पचमढ़ी में होने वाली 'मोहन कैबिनेट' बैठक जनजातीय शासक राजा भभूत सिंह की स्मृति को समर्पित होगी। यह कदम उनकी ऐतिहासिक भूमिका और शौर्य को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास है, साथ ही पचमढ़ी की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत को भी सम्मान देगा।

पचमढ़ी में '"मोहन कैबिनेट' के मायने... मध्य प्रदेश की कैबिनेट बैठक जनजातीय समाज के शौर्य और पराक्रम के प्रतीक रहे राजा भभूत सिंह की स्मृति को समर्पित होगी। यह एक महत्वपूर्ण कदम है जो उनकी ऐतिहासिक भूमिका को पुनः स्मरण करने और जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास है। पचमढ़ी, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है, गोंड शासक राजा भभूत सिंह के ऐतिहासिक योगदान को भी समेटे हुए है। उन्होंने इस पहाड़ी भूभाग का उपयोग केवल शासन संचालन के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी सुरक्षा और सांस्कृतिक धरोहरों की रक्षा के लिए भी किया।
राजा भभूत सिंह का शासन केवल एक भौगोलिक क्षेत्र तक सीमित नहीं था, बल्कि यह उस जनजातीय समाज के अदम्य साहस और रणनीतिक कौशल का प्रतीक था, जिसने प्रतिकूल परिस्थितियों में भी अपनी पहचान और विरासत को बनाए रखा। उनकी स्मृति को समर्पित यह कैबिनेट बैठक जनजातीय गौरव को सम्मान देने और उनकी अनमोल गाथाओं को उजागर करने का एक अवसर है।
पचमढ़ी, जिसे भगवान भोलेनाथ की नगरी के रूप में भी जाना जाता है, मध्य प्रदेश का एकमात्र हिल स्टेशन है। यह स्थल अपनी शानदार प्राकृतिक विरासत के लिए विख्यात है। यहाँ की धूपगढ़ चोटी, जो समुद्र तल से लगभग 1,350 मीटर (4,429 फीट) की ऊँचाई पर स्थित है, सतपुड़ा पर्वतमाला का प्रमुख आकर्षण है। धूपगढ़ से दिखने वाला मनमोहक सूर्योदय और सूर्यास्त पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है। लेकिन यह केवल एक पर्यटन स्थल नहीं है, बल्कि यह गोंड साम्राज्य की रणनीतिक शक्ति और प्राकृतिक संरक्षण के दूरदर्शी दृष्टिकोण को भी दर्शाता है। राजा भभूत सिंह ने इस क्षेत्र के भौगोलिक लाभों को समझते हुए इसे अपनी शक्ति का केंद्र बनाया, जो उनकी दूरदर्शिता का प्रमाण है।
मंत्रि-परिषद की बैठक का आयोजन पचमढ़ी में होना न केवल प्रशासनिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह पचमढ़ी की समृद्ध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को सम्मानित करने का भी एक अनूठा अवसर है। यह बैठक यह संदेश भी देती है कि प्रदेश सरकार जनजातीय नायकों के योगदान को पहचानती है और उनकी विरासत को संरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह पहल निश्चित रूप से राज्य के जनजातीय गौरव को बढ़ावा देने और पचमढ़ी को एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल के रूप में स्थापित करने में सहायक होगी।
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