अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रूबियो और भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बीच हैदराबाद हाउस में प्रतिनिधि स्तर की वार्ता हुई। इस दौरान वीजा नियमों, पश्चिम एशिया संघर्ष और रणनीतिक संबंधों पर खुलकर चर्चा हुई।

अमेरिकी विदेश सचिव (Secretary of State) मार्को रूबियो और भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के बीच रविवार को नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठक हुई। इस बैठक में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों और वैश्विक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। द्विपक्षीय वार्ता के पहले चरण के बाद दोनों नेताओं ने एक संयुक्त प्रेस वार्ता (Joint Press Conference) को संबोधित किया, जिसमें वीजा नीति, पश्चिम एशिया तनाव और रणनीतिक साझेदारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर बड़ी बातें सामने आईं।
प्रेस वार्ता के दौरान अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रूबियो ने जे1 (J1), एफ1 (F1) और एच1बी (H1B) वीजा नियमों में हाल ही में किए गए बदलावों पर भारत के सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनियों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 20 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है और अमेरिका इस निवेश को भविष्य में और बढ़ते हुए देखना चाहता है।
रूबियो ने स्पष्ट करते हुए कहा, "अमेरिका की आव्रजन प्रणाली (Immigration System) में हो रहे बदलाव या आधुनिकीकरण किसी एक देश या विशेष रूप से भारत को ध्यान में रखकर नहीं किए जा रहे हैं। यह एक वैश्विक प्रक्रिया है जिसे पूरी दुनिया में समान रूप से लागू किया जा रहा है। वर्तमान में अमेरिका अपनी पूरी आव्रजन प्रणाली को अपग्रेड कर रहा है।" उन्होंने माना कि इस बदलाव के दौर (Transition Period) में कुछ मुश्किलें आ सकती हैं, लेकिन अंततः यह एक अधिक कुशल और टिकाऊ प्रणाली साबित होगी।
पश्चिम एशिया (Middle East) में जारी तनाव पर बात करते हुए मार्को रूबियो ने एक बड़ा संकेत दिया। उन्होंने कहा, "ईरान के मामले में मुझे लगता है कि अगले कुछ घंटों में कुछ और अच्छी खबरें आ सकती हैं। इस संबंध में आगे का औपचारिक एलान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद करेंगे। फिलहाल इतना कहना पर्याप्त होगा कि कुछ महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।" रूबियो ने दोहराया कि अमेरिका का अंतिम लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार न बना सके।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के विवाद पर बोलते हुए रूबियो ने कहा, "यह एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है। ईरान द्वारा वाणिज्यिक जहाजों को नष्ट करने की धमकी देना अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत पूरी तरह अवैध है। पिछले 48 घंटों में खाड़ी क्षेत्र के हमारे सहयोगियों के साथ मिलकर एक रूपरेखा (Framework) पर काम किया गया है। यदि यह प्रयास सफल रहता है, तो होर्मुज जलमार्ग पूरी तरह से खुल सकता है।"
मार्को रूबियो ने भारत को अमेरिका के सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक साझेदारों में से एक बताया। उन्होंने कहा, "जिन मुद्दों पर हम भारत के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, उनका दायरा यह साबित करने के लिए काफी है कि भारत हमारे लिए कितना अहम है। हमारी साझेदारी की शुरुआत साझा लोकतांत्रिक मूल्यों से होती है, लेकिन यह रणनीतिक साझेदारी केवल यहीं तक सीमित नहीं है। एक सच्ची रणनीतिक साझेदारी तब होती है जब दो देशों के हित एक समान होते हैं और वे वैश्विक समस्याओं को सुलझाने के लिए मिलकर कदम बढ़ाते हैं।"
अमेरिका में भारतीय प्रवासियों के खिलाफ होने वाली नस्लभेदी टिप्पणियों के सवाल पर रूबियो ने कहा, "मैं ऐसी घटनाओं को बेहद गंभीरता से लेता हूं। इंटरनेट और सोशल मीडिया पर ऐसे लोग सक्रिय हैं जो इस तरह की बातें करते हैं। सच यह है कि दुनिया के हर देश में मूर्ख लोग होते हैं; अमेरिका में भी ऐसे लोग हैं जो हर समय बेवकूफी भरी बातें करते हैं। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि दुनिया भर से आने वाले लोगों ने ही अमेरिका को समृद्ध बनाया है।"
संयुक्त प्रेस वार्ता में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और वैश्विक भूमिका को बेहद मजबूती से सामने रखा। जयशंकर ने कहा, "भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जिसके अमेरिका, इस्राइल, ईरान और खाड़ी देशों (Gulf Countries) के साथ एक समान रूप से मजबूत और बेहतर संबंध हैं। इसलिए इस क्षेत्र में हमारी वास्तविक रुचि है।"
जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत अपनी विदेश नीति को किसी 'जोड़-घटाने के खेल' (Zero-Sum Game) के रूप में नहीं देखता। उन्होंने भारत के मुख्य सिद्धांतों को रेखांकित करते हुए कहा भारत इस पूरे क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता का पक्षधर है। विदेशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों का कल्याण और उनकी सुरक्षा भारत सरकार के लिए सर्वोपरि है। भारत एक बहुत बड़ा ऊर्जा आयातक देश है और हमारी ऊर्जा का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है, इसलिए हम तेल और ऊर्जा की कीमतों में स्थिरता देखना चाहते हैं। भारत इस क्षेत्र के माध्यम से पूरी तरह सुरक्षित और निर्बाध समुद्री व्यापार (Maritime Trade) का समर्थन करता है और व्यापारिक मार्गों पर किसी भी तरह की बाधा के खिलाफ है।

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