ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में नागपंचमी का उल्लास छाया है। मंदिर की परंपरा अनुसार दरमियानी रात 12 बजे एक साल बाद श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट खोले गए। महानिर्वाणी अखाड़े के महंत गिरीजी महाराज ने भगवान नागचंद्रेश्वर की प्रथम पूजा की। इसके बाद दर्शन का सिलसिला शुरू हो गया है, जो मंगलवार रात 12 बजे तक अनवरत जारी रहेगा।


ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में नागपंचमी का उल्लास छाया है। मंदिर की परंपरा अनुसार दरमियानी रात 12 बजे एक साल बाद श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट खोले गए। महानिर्वाणी अखाड़े के महंत गिरीजी महाराज ने भगवान नागचंद्रेश्वर की प्रथम पूजा की। इसके बाद दर्शन का सिलसिला शुरू हो गया है, जो मंगलवार रात 12 बजे तक अनवरत जारी रहेगा। दरअसल, नागपंचमी के मौके पर मप्र के शिवालयों और नाग मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जा रही है। उज्जैन में श्री महाकालेश्वर मंदिर की तीसरी मंजिल पर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट रात 12 बजे खोले गए। महानिर्वाणी अखाड़ा के महंत विनीत गिरी महाराज ने त्रिकाल पूजन किया। इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए दर्शन का सिलसिला शुरू हुआ। सुबह 11 बजे तक ढाई लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके थे।
बारिश के बावजूद गेट नंबर 4 पर भक्तों की 2 किमी लंबी लाइन लगी है। श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट हर साल सिर्फ एक बार नागपंचमी के दिन 24 घंटे के लिए खोले जाते हैं। क्राउड मैनेजमेंट और सिक्योरिटी के लिए 200 सीनियर अफसर, 2500 कर्मचारी, 1800 पुलिसकर्मी और 560 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।
उधर, सेंधवा के नांगलवाड़ी में अब तक एक लाख से ज्यादा श्रद्धालु भिलटदेव के दर्शन कर चुके हैं। इससे पहले सोमवार रात 10 बजे बाबा का दूध से अभिषेक किया। रात 1 बजे फूलों से श्रृंगार हुआ। सुबह 4 बजे महाआरती के बाद 56 पकवानों का भोग लगाया गया।

श्री नागचंद्रेश्वर की प्रतिमा 11वीं शताब्दी की मानी जाती है। इसमें शिव और पार्वती, फन फैलाए नाग के आसन पर विराजमान हैं। शिव नाग शैय्या पर लेटे हैं। मां पार्वती और भगवान श्रीगणेश की प्रतिमाएं बैठी मुद्रा में हैं। प्रतिमा में सप्तमुखी नाग देवता, नंदी और सिंह भी हैं। शिव के गले और भुजाओं में नाग लिपटे हैं। श्री महाकालेश्वर मंदिर की संरचना तीन खंडों में है। सबसे नीचे महाकालेश्वर का गर्भगृह, दूसरे खंड में ओंकारेश्वर मंदिर जबकि तीसरे और शीर्ष खंड पर श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर है।


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