हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन यानी आज को बाजार लाल निशान पर खुला। वहीं पिछले दिन गुरुवार को 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 829.29 अंक गिरकर 76,034.42 अंक पर बंद हुआ था, जबकि एनएसई निफ्टी 227.70 अंक गिरकर 23,639.15 अंक पर बंद हुआ था।
By: Arvind Mishra
Mar 13, 202610:30 AM
मुंबई। स्टार समाचार वेब
हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन यानी आज को बाजार लाल निशान पर खुला। वहीं पिछले दिन गुरुवार को 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 829.29 अंक गिरकर 76,034.42 अंक पर बंद हुआ था, जबकि एनएसई निफ्टी 227.70 अंक गिरकर 23,639.15 अंक पर बंद हुआ था। दरअसल, भारतीय शेयर मार्केट में सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार की शुरुआत निगेटिव रही। प्रमुख बेंचमॉर्क इंडेक्स बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी 50 लाल निशान पर ट्रेड करते हुए ओपन हुए। खबर लिखे जाने तक बीएसई बास्केट से पावरग्रिड, एनटीपीसी, आईटीसी और रिलायंस टॉप गेनर थे। टॉप लूजर की बात करें तो एलएंडटी, टाटा स्टील, इंडिगो, एचडीएफसी बैंक और महिंद्रा एंड महिंद्रा रहे थे। 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स इंडेक्स 590.20 अंक या 0.78 प्रतिशत की गिरावट के साथ ओपन हुआ। दिन की शुरुआत सेंसेक्स ने 75,444.22 के लेवल पर की है।
निफ्टी 50 में भी गिरावट
वहीं, एनएसई निफ्टी 50 में भी गिरावट देखने को मिल रही है। निफ्टी 50 176.65 अंक या 0.75 फीसदी फिसलकर 23,462.50 के लेवल पर ओपन हुआ था। सुबह सेंसेक्स 566 अंक की गिरावट के साथ 75,467 अंक पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 50 185 अंक फिसल गई थी और 23,453 के लेवल पर ट्रेड कर रही थी।
एशियाई बाजारों में कमजोरी
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण महंगाई बढ़ने की आशंका ने शुक्रवार को एशियाई शेयर बाजारों पर दबाव बनाने का काम किया है। कारोबार के दौरान निक्केई 225 करीब 2 प्रतिशत टूट गया, जबकि टॉपिक्स इंडेक्स में लगभग 1.4 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। वहीं दक्षिण कोरिया में कोस्पी इंडेक्स करीब 3 प्रतिशत नीचे रहा। इसके अलावा हैंग सेंग इंडेक्स के भी कमजोर शुरुआत के संकेत मिले।
भारतीय बाजारों पर अतिरिक्त दबाव
बैंकिंग और बाजार विशेषज्ञ अजय बग्गा ने एक बातचीत के दौरान कहा कि विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली भारतीय बाजारों की कमजोरी की मुख्य वजह बनी हुई है। भारतीय बाजारों में फिलहाल कमजोरी के संकेत हैं। एफपीआई लगातार बड़े स्तर पर बिकवाली कर रहे हैं। जब वैश्विक बाजारों में कमजोरी आती है तो निवेशक अन्य बाजारों में अपने मार्जिन कॉल को पूरा करने के लिए भारत जैसे बाजारों से पैसा निकालते हैं, जिससे भारतीय बाजारों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
प्रमुख उत्पादकों की आपूर्ति क्षमता प्रभावित
बग्गा के अनुसार, युद्ध और ऊर्जा बाजार में अस्थिरता भी वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा रही है। मौजूदा हालात में तेल और गैस की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं और आपूर्ति को लेकर भी अनिश्चितता है। अमेरिका ने समुद्र में टैंकरों पर मौजूद 12 करोड़ बैरल रूसी तेल की खरीद की अनुमति दी है। हालांकि इसके बाद भी तेल की कीमतों में बहुत बड़ी गिरावट नहीं देखी गई। वैश्विक तेल आपूर्ति पर भी दबाव बना हुआ है क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से खाड़ी के प्रमुख उत्पादकों की आपूर्ति क्षमता प्रभावित हुई है।