अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को खरीदने या नियंत्रित करने की कोशिशों के खिलाफ राजधानी नूक में भारी प्रदर्शन। पीएम नीलसन भी हुए शामिल।

राजधानी नूक की सड़कों पर हजारों लोगों ने प्रदर्शन किया।
नूक (ग्रीनलैंड): स्टार समाचार वेब
आर्कटिक की जमा देने वाली ठंड भी ग्रीनलैंड के लोगों के इरादों को ठंडा नहीं कर पाई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण की कोशिशों के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा जनआंदोलन देखा गया। राजधानी नूक की सड़कों पर हजारों लोग इस संदेश के साथ उतरे कि 'ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है'।
ग्रीनलैंड की राजधानी नूक, जिसकी कुल आबादी लगभग 20 हजार है, वहां की करीब एक चौथाई जनता बर्फ से ढकी सड़कों पर उतर आई। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में राष्ट्रीय झंडे और पोस्टर लेकर अमेरिकी वाणिज्य दूतावास तक मार्च किया। सुरक्षा कारणों से पुलिस को अमेरिकी कांसुलेट सील करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना था कि वे न तो अमेरिका का हिस्सा बनेंगे और न ही अपनी स्वायत्तता का सौदा करेंगे।
इस आंदोलन की खास बात यह रही कि ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नीलसन खुद जनता के बीच पहुंचे। उन्होंने एक बर्फीले टीले पर चढ़कर झंडा लहराया और लोगों का उत्साह बढ़ाया। प्रधानमंत्री की मौजूदगी ने स्पष्ट कर दिया कि ग्रीनलैंड की सरकार और जनता इस मुद्दे पर पूरी तरह एकजुट हैं। प्रधानमंत्री ने संदेश दिया कि ग्रीनलैंड की आवाज को दबाया नहीं जा सकता।
एक तरफ ग्रीनलैंड में प्रदर्शन चल रहा था, वहीं दूसरी ओर डोनाल्ड ट्रंप ने उन यूरोपीय देशों पर 10% टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया जो ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्जे का विरोध कर रहे हैं। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि जून तक उनकी बात नहीं मानी गई, तो इस टैरिफ को बढ़ाकर 25% कर दिया जाएगा। ट्रंप का तर्क है कि चीन और रूस के प्रभाव को रोकने के लिए अमेरिका को ग्रीनलैंड की रणनीतिक जरूरत है।
ग्रीनलैंड को लेकर विवाद अब अंतरराष्ट्रीय संकट में बदल चुका है। फ्रांस, जर्मनी, स्वीडन और नॉर्वे जैसे नाटो देशों ने आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा का हवाला देते हुए वहां अपनी सैन्य तैनाती की घोषणा की है। रूस ने ट्रंप के दावों का मजाक उड़ाया है, लेकिन व्हाइट हाउस अपने रुख पर अडिग है। आर्थिक दबाव के बावजूद, ग्रीनलैंड के लोगों का कहना है कि उनके लिए 'आजादी और आत्मनिर्णय' किसी भी आर्थिक नुकसान से ऊपर है।
यह भी पढ़ें..

जबलपुर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा 100% वेतन और एरियर्स

खरमास 2025-2026: कब से कब तक रहेगा, जानें शुभ कार्यों की मनाही का कारण

ऑपरेशन सिंदूर...मुझे एक तस्वीर दिखा दो...जिसमें भारत का एक गिलास भी नहीं टूटा हो

लागू होंगे नए अवकाश नियम: CCL में वेतन कटौती, EL को 'अधिकार' नहीं मानेगा MP वित्त विभाग

आहत जनता को राहत...निचले स्तर पर आई थोक महंगाई

जैतवारा से लेकर बारामाफी तक आक्रोश

सुरक्षित और नेचुरल तरीके से बाल करना है काले तो अपनाएं ये उपाय

बची हुई चाय को दोबारा गर्म करके पीने क्या होगा, जानें इसके बारे में?

अगर 40 की उम्र कर ली है पार और रहना चाहते हैं तंदरुस्त तो अपनाएं ये आदतें

ठंडा पानी पीने और मीठा खाने पर दांतों में होती है झनझनाहट तो हो जाएं सावधान, नहीं तो हो सकती है बड़ी समस्या

ठंड में बढ़ जाती है डिहाइड्रेशन की समस्या, जानें क्या है कारण ?

तनाव से चाहिए है छुटकारा तो इन चीजों से करें तौबा, अपनाएं ये सलाह
ईरान की IRGC ने अमेरिका के F-35 स्टील्थ लड़ाकू विमान को मार गिराने का दावा किया है। जानें क्या है इस वायरल खबर की सच्चाई और अमेरिकी सेंट्रल कमांड का इस पर क्या जवाब है।
पाकिस्तान ने एक बार फिर अपने नागरिकों पर महंगाई का बम फोड़ दिया है। डीजल और पेट्रोल की कीमतें 50 फीसदी से ज्यादा बढ़ा दीं। एक महीने से भी कम समय में यह दूसरी बड़ी बढ़ोतरी है। यह बढ़ोतरी मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक तेल कीमतों में हो रही तेज वृद्धि के चलते की गई है।
रूसी सैन्य परिवहन विमान एएन-26 एक चट्टान से टकराकर क्रैश हो गया। हादसे में विमान में सवार 29 लोगों की मौत हो गई। यह दुर्घटना संभवत: किसी तकनीकी खराबी के कारण हुई है। विमान के क्रैश होने के कारणों की पड़ताल की जा रही है।
मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में तनाव चरम पर पहुँच गया है। ताजा घटनाक्रम में अमेरिका ने ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण शहर इस्फहान में एक विशाल हथियार डिपो को निशाना बनाते हुए भीषण हवाई हमला किया है।
ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघर गालिबफ ने अमेरिका और इजरायल को चेतावनी दी है कि ईरानी सेना किसी भी हमले का करारा जवाब देगी। जानें होर्मुज स्ट्रेट और अमेरिकी ठिकानों पर ईरान का क्या है नया रुख।
पाकिस्तान के बलूचिस्तान में क्वेटा के पास गैस पाइपलाइन को बम से उड़ाने की घटना ने देश में ऊर्जा संकट को गहरा दिया है। जानें कैसे उग्रवादी संगठनों ने गैस बुनियादी ढांचे को एक रणनीतिक हथियार बना लिया है।
मिडिल-ईस्ट में युद्ध के बादल छाए। अमेरिका ने ईरान की सीमा के पास 50,000 सैनिक और घातक हथियार तैनात किए। जानें ट्रंप प्रशासन की बड़ी स्ट्राइक की योजना और सैन्य तैनाती की पूरी रिपोर्ट।
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध का खतरा बढ़ा। 3500 अमेरिकी सैनिक USS त्रिपोली से मिडिल ईस्ट पहुंचे। जानें ईरान की 'नरक' वाली चेतावनी और पाकिस्तान में हो रही 3 देशों की गुप्त बैठक के मायने।
रूस ने घरेलू कीमतों को नियंत्रित करने के लिए 31 जुलाई तक पेट्रोल निर्यात रोका। जानें इजराइल-ईरान जंग और इस फैसले का भारतीय तेल बाजार पर क्या होगा असर।