अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में रजिस्ट्रार पदस्थापना आदेश के बावजूद सुरेन्द्र सिंह परिहार ने चार माह से वित्त संबंधी फाइलों का निपटारा जारी रखा, प्रभार नीरजा नामदेव को नहीं सौंपा गया।
By: Star News
Jan 03, 20262:02 PM
हाइलाइट्स:
रीवा, स्टार समाचार वेब
अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में हुए दीक्षांत समारोह के बाद भोपाल से जो आदेश जारी किए गए उनमें रजिस्ट्रार सुरेन्द्र सिंह परिहार की पदस्थापना मूल विभाग में की गई थी। वहीं इनके स्थान पर नीरजा नामदेव को रजिस्ट्रार के पद पर नियुक्त करने संबंधी आदेश जारी हुए थे।
भोपाल से आए इस आदेश के बाद विश्वविद्यालय प्रबंधन भी हैरान हो गया था। हालांकि आदेश में यह स्पष्ट किया गया था कि सुरेन्द्र सिंह परिहार रजिस्ट्रार विश्वविद्यालय तत्काल मूल पद में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएं। साथ ही नीरजा नामदेव को रजिस्ट्रार का प्रभार दिया जाए। शासन द्वारा जारी किए गए पत्र को एक सप्ताह से ज्यादा हो गया है। परंतु अभी तक न तो सुरेन्द्र सिंह परिहार ने अपने मूल पदस्थापना में उपस्थिति दर्ज कराई है और न ही नीरजा नामदेव को प्रभार सौंपा है। ऐसे में माना जा रहा है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन रजिस्ट्रार को कार्यमुक्त करने में कोताही बरत रहा है।
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मैनेजमेंट की जुगलबंदी
अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार सुरेन्द्र सिंह परिहार मूल रूप से कन्या महाविद्यालय में रसायन विज्ञान के प्रोफेसर हैं। जिन्हें प्रतिनियुक्ति पर अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में रजिस्ट्रार के पद पर भेजा गया था। यहां पर यह बता दें कि पांच साल तक अपने प्रभाव के चलते यह विश्वविद्यालय में रजिस्ट्रार बने रहे और कई ऐसी फाइलों का निपटारा किया जिनका सीधा संबंध विवादों से रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी में बताया गया है कि एक सप्ताह से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी रजिस्ट्रार कई ऐसी फाइलों का निपटारा कर रहे हैं जो वित्त विभाग से संबंधित हैं। वहीं नीरजा नामदेव ने भोपाल में प्रभार न मिलने की शिकायत भी दर्ज कराई है। यहां पर यह बता दें कि सुरेन्द्र सिंह परिहार सेवानिवृत्त भी होने वाले हैं, उनका कार्यकाल मात्र चार माह का बचा हुआ है। ऐसी स्थिति में जो शासन का नियम है उसके अनुसार उन्हें मूल विभाग पर अपनी उपस्थिति दर्ज करानी चाहिए जो नहीं हो पा रहा है। उच्च शिक्षा विभाग मध्यप्रदेश भोपाल द्वारा जारी किए गए आदेश का परिपालन न किये जाने से विश्वविद्यालय प्रबंधन भी अब कठघरे में आ गया है।
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