मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में नामीबियाई मादा चीता आशा के आठ महीने के शावक की मौत हो गई है। वन विभाग पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है।

मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध कूनो नेशनल पार्क (Kuno National Park) से एक बार फिर दुखद खबर सामने आई है। प्रोजेक्ट चीता के तहत नामीबिया से लाई गई मादा चीता 'आशा' के आठ महीने के एक शावक की मौत हो गई है। इस घटना से वन्यजीव प्रेमियों और वन विभाग के अधिकारियों में चिंता की लहर दौड़ गई है।
अधिकारियों के अनुसार, सोमवार को नियमित निगरानी के दौरान वन विभाग की टीम को मादा चीता आशा के साथ पांच के बजाय केवल चार ही शावक दिखाई दिए। एक शावक के गायब मिलने पर अधिकारियों और वन कर्मियों में हड़कंप मच गया। इसके तुरंत बाद लापता शावक की तलाश के लिए पार्क के बड़े हिस्से में सघन तलाशी अभियान शुरू किया गया। कुछ समय की मशक्कत के बाद शावक का शव बरामद कर लिया गया।
मादा चीता 'आशा' उन शुरुआती चीतों के समूह का हिस्सा है, जिन्हें भारत में चीता पुनर्वास कार्यक्रम (Project Cheetah) के तहत नामीबिया से विशेष विमान से कूनो नेशनल पार्क लाया गया था। इस साल की शुरुआत में आशा ने पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया था, जिसे भारत में चीता प्रोजेक्ट की एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा था।
शावक की अचानक हुई मौत के स्पष्ट कारणों का अभी तक पता नहीं चल सका है। कूनो नेशनल पार्क के निदेशक उत्तम कुमार शर्मा ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया, "हम शावक की मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। शव का पोस्टमॉर्टम कराया जा रहा है, और रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह साफ हो पाएगी।"
यह दुखद घटना ऐसे समय में सामने आई है जब हाल ही में कूनो नेशनल पार्क से चीतों के प्रजनन को लेकर लगातार सकारात्मक और उत्साहजनक खबरें मिल रही थीं। पार्क में लगातार शावकों के जन्म से भारत में एक आत्मनिर्भर और स्थायी चीता आबादी तैयार करने की उम्मीदें काफी मजबूत हुई हैं।
हालिया आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में अब कुल चीतों की संख्या 59 हो गई है। इनमें से 40 शावक भारत की धरती पर ही जन्मे हैं, जो देश में चीता प्रोजेक्ट के सकारात्मक परिणामों को दर्शाता है। वर्तमान में इनमें से 15 चीते खुले जंगल में स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे हैं। वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञ अब पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि शावक की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई है या इसके पीछे अन्य कोई वजह है।
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