रीवा में फर्जी अनुकंपा नियुक्ति घोटाले की 10 माह चली जांच की अंतरिम रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी गई है। रिपोर्ट में तत्कालीन डीईओ सुदामा लाल के साथ एक पूर्व डीईओ जीपी उपाध्याय की भूमिका भी सामने आई है। जांच में कई फर्जी नियुक्तियों का खुलासा हुआ, जिन पर एफआईआर दर्ज हो चुकी है। मामला विधानसभा तक गूंज चुका है।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि आर्थिक रूप से सक्षम विवाहित बेटी को अनुकंपा नियुक्ति पर दयापूर्वक विचार नहीं किया जा सकता, खासकर जब परिवार के अन्य सदस्य उस पर निर्भर न हों।
रीवा जिले में शिक्षा विभाग के सबसे बड़े फर्जी अनुकंपा नियुक्ति घोटाले का मामला अब विधानसभा में गूंजेगा। पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल ने पांच वर्षों की अनुकंपा नियुक्तियों की जानकारी विधानसभा प्रश्न के जरिए मांगी है। अब तक जांच में 6 से अधिक फर्जी नियुक्तियों का खुलासा हो चुका है, जिनमें फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र, गलत यूनिक आईडी और दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। कई निलंबित अधिकारियों पर FIR हो सकती है। STAR समाचार ने सबसे पहले इस मुद्दे को उजागर किया था, जो अब प्रदेश स्तरीय घोटाले में तब्द















