अमेरिका के 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनावों में ट्रम्प और रिपब्लिकन पार्टी की मुश्किलें बढ़ीं। महंगाई, ईरान युद्ध और घटती लोकप्रियता के बीच क्या डेमोक्रेट्स बना पाएंगे कांग्रेस में बहुमत?

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3 नवंबर को होने वाले अमेरिका के मिडटर्म चुनाव सत्तारूढ़ रिपब्लिकन पार्टी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के लिए एक बड़ी राजनीतिक परीक्षा साबित हो सकते हैं। देश में बढ़ती महंगाई, ईरान के साथ जारी भू-राजनीतिक तनाव और राष्ट्रपति ट्रम्प की गिरती अप्रूवल रेटिंग्स के कारण रिपब्लिकन पार्टी के सामने अमेरिकी संसद (कांग्रेस) में अपना बहुमत बनाए रखने की गंभीर चुनौती पैदा हो गई है। हाल ही में आए 10 प्रमुख राष्ट्रीय जनमत सर्वेक्षणों (Polls) में से केवल एक में ही रिपब्लिकन पार्टी आगे दिख रही है, जिससे उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर कयास तेज हो गए हैं।
गौरतलब है कि मिडटर्म चुनाव में राष्ट्रपति पद का चुनाव नहीं होता, बल्कि अमेरिकी संसद के दोनों सदनों—'हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स' (निचला सदन) और 'सीनेट' (ऊपरी सदन)—की सीटों के लिए मतदान किया जाता है। वर्तमान में दोनों ही सदनों में रिपब्लिकन पार्टी को मामूली बहुमत हासिल है। यदि विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी पर्याप्त सीटें जीतने में सफल रहती है, तो वह एक या दोनों सदनों में बहुमत बना सकती है। ऐसा होने पर राष्ट्रपति ट्रम्प के लिए अपने विधायी प्राथमिकताओं और प्रशासनिक फैसलों को लागू करना बेहद मुश्किल हो जाएगा।
अमेरिका में राष्ट्रपति के कामकाज को लेकर जनसमर्थन में भारी कमी देखी जा रही है। विभिन्न प्रतिष्ठित सर्वेक्षणों के आंकड़ों के अनुसार, केवल 30% से 36% अमेरिकी नागरिक ही वर्तमान में ट्रम्प के कामकाज से संतुष्ट हैं।
विभिन्न पोलिंग एजेंसियों के आंकड़े इस गिरावट को स्पष्ट दर्शाते हैं:
NBC न्यूज: 34% लोगों ने ट्रम्प के कामकाज का समर्थन किया।
वॉशिंगटन पोस्ट-ABC न्यूज: 33% उत्तरदाताओं ने ट्रम्प की नीतियों को सही ठहराया।
फॉक्स न्यूज: 36% लोगों ने ट्रम्प के फैसलों पर सहमति जताई।
प्यू रिसर्च सेंटर: सबसे कम, यानी मात्र 30% लोगों ने ट्रम्प के नेतृत्व में भरोसा जताया।
यह आंकड़ा ट्रम्प के पहले कार्यकाल के उस दौर से भी नीचे चला गया है, जब जनवरी 2021 में अमेरिकी संसद (कैपिटल हिल) पर हुई हिंसा के बाद उनकी रेटिंग गिरकर 34% हो गई थी।
2024 के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान डोनाल्ड ट्रम्प ने देशवासियों से वादा किया था कि वे जीवन-यापन की लागत घटाएंगे और मुद्रास्फीति पर काबू पाएंगे। हालांकि, वर्तमान में कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, जो अब उनकी पार्टी के लिए सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बन गई हैं।
अंडे, दूध, ब्रेड, मांस और ताजी सब्जियों जैसी रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं के दाम 20% से 30% तक बढ़ चुके हैं। अमेरिका में मकानों का औसतन मासिक किराया लगभग $1,900 (करीब 1.60 लाख रुपये) के ऐतिहासिक उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। इसके साथ ही पेट्रोल और डीजल की दरों में लगभग 20% का इजाफा देखा गया है। यद्यपि कुछ क्षेत्रों में वेतन वृद्धि हुई है, लेकिन महंगाई की ऊंची दर ने उस आय वृद्धि के प्रभाव को लगभग शून्य कर दिया है।
रॉयटर्स-इप्सोस पोल के अनुसार, 78% अमेरिकियों का मानना है कि उनकी कमाई की तुलना में खर्च बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं। इसके अलावा, एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट में 65% उत्तरदाताओं ने इस महंगाई के लिए ट्रम्प प्रशासन की नीतियों को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। राष्ट्रीय सर्वे बताते हैं कि 37% से अधिक लोग महंगाई को देश की सबसे गंभीर समस्या मानते हैं।
ईरान के साथ बढ़ते सैन्य और कूटनीतिक तनाव ने ट्रम्प प्रशासन की विदेश नीति पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इस संघर्ष के कारण वैश्विक और घरेलू स्तर पर ईंधन के दाम और बढ़ सकते हैं, जिससे आम जनता की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
foreign policy और ईरान संकट पर जनता की प्रतिक्रिया:
NBC न्यूज पोल के अनुसार, केवल 29% अमेरिकियों ने ईरान संकट से निपटने के ट्रम्प के तरीके को सही माना।
फॉक्स न्यूज पोल में 64% लोगों ने प्रशासन की विदेश नीति की कड़ी आलोचना की।
हालांकि, रिपब्लिकन पार्टी के पारंपरिक समर्थकों के बीच ट्रम्प का आधार अभी भी मजबूत है। AP के एक सर्वेक्षण में 69% रिपब्लिकन मतदाताओं ने राष्ट्रपति के विदेशी मामलों के संचालन का समर्थन किया। इसके बावजूद, यदि ईंधन की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो इसका सीधा असर मिडटर्म चुनावों के नतीजों पर पड़ सकता है।
राष्ट्रपति की गिरती लोकप्रियता का असर अब रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी स्पष्ट दिखने लगा है। रॉयटर्स की एक हालिया विश्लेषणात्मक रिपोर्ट के अनुसार, कड़ी टक्कर वाली 62 प्रमुख सीटों में से 41 सीटों पर चुनाव लड़ रहे रिपब्लिकन उम्मीदवार सार्वजनिक रूप से ट्रम्प की कुछ नीतियों से असहमति जता रहे हैं और उनसे एक दूरी बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।
यह एक रणनीतिक कदम है, जिसके तहत उम्मीदवार निर्दलीय और मध्यमार्गी मतदाताओं (Independent voters) को साधने की कोशिश कर रहे हैं। इन उम्मीदवारों के सामने मुख्य दुविधा यह है कि यदि वे ट्रम्प के बहुत करीब दिखते हैं, तो उन्हें आम मतदाताओं की नाराजगी झेलनी पड़ सकती है; वहीं यदि वे उनसे पूरी तरह दूरी बना लेते हैं, तो ट्रम्प के कट्टर समर्थकों के वोट खोने का जोखिम बना रहता है।
यदि विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी प्रतिनिधि सभा या सीनेट में से किसी एक में भी बहुमत हासिल कर लेती है, तो ट्रम्प प्रशासन का विधायी मार्ग बेहद कठिन हो जाएगा। अमेरिकी राजनीतिक व्यवस्था में बजट पारित करने, सरकारी खर्च मंजूर करने और कानून बनाने का अंतिम अधिकार कांग्रेस के पास ही होता है।
बहुमत मिलने की स्थिति में डेमोक्रेट्स न केवल ट्रम्प के नए प्रस्तावों और विधायकों को रोक सकते हैं, बल्कि उनके पिछले फैसलों और प्रशासनिक कामकाज की जांच (Congressional Investigations) भी शुरू कर सकते हैं। हालांकि, रिपब्लिकन पार्टी के पास चुनाव प्रचार के लिए मजबूत वित्तीय संसाधन मौजूद हैं, और डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों की कुछ नीतियों को लेकर मध्यमार्गी मतदाताओं में हिचकिचाहट का फायदा भी रिपब्लिकन पार्टी को मिल सकता है।
अमेरिका के 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनावों में ट्रम्प और रिपब्लिकन पार्टी की मुश्किलें बढ़ीं। महंगाई, ईरान युद्ध और घटती लोकप्रियता के बीच क्या डेमोक्रेट्स बना पाएंगे कांग्रेस में बहुमत?
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