उज्जैन के ज्योतिषाचार्यों ने होली पर चंद्र ग्रहण की आशंकाओं को दूर किया है। जानें 3 मार्च को ग्रस्त उदित चंद्र ग्रहण का प्रभाव और धुलेंडी मनाने के शास्त्रीय नियम
By: Ajay Tiwari
Feb 27, 202612:44 PM
उज्जैन। धर्म डेस्क. स्टार समाचार वेब
होली पर चंद्र ग्रहण को लेकर आम जनमानस में उलझन की स्थिति बनी हुई है। लोग इस बात को लेकर आशंकित हैं कि ग्रहण के वेधकाल या सूतक के दौरान धुलेंडी का पर्व और रंगों का उत्सव मनाना शास्त्र सम्मत है या नहीं। हालांकि, धर्मशास्त्र के जानकारों और उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्यों ने स्पष्ट किया है कि इस बार चंद्र ग्रहण का धुलेंडी के उत्साह पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।
भस्म आरती के साथ शुरू होगा रंगोत्सव
विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकाल के मंदिर में परंपरा अनुसार होली का उल्लास देखने को मिलेगा। यहाँ सुबह 4 से 6 बजे के बीच होने वाली भस्म आरती में अबीर-गुलाल के साथ भव्य रंगोत्सव मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, भविष्य पुराण, यम स्मृति और हिमाद्री जैसे धर्मग्रंथों में ग्रहण को लेकर जो मत दिए गए हैं, उनके आधार पर इस बार के ग्रहण का प्रभाव बेहद सीमित है।
क्यों मान्य नहीं है ग्रहण का दोष?
शास्त्रों के अनुसार, यदि 'ग्रस्त उदित' चंद्र ग्रहण की अवधि एक घटी (लगभग 24 मिनट) से कम हो, तो उसका विशेष दोष मान्य नहीं होता है।
परंपरागत 'गैर' पर नहीं कोई पाबंदी
धुलेंडी के अवसर पर निकलने वाली पारंपरिक 'गैर' (होली का जुलूस) को लेकर भी स्थिति स्पष्ट कर दी गई है। शास्त्रीय मत के अनुसार, यदि ग्रहण का सूतक चार प्रहर का हो, तो उसके प्रथम प्रहर में किए गए पारंपरिक कार्यों या उत्सवों में कोई दोष नहीं माना जाता। अतः उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में निकलने वाली गेर अपने निर्धारित समय पर यथावत निकाली जा सकेगी।