आयुर्वेद के जनक, भगवान धन्वंतरि की धनतेरस पर पूजा क्यों की जाती है? जानें तिरुमला, चेन्नई और केरल के प्रसिद्ध धन्वंतरि मंदिरों का महत्व और रोगों से मुक्ति के लिए विशेष पूजा के नियम।

स्टार समाचार वेब. धर्म डेस्क
हिंदू धर्म में भगवान धन्वंतरि को भगवान विष्णु का रूप माना जाता है और उन्हें आयुर्वेद का जनक कहा जाता है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान वह अपने हाथों में अमृत कलश और जड़ी-बूटियाँ लेकर प्रकट हुए थे। यही कारण है कि उन्हें रोगों से मुक्ति दिलाने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है।
धनतेरस का त्योहार विशेष रूप से भगवान धन्वंतरि को समर्पित है। इस दिन उनकी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और भक्त आरोग्य तथा स्वास्थ्य का वरदान मांगते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि भगवान धन्वंतरि को समर्पित सबसे अधिक प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर दक्षिण भारत में स्थित हैं। धनतेरस के दिन, देश भर से भक्त इन मंदिरों में अपने रोगों से मुक्ति पाने और दीर्घायु की कामना लेकर आते हैं।
दक्षिण भारत के कुछ महत्वपूर्ण धन्वंतरि मंदिर और उनसे जुड़ी मान्यताएँ:

आंध्र प्रदेश के तिरुमला में स्थित यह मंदिर अपनी सकारात्मक ऊर्जा और रोगों से मुक्ति दिलाने की शक्ति के लिए जाना जाता है।
मान्यता: माना जाता है कि यहाँ विशेष पूजा करने से आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ती है और धन-धान्य का आशीर्वाद भी मिलता है।
विशेष अनुष्ठान: यहाँ प्रतिवर्ष 'धन्वंतरि होमम' आयोजित किया जाता है, जिसका उद्देश्य पूरे देश का कल्याण और महामारियों से बचाव करना होता है।

चेन्नई में स्थित इस प्राचीन मंदिर में आयुर्वेदिक पूजा का अत्यधिक महत्व है।
अर्पण: भक्त दूर-दूर से आकर अपनी बीमारियों से छुटकारा पाने के लिए भगवान धन्वंतरि को जड़ी-बूटियाँ अर्पित करते हैं।
धनतेरस: इस अवसर पर मंदिर को भव्य रूप से फूलों से सजाया जाता है और विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन होता है।

केरल के वैद्यनाथपुर जिले के त्रिशूर में स्थित यह मंदिर अपनी पारंपरिक आयुर्वेदिक विरासत के लिए प्रसिद्ध है।
पूजा विधि: मान्यता है कि धनतेरस पर इस मंदिर में बैठकर पूजा और जाप करने से सभी रोगों से मुक्ति मिलती है और लंबी आयु प्राप्त होती है।
प्रसाद: भगवान को विशेष रूप से घी और तुलसी के पत्ते अर्पित किए जाते हैं, जिन्हें बाद में प्रसाद के रूप में खाया जाता है। यहाँ का विशेष प्रसाद 'मुक्कुडी' है।

केरल के थोट्टुवा में स्थित इस मंदिर के बारे में माना जाता है कि यहाँ स्वयं भगवान धन्वंतरि निवास करते हैं।
दर्शन: धनतेरस पर भक्त लंबी कतारों में लगकर भगवान के दर्शन करते हैं और प्राकृतिक चीजें प्रसाद के रूप में अर्पित करते हैं।
अनुष्ठान: भक्त अपने परिवार के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए यहाँ अनुष्ठान भी कराते हैं।

तमिलनाडु के इस मंदिर में मुख्य रूप से भगवान विष्णु और माँ लक्ष्मी की पूजा होती है, लेकिन धनतेरस के मौके पर यहाँ भगवान धन्वंतरि की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और जड़ी-बूटियों से बना प्रसाद अर्पित किया जाता है।
इन मंदिरों में दर्शन और पूजा करने का तात्पर्य यह विश्वास है कि भगवान धन्वंतरि अपने भक्तों को स्वास्थ्य का सबसे बड़ा धन प्रदान करते हैं।

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