पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ किया है कि भारत में ईंधन की आपूर्ति सुरक्षित है। जानें कच्चे तेल के रणनीतिक भंडार, रिफाइनिंग क्षमता और एलपीजी उत्पादन पर सरकार का पूरा डेटा।
By: Ajay Tiwari
Mar 26, 20264:44 PM
भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने देश में ईंधन संकट की तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया है। मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया है कि वर्तमान में देश के भीतर पेट्रोल, डीजल और एलपीजी (LPG) की आपूर्ति पूरी तरह से स्थिर और नियंत्रण में है। सरकार ने नागरिकों को आश्वस्त किया है कि सभी खुदरा ईंधन आउटलेट्स (पेट्रोल पंपों) के पास पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। इसके साथ ही, मंत्रालय ने जनता से अपील की है कि वे सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों पर जानबूझकर फैलाई जा रही गलत और भ्रामक जानकारियों से बचें, जो केवल घबराहट पैदा करने के उद्देश्य से चलाई जा रही हैं।
पीआईबी (PIB) द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, भारत वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक प्रमुख शक्ति है। भारत वर्तमान में दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर है और पेट्रोलियम उत्पादों के मामले में पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक देश बनकर उभरा है। वर्तमान में भारत दुनिया के 150 से अधिक देशों को परिष्कृत ईंधन की आपूर्ति कर रहा है। एक शुद्ध निर्यातक (Net Exporter) होने के नाते, भारत में घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता संरचनात्मक रूप से बेहद मजबूत है। देश भर के एक लाख से अधिक फ्यूल स्टेशन बिना किसी बाधा के निरंतर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और वैश्विक संकट के बावजूद, भारत की ऊर्जा सुरक्षा अभेद्य है। सरकार ने खुलासा किया है कि भारतीय तेल कंपनियों ने अगले 60 दिनों के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति के अनुबंध पहले ही सुरक्षित कर लिए हैं। भारत की कुल आरक्षित क्षमता 74 दिनों की है, जिसमें से लगभग 60 दिनों का वास्तविक स्टॉक कवर (कच्चा तेल, रिफाइंड उत्पाद और भूमिगत रणनीतिक भंडार) वर्तमान में उपलब्ध है। संकट के दौर में भी देश की तैयारी इतनी पुख्ता है कि आगामी दो महीनों की खरीद को पहले ही सुनिश्चित किया जा चुका है।
रसोई गैस की उपलब्धता पर सरकार ने बड़ी राहत दी है। मंत्रालय के 'एलपीजी नियंत्रण आदेश' के बाद घरेलू रिफाइनरियों के उत्पादन में 40% का उछाल आया है। वर्तमान में देश की दैनिक आवश्यकता लगभग 80 टीएमटी (TMT) है, जिसके मुकाबले घरेलू उत्पादन ही 50 टीएमटी (60% से अधिक) तक पहुँच गया है। तेल कंपनियां प्रतिदिन 50 लाख से अधिक सिलेंडरों की होम डिलीवरी कर रही हैं। मंत्रालय ने गौर किया कि बीच में अफवाहों के कारण सिलेंडर की मांग अचानक बढ़कर 89 लाख तक पहुँच गई थी, जो अब वापस सामान्य स्तर पर आ गई है। अतः उपभोक्ताओं को घबराहट (Panic Booking) में सिलेंडर बुक करने की आवश्यकता नहीं है।