शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ यौन उत्पीड़न मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई। जानें क्या है पूरा विवाद, FIR और शंकराचार्य का बयान।
By: Ajay Tiwari
Feb 27, 20263:36 PM
अभी-अभी... इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। अविमुक्तेश्वरानंद ने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए याचिका लगाई थी। सरकार के वकील ने जमानत का विरोध किया। वहीं, शंकराचार्य के वकील ने कहा, यह केस एक धर्मगुरु का है, न कि किसी अपराधी का। पूरा मामला साजिश का है।
प्रयागराज/वाराणसी। स्टार समाचार वेब
ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ कथित यौन उत्पीड़न का मामला अब इलाहाबाद हाईकोर्ट की चौखट पर पहुंच गया है। जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की सिंगल बेंच शंकराचार्य की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करेगी। यह मामला बटुकों (शिष्यों) के साथ कुकर्म के आरोपों से जुड़ा है, जिसमें पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है।
सुनवाई से पहले वाराणसी में मीडिया से बात करते हुए शंकराचार्य ने इन आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा...
"सत्य की जीत होगी और झूठ की उम्र लंबी नहीं होती। हम कोर्ट में मजबूती से अपना पक्ष रखेंगे। सच सामने लाने के लिए अगर नार्को टेस्ट की भी जरूरत पड़े, तो वह होना चाहिए। यदि फैसला पक्ष में नहीं आता है, तो हम सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे।"
यह विवाद प्रयागराज माघ मेले के दौरान शुरू हुआ था। तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी की याचिका पर स्पेशल पॉक्सो कोर्ट के आदेश के बाद झूंसी थाने में FIR दर्ज की गई थी।
आरोप: महाकुंभ 2025 और माघ मेला 2026 के दौरान बच्चों के यौन शोषण का आरोप लगाया गया है।
मेडिकल रिपोर्ट: पुलिस सूत्रों के अनुसार, बच्चों की मेडिकल जांच में कुकर्म की पुष्टि होने का दावा किया गया है।
आरोपी: एफआईआर में शंकराचार्य, उनके शिष्य मुकुंदानंद और अन्य अज्ञात लोगों को नामजद किया गया है।
इस हाई-प्रोफाइल मामले के बीच शंकराचार्य के वकील श्रीनाथ त्रिपाठी को जान से मारने और कचहरी को बम से उड़ाने की धमकी मिली थी। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए 20 घंटे के भीतर आरोपी अजीत कुमार सरोज को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़ा गया आरोपी कानून का छात्र है और उसने स्वीकार किया कि उसने अपने पड़ोसी को फंसाने के लिए यह धमकी भरा संदेश भेजा था।
18 जनवरी: माघ मेले में प्रशासन और शंकराचार्य के बीच विवाद।
24 जनवरी: आशुतोष महाराज ने पुलिस कमिश्नर से लिखित शिकायत की।
21 फरवरी: कोर्ट के आदेश पर झूंसी थाने में केस दर्ज।
24 फरवरी: शंकराचार्य ने पुलिस प्रशासन पर साजिश का आरोप लगाया और हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की।
26 फरवरी: मेडिकल रिपोर्ट में कथित तौर पर पुष्टि और एक पीड़ित का मीडिया के सामने बयान।