मध्यप्रदेश कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। दतिया सीट से विधायक राजेंद्र भारती को दिल्ली की स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट ने 27 साल पुराने फिक्स्ड डिपॉजिट हेराफेरी केस में दोषी करार दिया है। आज यानी गुरुवार को कोर्ट ने उन्हें तीन साल की सजा सुनाई है। हालांकि बाद में जमानत भी दे दी।
By: Arvind Mishra
Apr 02, 20261:38 PM
भोपाल/नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
मध्यप्रदेश कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। दतिया सीट से विधायक राजेंद्र भारती को दिल्ली की स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट ने 27 साल पुराने फिक्स्ड डिपॉजिट हेराफेरी केस में दोषी करार दिया है। आज यानी गुरुवार को कोर्ट ने उन्हें तीन साल की सजा सुनाई है। हालांकि बाद में जमानत भी दे दी। इस फैसले से उनकी विधायकी पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। सह-आरोपी पूर्व बैंक लिपिक रघुवीर प्रजापति को भी दोषी ठहराया गया है। दरअसल,1998 में जब राजेंद्र भारती जिला सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के अध्यक्ष थे, उन्होंने अपनी मां सावित्री श्याम के नाम पर 10 लाख रुपए की एफडी कराई थी। मूल रूप से यह एफडी तीन साल की अवधि और 13.5 फीसदी ब्याज दर पर थी।
बैंक को आर्थिक नुकसान
भारती ने बैंक कर्मचारी के साथ मिलकर दस्तावेजों में हेराफेरी की। एफडी की अवधि पहले 10 साल और फिर 15 साल कर दी गई। ब्याज दरें बाजार में घटने के बावजूद वे पूरे समय 13.5 प्रतिशत ब्याज ही निकालते रहे, जिससे बैंक को नुकसान हुआ। यह फर्जीवाड़ा लंबे समय तक चलता रहा।
इस तरह हुआ मामले का खुलासा
2011 में भाजपा नेता पप्पू पुजारी बैंक अध्यक्ष बने तो उन्होंने इस अनियमितता सामने आई। सहकारिता विभाग की जांच में एफडी पर आॅडिट आपत्ति दर्ज हुई। जब भारती ने एफडी की राशि मांगी तो बैंक ने भुगतान से इनकार कर दिया। इसके बाद भारती उपभोक्ता फोरम, राज्य फोरम, राष्ट्रीय फोरम और अंत में सुप्रीम कोर्ट तक गए, लेकिन राहत नहीं मिली। 2015 में तत्कालीन कलेक्टर प्रकाश जांगरे की पहल पर आपराधिक मामला दर्ज हुआ। केस में आईपीसी की धारा 120बी, 420, 467, 468 और 471 लगाई गईं। बाद में मामला ग्वालियर से दिल्ली की एमपी-एमएलए कोर्ट में स्थानांतरित हुआ।
सजा के बाद जाएगी विधायकी
कोर्ट ने विभिन्न धाराओं में अलग-अलग सजा सुनाई, दो धाराओं में तीन-तीन साल और एक में दो साल की। कुल मिलाकर तीन साल की सजा प्रभावी मानी जा रही है। कानूनी प्रावधानों के मुताबिक दो साल या उससे अधिक सजा होने पर विधायक की सदस्यता जा सकती है। वकीलों के अनुसार, अपील दायर करने के लिए 60 दिन का समय मिलेगा। यदि हाईकोर्ट सजा पर स्टे दे देता है तो विधायकी बच सकती है। अभी सदस्यता पर संकट बरकरार है। विधायक के बेटे अनुज भारती ने कहा कि हम फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट की शरण में जाएंगे।