ईरान युद्ध के बीच भारत ने रूस से तेल खरीद बढ़ा दी है। 'एक्वा टाइटन' समेत कई रूसी टैंकर अब चीन के बजाय भारत के बंदरगाहों पर पहुंच रहे हैं।
By: Ajay Tiwari
Mar 18, 20265:47 PM
बिजनेस डेस्क. नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
वैश्विक ऊर्जा बाजार में इस समय बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। ताजा मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस से कच्चे तेल को लेकर चीन जा रहे जहाज अब अपनी दिशा बदलकर भारत के बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं। इसमें सबसे प्रमुख नाम 'एक्वा टाइटन' का है, जो बाल्टिक सागर से तेल लेकर चीन के रिजाओ पोर्ट के लिए निकला था, लेकिन अब यह 21 मार्च को भारत के न्यू मैंगलोर पहुंचने वाला है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट (ईरान) में जारी संघर्ष की वजह से तेल की वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। इस स्थिति को देखते हुए भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए रूस से तेल के आयात में भारी बढ़ोतरी की है। चौंकाने वाली बात यह है कि भारत ने महज एक सप्ताह के भीतर रूस से लगभग 3 करोड़ बैरल तेल की खरीद की है।
मुख्य बदलाव के कारण:
अमेरिकी छूट: ईरान युद्ध के चलते बने हालातों में अमेरिका ने भारत को रूस से अधिक तेल खरीदने की अस्थायी अनुमति दी है।
बढ़ती मांग: भारत की लगभग सभी प्रमुख रिफाइनरियां इस समय रूसी तेल की प्रोसेसिंग कर रही हैं।
रणनीतिक बदलाव: 'एक्वा टाइटन' के अलावा 'जौजू एन' जैसे कम से कम 7 बड़े टैंकर चीन के बजाय अब भारत के सिक्का और अन्य बंदरगाहों की ओर आ रहे हैं।
वर्तमान भू-राजनीतिक समीकरणों में रूस अब चीन के मुकाबले भारत को प्राथमिकता दे रहा है। ईरान संकट ने भारत के लिए रूस को एक भरोसेमंद विकल्प बना दिया है। यदि यही रुझान जारी रहा और जापान या दक्षिण कोरिया जैसे देश भी फिर से रूसी तेल की ओर रुख करते हैं, तो आने वाले समय में वैश्विक तेल कीमतों में बड़ी हलचल देखने को मिल सकती है।