मध्यप्रदेश सरकार सार्वजनिक राशन वितरण प्रणाली में कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठा रही है। अब चावल की जगह गेहूं की मात्रा बढ़ाई जाएगी। राज्य के खाद्य मंत्री ने केंद्र सरकार से सहयोग मांगा है।

मध्यप्रदेश सरकार सार्वजनिक राशन वितरण प्रणाली में कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठा रही है। अब चावल की जगह गेहूं की मात्रा बढ़ाई जाएगी। राज्य के खाद्य मंत्री ने केंद्र सरकार से सहयोग मांगा है। दरअसल, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत पात्र हितग्राहियों को दिए जा रहे खाद्यान्न में चावल की जगह गेहूं की मात्रा बढ़ाई दी जाए। मध्यप्रदेश में चावल की जगह गेहूं का उपयोग बहुतायत में होता है। समय-समय पर यह देखने में आता है कि कुछ व्यापारी हितग्राहियों को प्रलोभन देकर उनसे कम दाम में चावल खरीद लेते है, जिससे बाजार में कालाबाजारी होती है। इस समस्या के समाधान के लिए मप्र में पात्र हितग्राहियों को दिए जाने वाले राशन में गेहूं की मात्रा बढ़ाया जाना हितकारी होगा। खाद्य मंत्री ने यह सुझाव नई दिल्ली में केन्द्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी से भेंट के दौरान दिया। केन्द्रीय मंत्री जोशी को मध्यप्रदेश में उपार्जन केंद्रों में सुविधाओं के विस्तार और गुणवत्ता सुधार के संबंध में किए जा रहे प्रयासों से अवगत कराया। साथ ही बताया कि प्रदेश में विकेन्द्रीयकृत उपार्जन योजना के तहत समर्थन मूल्य पर उपार्जित गेहूं में से सरप्लस मात्रा उपार्जन अवधि के पश्चात गोदामों से सी-मोड में भारतीय खाद्य निगम को प्रदान की जाती है। वर्ष 2021-22 के लिए 2.89 प्रति क्विंटल लोडिंग एव हेंडलिंग व्यय की स्वीकृति नहीं की गई थी। मंत्री ने मांग की कि भारतीय खाद्य निगम द्वारा गोदामों से उठाव किए गए गेहूं की लोडिंग एवं हेंडलिंग व्यय की राशि अभी तक स्वीकृत नहीं की गई है, जिसे शीघ्र जारी किया जाए।
खाद्य मंत्री राजपूत ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के तहत वर्ष 2020-21 से 2022-23 तक की अवधि में पात्र परिवारों को वितरित किए गए खाद्यान्न- का डाटा भारत सरकार के अन्न वितरण पोर्टल पर उपलब्ध है। इस डाटा को केंद्र के सेंट्रल रिपोजिटरी पोर्टल पर अपलोड करने की अनुमति देने के साथ 1500 करोड़ के अनुदान राशि के बकाया भुगतान जल्द किया जाए। वहीं केन्द्रीय मंत्री ने अधिकारियों से चर्चा कर जल्द भुगतान कराने का भरोसा दिया है।
राजपूत ने केन्द्रीय मंत्री से खरीफ विपणन वर्ष 2014-15 से 2018-19 तक के समर्थन मूल्य पर उपार्जित 2.95 लाख मीट्रिक टन मोटे अनाज के उपार्जन प्लान की स्वीकृति दिए जाने की भी मांग की है। केंद्र सरकार की नीति के अनुसार समर्थन मूल्य पर उपार्जित मोटे अनाज का वितरण राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के अंतर्गत पात्र परिवारों को गेहूं के आवंटन के विरुद्ध वितरण कराया जा चुका है। मंत्री ने बताया कि उपार्जन प्लान की स्वीकृति प्राप्त न होने से वितरित किए गए मोटे अनाज पर मिलने वाली अनुदान की राशि लंबित है, जिसका शीघ्र भुगतान कराया जाए।
केन्द्रीय मंत्री जोशी से मुलाकात के दौरान खाद्य मंत्री राजपूत ने बताया कि समर्थन मूल्य पर खाद्यान्न उपार्जन करने वाली सहकारी संस्थाओं को गेहूं एवं धान के उपार्जन पर मिलने वाले कमीशन में 2013 के बाद से कोई वृद्धि नहीं की गई है, जबकि अन्य राज्यों को कमीशन मद में अधिक राशि का भुगतान किया जा रहा है। समितियों को उपार्जन कार्य में हो रहे व्यय की प्रतिपूर्ति न होने से हो रही हानि से अवगत कराते हुए राजपूत ने केन्द्र से उपार्जन पर कमीशन की राशि 43 रुपए प्रति क्विंटल किए जाने की मांग की। इस पर जोशी ने जल्द राशि बढ़ाने का आश्वासन दिया। साथ ही राजपूत ने उपार्जन केन्द्रों पर खाद्यान्न की भराई, तुलाई, छापा एवं लोडिंग कार्य के लिए गेहूं और धान पर 17.72 रुपए लेबर व्यय का भुगतान 23 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ाने की मांग केंद्र से की है।


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