इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को यौन उत्पीड़न मामले में बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने चार्जशीट तक गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए मीडिया बयानबाजी पर प्रतिबंध लगाया है।
By: Ajay Tiwari
Mar 25, 20264:42 PM
इलाहाबाद। स्टार समाचार वेब
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है। जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने दोपहर करीब 3:45 बजे यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक पुलिस इस मामले में चार्जशीट दाखिल नहीं कर देती, तब तक शंकराचार्य की गिरफ्तारी नहीं की जाएगी। इससे पहले कोर्ट ने 27 फरवरी को हुई सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
जमानत मंजूर करने के साथ ही हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों पर कुछ कड़ी शर्तें भी लागू की हैं। अदालत ने आदेश दिया है कि इस विवाद से जुड़े दोनों पक्ष (शंकराचार्य और शिकायतकर्ता आशुतोष) मीडिया में किसी भी तरह की बयानबाजी या इंटरव्यू नहीं देंगे। सुनवाई के दौरान जब शंकराचार्य के वकीलों ने यात्राओं और बच्चों के संदर्भ में बयानबाजी का मुद्दा उठाया, तो कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि किसी भी शर्त का उल्लंघन होने पर विपक्षी पक्ष जमानत रद्द (Cancellation) करने की अर्जी देने के लिए स्वतंत्र होगा।
यह कानूनी विवाद तब शुरू हुआ जब तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी ने शंकराचार्य पर बटुकों के यौन उत्पीड़न का गंभीर आरोप लगाया। 8 फरवरी को जिला कोर्ट में याचिका दाखिल होने के बाद, पोक्सो स्पेशल कोर्ट के आदेश पर झूंसी पुलिस ने 21 फरवरी को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ FIR दर्ज की थी। इस मामले में गिरफ्तारी से बचने के लिए शंकराचार्य ने 24 फरवरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए गुहार लगाई थी।
कोर्ट में सुनवाई के दौरान शंकराचार्य का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता पीएन मिश्रा ने रखा, जबकि राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल और शिकायतकर्ता की ओर से वकील रीना सिंह पेश हुईं। गौरतलब है कि 27 फरवरी को कोर्ट ने गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाते हुए शंकराचार्य को जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया था। राहत मिलने के बाद शंकराचार्य ने बटुकों की पूजा की थी, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में रही थीं।