2025 धार्मिक घटनाक्रमों के लिहाज से बहुत उथल-पुथल के साथ की बड़े समारोह और उत्सवों का वर्ष रहा है। देश और दुनिया में धर्म को लेकर चर्चा चरम पर रही। अयोध्या में श्रीराम मंदिर पर वैदिक परंपराओं के पुनर्जागरण का विराट क्षण धर्म ध्वजा आरोरण में देखने को मिला।

विशेष: स्टार समाचार वेब
2025 धार्मिक घटनाक्रमों के लिहाज से बहुत उथल-पुथल के साथ की बड़े समारोह और उत्सवों का वर्ष रहा है। देश और दुनिया में धर्म को लेकर चर्चा चरम पर रही। अयोध्या में श्रीराम मंदिर पर वैदिक परंपराओं के पुनर्जागरण का विराट क्षण धर्म ध्वजा आरोरण में देखने को मिला। हिन्दुस्तान में सांस्कृतिक चेतना की विराट संस्था आरएसएस की स्थापना के 100 साल पर सफर पूरा हुआ।

25 नवंबर 2025 का दिन भारतीय सांस्कृतिक चेतना के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज हो गया। अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के मुख्य शिखर पर 161 फीट की ऊंचाई पर धर्म ध्वज का भव्य आरोहण सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं था-यह भारत की आत्मा, उसकी सनातन स्मृतियों और वैदिक परंपराओं के पुनर्जागरण का विराट क्षण था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अभिजीत मुहूर्त में ध्वजारोहण किया। वाल्मीकि रामायण की परंपराओं से प्रेरित इस धर्म ध्वज की विशेषता केवल इसका आकार नहीं, बल्कि इसमें अंकित गूढ़ आध्यात्मिक संदेश हैं। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देवगिरी महाराज ने बताया कि ध्वज में तीन पवित्र प्रतीक-सूर्य, ओम, और कोविदार वृक्ष-अंकित हैं।

2025 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने शतक यानी 100 साल पूरे कर लिए। जिसकी शुरूआत 2 अक्टूबर 2025 (विजय दशमी) से हुई है और 2026 तक चलेगा, जिसमें देशभर में शाखाओं का विस्तार, सामाजिक समरसता अभियान और बड़े आयोजन शामिल हैं, जो भारत की एकता और सांस्कृतिक पहचान पर केंद्रित हैं, जैसा कि में बताया गया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना 1925 में विजयादशमी (27 सितंबर) के दिन हुई थी। 2 अक्टूबर 2025 को नागपुर के रेशमबाग मैदान में भव्य दशहरा उत्सव आयोजित हुआ, जिसमें 21,000 स्वयंसेवकों ने भाग लिया और पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद मुख्य अतिथि थे। 1 अक्टूबर को नई दिल्ली में शताब्दी समारोह हुआ, जहां पीएम नेरेंद्र मोदी ने भाग लिया और 100 रुपए का स्मारक सिक्का जारी किया।
हादसा और शुभ उल्लू

25 अगस्त 2025 को भूस्खलन की घटना के कारण तीर्थ यात्रा की सुरक्षा को लेकर खूब चर्चा हुई। भूस्खलन में पहाड़ की ढलान से पत्थर, शिलाखंड और चट्टानें नीचे गिरने लगे। इससे बेखबर लोग इसकी चपेट में आ गए। घटना के बाद वैष्णो देवी मंदिर की तीर्थयात्रा स्थगित कर दी गई। इस घटना में करीब 34 लोगों की मौत हो गई।

17 अगस्त (शाम), 18 अगस्त (श्रृंगार आरती) और 19 अगस्त (सप्त ऋषि आरती) 2025 के दिन यह घटना घटी। वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर की शिखर पर तीन दिन तक सफेद उल्लू बैठा रहा। हिन्दू मान्यताओं में उल्लू मां लक्ष्मी का वाहन माना जाता है। इस घटना को लोग बेहद शुभ संकेत मानते हैं।

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