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चैत्र नवरात्रि 2026: 19 मार्च से शुरू होगा शक्ति पर्व, जानें घटस्थापना का सबसे शुभ मुहूर्त और विशेष योग

चैत्र नवरात्रि 2026 की शुरुआत 19 मार्च से हो रही है। इस वर्ष माता का आगमन विशेष शुभ योगों में हो रहा है। जानें कलश स्थापना का सही समय, पूजा विधि और इस नवरात्रि का धार्मिक महत्व।

By: Ajay Tiwari

Mar 13, 20266:28 PM

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चैत्र नवरात्रि 2026: 19 मार्च से शुरू होगा शक्ति पर्व, जानें घटस्थापना का सबसे शुभ मुहूर्त और विशेष योग

धर्म डेस्क। स्टार समाचार वेब

चैत्र नवरात्रि 2026: तिथि और धार्मिक संयोग

सनातन धर्म में चैत्र नवरात्रि का विशेष आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व 19 मार्च से आरंभ होने जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नव संवत्सर यानी हिंदू नववर्ष की भी शुरुआत होती है। इस नौ दिवसीय उत्सव के दौरान भक्त मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की आराधना करते हैं। इस बार नवरात्रि की शुरुआत कई दुर्लभ और शुभ योगों के मेल में हो रही है, जो साधना और संकल्प के लिए अत्यंत फलदायी माने जा रहे हैं।

कलश स्थापना (घटस्थापना) का शुभ मुहूर्त

नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना का विशेष विधान है। शास्त्र सम्मत मान्यताओं के अनुसार, सही मुहूर्त में की गई घटस्थापना घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। 19 मार्च 2026 को कलश स्थापना के लिए सुबह का समय सबसे उपयुक्त रहेगा। विद्वानों के अनुसार, सूर्योदय के पश्चात शुभ चौघड़िया या अभिजीत मुहूर्त में घटस्थापना करना सर्वोत्तम होता है। भक्तों को सलाह दी जाती है कि वे राहुकाल का त्याग कर शुद्ध और पवित्र स्थान पर माता की चौकी सजाएं।

शुभ योग और मां का आगमन

इस वर्ष की चैत्र नवरात्रि कई मायनों में खास है क्योंकि ग्रहों की स्थिति और नक्षत्रों का संयोग विशेष 'राजयोग' और 'अमृत सिद्धि योग' का निर्माण कर रहा है। ऐसी मान्यता है कि इन योगों में की गई पूजा-अर्चना से भक्तों की मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं। प्रतिपदा तिथि पर मां दुर्गा का आगमन किस वाहन पर हो रहा है, इसका भी जनमानस पर गहरा प्रभाव पड़ता है। चैत्र नवरात्रि के समापन पर 27 मार्च को रामनवमी का महापर्व मनाया जाएगा, जो इस उत्सव की पूर्णता का प्रतीक है।

चैत्र नवरात्रि 2026: तिथि तालिका (Calendar)

दिन तिथि दिनांक (2026) माता का स्वरूप (पूजा)
पहला दिन प्रतिपदा 19 मार्च माँ शैलपुत्री (कलश स्थापना)
दूसरा दिन द्वितीया 20 मार्च माँ ब्रह्मचारिणी
तीसरा दिन तृतीया 21 मार्च माँ चंद्रघंटा
चौथा दिन चतुर्थी 22 मार्च माँ कुष्मांडा
पांचवां दिन पंचमी 23 मार्च माँ स्कंदमाता
छठा दिन षष्ठी 24 मार्च माँ कात्यायनी
सातवां दिन सप्तमी 25 मार्च माँ कालरात्रि
आठवां दिन अष्टमी 26 मार्च माँ महागौरी (दुर्गा अष्टमी)
नौवां दिन नवमी 27 मार्च माँ सिद्धिदात्री (राम नवमी)

  • कलश स्थापना मुहूर्त: 19 मार्च की सुबह सूर्योदय के बाद का समय (अभिजीत मुहूर्त) घटस्थापना के लिए सर्वश्रेष्ठ है।

  • हिंदू नववर्ष (विक्रम संवत 2083): 19 मार्च 2026 से ही नए हिंदू वर्ष का आरंभ भी हो रहा है।

  • राम नवमी: नवरात्रि का समापन 27 मार्च को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के जन्मोत्सव के साथ होगा।

  • आवश्यक सामग्री सूची (Checklist)

    • कलश के लिए: तांबे, पीतल या मिट्टी का कलश, शुद्ध जल, गंगाजल।

    • बुवाई के लिए: चौड़े मुँह वाला मिट्टी का पात्र (मिट्टी का सकोरा), साफ मिट्टी और जौ (जवा)।

    • पल्लव और नारियल: आम या अशोक के 5 या 7 पत्ते, जटा वाला नारियल, लाल कपड़ा और कलावा (मौली)।

    • पंचोपचार पूजन: अक्षत (बिना टूटे चावल), रोली/कुमकुम, कलावा, देसी घी का दीपक, अगरबत्ती/धूप, सुपारी, एक सिक्का और इलायची।

    • शृंगार: माता की चुनरी और लाल फूल (विशेषकर गुड़हल या गुलाब)।


    2. घटस्थापना की सरल विधि (Step-by-Step)

    1. स्थान की शुद्धि: सुबह जल्दी स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर या ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) को साफ कर गंगाजल छिड़कें।

    2. जौ बोना: मिट्टी के चौड़े पात्र में साफ मिट्टी फैलाएं और उसमें जौ के दाने समान रूप से बिखेर दें। फिर उस पर थोड़ी मिट्टी और डालें।

    3. कलश तैयार करना: मुख्य कलश को साफ करें, उस पर रोली से 'स्वास्तिक' बनाएं और गले पर मौली बांधें। कलश में शुद्ध जल और थोड़ा गंगाजल भरें।

    4. कलश में सामग्री: जल में सुपारी, एक सिक्का, अक्षत और थोड़ी रोली डालें।

    5. पल्लव और नारियल: कलश के मुख पर आम के पत्ते रखें। नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर कलावा बांधें और उसे कलश के ऊपर (पत्तों के बीच) स्थापित करें।

    6. स्थापना और संकल्प: अब इस कलश को जौ वाले पात्र के बिल्कुल बीच में स्थापित करें। हाथ में अक्षत और पुष्प लेकर माता दुर्गा का ध्यान करें और व्रत/पूजा का संकल्प लें।

    7. प्रथम पूजा: सबसे पहले गणेश जी और फिर कलश देव (वरुण देव) का पूजन करें। इसके बाद माता शैलपुत्री की आरती और अर्चना करें।


    विशेष टिप (Pro Tip):

    कलश स्थापना के बाद नौ दिनों तक अखंड ज्योति जलाने का विशेष महत्व है। यदि अखंड ज्योति संभव न हो, तो सुबह-शाम नियम से दीपक जलाएं और कलश में बोए गए जौ को नियमित रूप से थोड़ा जल देते रहें।

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