मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) की बोर्ड परीक्षाओं में बैठने वाले लाखों विद्यार्थियों के लिए एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहा है। एक दशक से से चले आ रहे बेस्ट ऑफ फाइव सिस्टम, जिसमें एक विषय में फेल होने पर भी छात्र पास मान लिए जाते थे, उसे अब समाप्त किया जा रहा है।

विद्यार्थियों के लिए एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहा है।
भोपाल। स्टार समाचार वेब
मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) की बोर्ड परीक्षाओं में बैठने वाले लाखों विद्यार्थियों के लिए एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहा है। एक दशक से से चले आ रहे बेस्ट ऑफ फाइव सिस्टम, जिसमें एक विषय में फेल होने पर भी छात्र पास मान लिए जाते थे, उसे अब समाप्त किया जा रहा है। एमपी बोर्ड का मानना है कि इस व्यवस्था से छात्रों का पास प्रतिशत तो बढ़ा, लेकिन उनकी शैक्षणिक योग्यता और रोजगार पाने की क्षमता प्रभावित हो रही है। इस लिए अब नए शिक्षा सत्र 2026-27 से 10वीं के छात्रों को 7 और 12वीं के छात्रों को 6 विषयों की परीक्षा देनी होगी।
बेस्ट ऑफ फाइव होगा खत्म
दरअसल, बेस्ट ऑफ फाइव सिस्टम को पूरी तरह से समाप्त करने का शिक्षा विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर लिया है। जिससे अब केवल पास होना काफी नहीं होगा, बल्कि हर मुख्य विषय में दक्षता हासिल करनी होगी। छात्रों को अपनी मेहनत का दायरा बढ़ाना होगा। मंडल ने लोक शिक्षण संचालनालय को एक प्रस्ताव भेजा है जिसमें 10वीं और 12वीं के विषयों की संख्या में बढ़ोतरी की गई है। अगर प्रस्ताव पास हो गया तो नए पैटर्न के तहत 10वीं क्लास के छात्रों को 6 की जगह 7 और 12वीं के छात्रों को 5 की जगह 6 विषयों की परीक्षा देनी होगी।
इसलिए किया जा रहा बदलाव
साल 2017 में जब बोर्ड का रिजल्ट गिर गया था, तब छात्रों को राहत देने के लिए बेस्ट ऑफ फाइव लाया गया था, लेकिन इसका दुष्परिणाम यह हुआ कि छात्रों ने गणित, अंग्रेजी और विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषयों को पढ़ना छोड़ दिया। इसका सबसे बड़ा नुकसान भारतीय सेना की भर्ती में देखा गया, जहां हर विषय में कम से कम 33 फीसदी अंक अनिवार्य होते हैं। एमपी बोर्ड के हजारों छात्र गणित या अंग्रेजी को छोड़कर पास तो हो गए, लेकिन सेना भर्ती और डाक विभाग की नौकरियों में अयोग्य घोषित कर दिए गए।
10वीं-12वीं का नया नियम
10वीं बोर्ड: अब 10वीं के छात्रों को 6 की जगह 7 पेपर देने होंगे। इसमें हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, विज्ञान, गणित और सामाजिक विज्ञान तो रहेंगे ही, साथ ही एक एनएसक्यूएफ (वोकेशनल) विषय भी अनिवार्य रूप से जुड़ जाएगा।
खास बात: अच्छी बात यह है कि रिजल्ट बेस्ट ऑफ सिक्स के आधार पर तैयार होगा। यानी छात्र 7 पेपर देंगे, लेकिन जिन 6 विषयों में सबसे ज्यादा नंबर आएंगे, उन्हीं को जोड़कर फाइनल मार्कशीट बनेगी।
12वीं बोर्ड: 12वीं में अब 5 की जगह 6 पेपर की परीक्षा देनी होगी। यहां बेस्ट आफ फाइव का नियम चलेगा। यानी 6 पेपर में से जिन 5 विषयों में सबसे अच्छे नंबर होंगे, उनके आधार पर रिजल्ट तैयार होगा।
इनका कहना है
विषयों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव सरकार को भेज दिया गया है। हमारा मकसद सिर्फ बच्चों को पास कराना नहीं, बल्कि उनकी शिक्षा के स्तर को सुधारना है ताकि उन्हें भविष्य में अच्छी नौकरियां मिल सकें। यह नया नियम 2026-27 के सत्र से शुरू करने की तैयारी है। जो छात्र अभी (2025-26) परीक्षा दे रहे हैं, उन पर कोई असर नहीं पड़ेगा, उनके लिए पुरानी व्यवस्था ही चालू रहेगी।
बुद्धेश कुमार वैद्य, सचिव, मध्यप्रदेश शिक्षा मंडल, भोपाल


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