अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की को नया राष्ट्रपति चुनने की बात कही है। रूस-यूक्रेन युद्ध, रूसी डीजल पर पाबंदी हटाने और ताजा हमलों के पूरे घटनाक्रम की विस्तृत रिपोर्ट पढ़ें।

अमेरिका, रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे भू-राजनीतिक संघर्ष में एक नया और तीखा मोड़ आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को एक सनसनीखेज बयान देते हुए कहा कि यूक्रेन को एक नया राष्ट्रपति चुनना चाहिए। पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन के साथ इस लंबे युद्ध को खत्म करने के लिए एक शांति समझौता करना चाहते हैं, लेकिन यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की बातचीत के हर सही मौके को गंवा रहे हैं। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय पर सामने आया है जब एक दिन पहले ही अमेरिका ने रूस से डीजल खरीदने की घोषणा की थी, जिस पर जेलेंस्की ने कड़ी आपत्ति जताई थी।
पाबंदियां हटाने का फैसला
यह पूरा विवाद तब और गहरा गया जब अमेरिका ने ईरान-अमेरिका और इजराइल के युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर बढ़ती ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए रूस के डीजल निर्यात पर लगी पाबंदियों को अगले साल अप्रैल तक हटाने का फैसला किया। इस कदम से रूस के लिए अमेरिका और अन्य देशों को डीजल बेचने का रास्ता साफ हो गया है। यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने इस फैसले को एक बेहद कमजोर कदम करार देते हुए कहा कि इससे रूस को भारी आर्थिक लाभ होगा और वह इस पैसे का इस्तेमाल यूक्रेन के खिलाफ युद्ध को और अधिक आक्रामक तरीके से जारी रखने में करेगा।्र
रिफाइनरियों पर हमले की निंदा
इसके साथ ही, ट्रंप ने यूक्रेन की ओर से रूस की तेल रिफाइनरियों पर लगातार किए जा रहे ड्रोन हमलों की भी जमकर आलोचना की। उनका मानना है कि इन हमलों से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की गंभीर समस्या पैदा हो सकती है। दूसरी ओर, यूक्रेन का कहना है कि वह रूस की तेल से जुड़ी सुविधाओं को निशाना बनाकर उसकी युद्ध क्षमता और सेना तक ईंधन पहुंचाने की व्यवस्था को कमजोर कर रहा है। रूस द्वारा फरवरी 2022 में शुरू किए गए इस बड़े हमले के बाद से दोनों देशों के बीच तबाही का सिलसिला जारी है। ताजा घटनाओं के तहत, 20 सितंबर 2026 को यूक्रेन के एक बड़े ड्रोन हमले में रूसी तेल रिफाइनरी को भारी नुकसान पहुंचा था।
जेलेंस्की ने इन तमाम आलोचनाओं और बयानों का करारा जवाब देते हुए रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि यूक्रेन रूस की तेल रिफाइनरियों पर हमले रोकने के लिए पूरी तरह तैयार है, बशर्ते रूस भी बदले में यूक्रेन के ऊर्जा ठिकानों पर हमले बंद कर दे। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऊर्जा संयंत्रों पर हमले आज से ही रोके जा सकते हैं, लेकिन रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ऐसा नहीं चाहते हैं। यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रिय सिबिहा ने भी ट्रंप के बयान का पुरजोर विरोध करते हुए स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति जेलेंस्की को यूक्रेनी जनता का पूर्ण समर्थन प्राप्त है और अपने देश के नेता को चुनने का लोकतांत्रिक अधिकार केवल यूक्रेन के नागरिकों के पास ही है।
युद्ध रोकने की कोशिशें बेमतलब
युद्ध विराम की कोशिशों के तहत 9 अक्टूबर को मियामी में अमेरिका और यूक्रेन के अधिकारियों के बीच करीब 6 घंटे तक मैराथन बैठक हुई, जिसमें ट्रंप के दूत जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ भी शामिल थे। हालांकि, यह बैठक पूरी तरह बेनतीजा रही। सितंबर के आखिर में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान अमेरिका ने रूस को मनाने के लिए कुछ आर्थिक प्रस्ताव भी रखे थे, जिसमें पश्चिमी देशों में जब्त रूसी संपत्तियों का कुछ हिस्सा लौटाना, लुकोइल कंपनी की संपत्तियां बेचना और बेलारूस को पोटाश बेचने की छूट देना शामिल था, ताकि ऊर्जा और समुद्री ठिकानों पर हमले रोके जा सकें। लेकिन इन तमाम कूटनीतिक कोशिशों के बावजूद जमीन पर हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है।
रविवार को एक ओर जहां यूक्रेन ने रूस के व्लादिमीर शहर में भीषण ड्रोन हमला कर टेक कंपनी यांडेक्स के डेटा सेंटर को बंद कर दिया, जिससे कजाखस्तान, बेलारूस और आर्मेनिया तक टैक्सी बुकिंग और बैंकिंग सेवाएं ठप हो गईं; वहीं दूसरी ओर जापोरिज्जिया शहर में हुए एक रूसी हमले में चार बच्चों समेत 23 नागरिकों की मौत हो गई और 30 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके अलावा रूस के ब्रियांस्क इलाके में भी यूक्रेनी ड्रोन हमले में एक व्यक्ति की जान चली गई। इन ताजा हमलों और बयानों से यह साफ हो गया है कि निकट भविष्य में इस खूनी संघर्ष के थमने के आसार फिलहाल दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहे हैं।
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