आए दिन मिल रही अफसरों की मनमानी की शिकायतों पर राज्य सरकार ने सख्त कदम अख्तियार किया है। मध्य प्रदेश में अब कोई भी विभाग बिना वित्त विभाग की अनुमति आउटसोर्स पर कर्मचारी नहीं रख सकेगा। राज्य सरकार ने 2023 के आदेश में बदलाव कर दिया है।
By: Arvind Mishra
Jan 23, 202610:17 AM
भोपाल। स्टार समाचार वेब
आए दिन मिल रही अफसरों की मनमानी की शिकायतों पर राज्य सरकार ने सख्त कदम अख्तियार किया है। मध्य प्रदेश में अब कोई भी विभाग बिना वित्त विभाग की अनुमति आउटसोर्स पर कर्मचारी नहीं रख सकेगा। राज्य सरकार ने 2023 के आदेश में बदलाव कर दिया है। अब आउटसोर्स भर्ती से पहले वित्त विभाग से अनुमति लेनी होगी। विभाग ने 2023 के उस निर्देश को निरस्त कर दिया है, जिसमें विभागों को सीधी भर्ती के रिक्त चतुर्थ श्रेणी के पदों पर तात्कालिक जरूरत के अनुसार आउटसोर्स से व्यवस्था करने की अनुमति दी गई थी। वित्त विभाग के उप सचिव विवेक कुमार घारू ने सभी विभागाध्यक्ष, संभागायुक्त और कलेक्टरों को चतुर्थ श्रेणी के पदों की पूर्ति आउटसोर्स के करने संबंधी 2023 के निर्देश रद किए जाने की सूचना दी है।
पिछले निर्देशों का माना अप्रासंगिक
वित्त विभाग ने जारी नए दिशा-निर्देशों में साफ कर दिया है कि 2023 के निर्देश वर्तमान में प्रासंगिक नहीं हैं, इसलिए इन्हें निरस्त कर दिया है। निर्देश में विभागाध्यक्षों को पद चिह्नित करने, आउटसोर्स एजेंसी के चयन, बजट की व्यवस्था, निविदा राशि की गणना आदि के प्रावधान किए गए थे।
जरूरत पर लेनी होगी अनुमति
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि अब लगातार भर्तियां हो रही हैं। ऐसी स्थिति में निर्देश प्रासंगिक नहीं रह गए हैं। इसके बाद भी यदि किसी विभाग को वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर आउटसोर्स के माध्यम से रिक्त पद की पूर्ति आवश्यक है तो इसके लिए पहले वित्त विभाग की अनुमति लेनी होगी।