मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नव संवत्सर (विक्रम संवत 2083) पर मध्य प्रदेश के विकास का विजन साझा किया। जानें कृषक कल्याण वर्ष, जल गंगा संवर्धन अभियान और विक्रमोत्सव 2026 के बारे में
By: Ajay Tiwari
Mar 18, 20263:30 PM
डॉ मोहन यादव, मुख्यमंत्री मप्र
भोपाल. स्टार समाचार वेब
भारतीय सांस्कृतिक चेतना और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का प्रतीक 'नव संवत्सर' (विक्रम संवत 2083) मध्य प्रदेश के लिए केवल एक तिथि नहीं, बल्कि गौरव का पर्व है। उज्जयिनी की धरती से प्रारंभ हुई यह काल-गणना सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन, न्याय और शौर्य की याद दिलाती है। इस पावन अवसर पर राज्य सरकार विरासत को सहेजते हुए आधुनिक विकास का एक नया रोडमैप तैयार कर रही है।
सम्राट विक्रमादित्य के आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने के लिए प्रदेश में 'विक्रमोत्सव-2026' का भव्य आयोजन (12 फरवरी से 30 जून) किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उज्जैन में स्थापित 'विश्व की पहली विक्रमादित्य वैदिक घड़ी' हमारी प्राचीन खगोलीय दक्षता और आधुनिक तकनीक के मिलन का प्रमाण है। इसके साथ ही, वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ कुंभ की तैयारियाँ भी तीव्र गति से जारी हैं।
मध्य प्रदेश सरकार ने इस वर्ष को 'कृषक कल्याण वर्ष' के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। बजट और नीतियों के केंद्र में किसान हैं:
कृषि कैबिनेट: बड़वानी में आयोजित पहली कृषि कैबिनेट में 27,500 करोड़ रुपये की योजनाओं को स्वीकृति दी गई।
आय वृद्धि: प्राकृतिक खेती, आधुनिक सिंचाई तकनीक और कृषि आधारित उद्योगों (Value Addition) पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
आत्मनिर्भरता: लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों को उद्यमी बनाना है।
नव संवत्सर के अवसर पर क्षिप्रा तट, उज्जैन से "जल गंगा संवर्धन अभियान" के तीसरे चरण का शुभारंभ किया गया है। यह अभियान जल स्रोतों के पुनरुद्धार और संरक्षण को एक जन-आंदोलन बनाने का संकल्प है। मुख्यमंत्री ने आह्वान किया है कि जल की हर बूंद को सहेजकर ही हम एक 'विकसित मध्य प्रदेश' की नींव रख सकते हैं।
श्रीराम वनगमन पथ और श्रीकृष्ण पाथेय जैसे सांस्कृतिक प्रोजेक्ट्स के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ा जा रहा है। नव संवत्सर का यह उल्लास मध्य प्रदेश की प्रगति, सुख और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करेगा।