ये राज्य भी बेहाल रहा।
हरियाण-राजस्थान-आंध्र प्रदेश
टॉप-10 कर्ज के तले दबे राज्यों में अगला नंबर हरियाणा का है। हरियाणा ने 94,000 करोड़ का राजस्व जुटाने के बाद इसमें से 27 फीसदी या करीब 25,000 करोड़ रुपए का ब्याज भुगतान किया। सातवें पायदान पर राजस्थान था और राज्य ने 1.48 लाख करोड़ के राजस्व में से 38,000 करोड़ का ब्याज चुकाया। इसके अलावा आंध्र प्रदेश ने 1.2 लाख करोड़ रुपए के राजस्व पर 29 हजार करोड़ ब्याज भरा।


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