रमज़ान में खजूर से रोज़ा खोलना सुन्नत-ए-रसूल है। जानिए खजूर से इफ़्तार करने की दीनी अहमियत, रमज़ान 2026 का शेड्यूल और ईद-उल-फितर की मुमकिन तारीख।

धर्म डेस्क। स्टार समाचार वेब
इस्लाम में रमज़ान का महीना सबसे मुकद्दस (पवित्र) माना जाता है। इस पूरे माह में मुस्लिम समुदाय के लोग अल्लाह की इबादत, तिलावत-ए-कुरान और रोज़ा रखते हैं। सुबह सूरज निकलने से पहले सहरी (Sehri) और सूरज ढलने के बाद इफ़्तार (Iftar) किया जाता है। इफ़्तार के दस्तरख्वान पर सबसे अहम चीज़ खजूर होती है। आखिर खजूर से ही रोज़ा खोलना क्यों ज़रूरी माना जाता है? आइए इसके दीनी (धार्मिक) और रवायती पहलुओं को समझते हैं।
इस्लामिक तालीमात (शिक्षाओं) के मुताबिक, खजूर से रोज़ा खोलना सुन्नत माना जाता है। सुन्नत का मफ़हूम (अर्थ) है—हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के बताए हुए रास्ते पर चलना।
नबी-ए-करीम की पसंद: माना जाता है कि अल्लाह के रसूल पैगंबर मोहम्मद को खजूर बेहद पसंद थे और वे अपना रोज़ा अक्सर खजूर से ही इफ़्तार किया करते थे।
अज़्र और सवाब: सुन्नत की पैरवी करना हर मुसलमान के लिए कार-ए-खैर (नेकी का काम) है, इसलिए दुनिया भर के मुसलमान इसी सुन्नत को अपनाते हुए सबसे पहले खजूर खाकर रोज़ा खोलते हैं।
इस साल रमज़ान के मुकद्दस महीने का आगाज़ चांद दिखने के साथ 19 फरवरी 2026 को पहले रोज़े से हुआ। चूंकि इस्लामी साल कमरी कैलेंडर (Lunar Calendar) पर आधारित होता है, इसलिए हर महीना 29 या 30 दिनों का होता है।
ईद का अनुमान: चांद की रुय्यत (दिखने) के हिसाब से इस बार ईद-उल-फितर (मीठी ईद) 20 या 21 मार्च 2026 को मनाई जा सकती है।
खुशी का पैगाम: ईद के रोज़ मुसलमान ईदगाह में नमाज़-ए-ईद अदा करते हैं और एक-दूसरे को गले मिलकर दिली मुबारकबाद पेश करते हैं।
दीनी अहमियत के साथ-साथ खजूर से रोज़ा खोलने के पीछे गहरी हिकमत भी छिपी है। दिन भर भूखे-प्यासे रहने के बाद शरीर में कम हुई कुव्वत (Energy) को खजूर तुरंत बहाल (Restore) करता है। इसमें मौजूद कुदरती मिठास और फाइबर मैदे (Stomach) के लिए मुफ़ीद होते हैं और जिस्म को फौरन तवानाई बख्शते हैं।

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