वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के कुछ हिस्सों में बैठकर भोजन करना बेहद अशुभ माना जाता है। जानिए ऐसी 5 जगहों के बारे में जो आपके जीवन में कंगाली, मानसिक तनाव और बीमारियां ला सकती हैं।

लाइफ स्टाइल। स्टार समाचार वेब
भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में भोजन करना केवल पेट भरने का जरिया नहीं, बल्कि एक पवित्र संस्कार माना गया है। यही वजह है कि हमारे शास्त्रों में भोजन करने की दिशा, स्थान और वातावरण को लेकर बेहद कड़े नियम बताए गए हैं।
आज की आधुनिक और भागदौड़ भरी लाइफस्टाइल में लोग अक्सर अपनी सुविधा के अनुसार घर के किसी भी कोने में बैठकर खाना खा लेते हैं। लेकिन वास्तु शास्त्र के विशेषज्ञों के मुताबिक, अनजाने में की गई यह लापरवाही आपके जीवन में गंभीर आर्थिक संकट, मानसिक तनाव और बीमारियों का कारण बन सकती है।
वास्तु विज्ञान के अनुसार, घर के ऐसे ही 5 प्रमुख स्थान चिन्हित किए गए हैं, जहाँ बैठकर भोजन करना पूरी तरह वर्जित और बेहद अशुभ माना गया है....
अक्सर लोग बेडरूम में आराम फरमाते हुए या टीवी देखते हुए बिस्तर पर ही भोजन करना पसंद करते हैं, जो वास्तु के लिहाज से सबसे बड़ी भूल है।
नकारात्मक प्रभाव: मान्यता है कि बिस्तर पर बैठकर भोजन करने से अन्न का अपमान होता है, जिससे व्यक्ति की सेहत पर सीधा नकारात्मक असर पड़ता है। इसके अलावा, यह आदत घर में दरिद्रता (आर्थिक तंगी) लाती है और परिवार के सदस्यों के बीच मानसिक तनाव को बढ़ाती है।
घर की मुख्य चौखट को देवी लक्ष्मी के आगमन का द्वार माना जाता है। वास्तु के अनुसार, कभी भी मुख्य दरवाजे के पास या चौखट पर बैठकर खाना नहीं खाना चाहिए।
नकारात्मक प्रभाव: इस स्थान पर भोजन करने से घर के भीतर आने वाली सकारात्मक ऊर्जा बाधित होती है और नकारात्मकता (Negative Energy) का प्रभाव तेजी से बढ़ता है। इसका सीधा असर घर की सुख-समृद्धि पर पड़ता है।
कई घरों में जगह की कमी या जल्दबाजी के कारण लोग किचन में जलते हुए चूल्हे या गैस स्टोव के बिल्कुल समीप बैठकर ही भोजन करने लगते हैं, जिसे शास्त्र सम्मत नहीं माना गया है।
नकारात्मक प्रभाव: अग्नि तत्व के बिल्कुल नजदीक बैठकर भोजन करने से व्यक्ति के भीतर तामसिक प्रवृत्तियां और गुस्सा बढ़ सकता है। इससे घर के सदस्यों के बीच आपसी तालमेल बिगड़ता है और बेवजह के विवाद पैदा होते हैं। इसलिए रसोई में खाना पकाने और खाने का स्थान अलग होना चाहिए।
धार्मिक और वास्तु मान्यताओं के अनुसार, भोजन करते समय देव स्थान या घर के मंदिर से उचित दूरी बनाए रखनी चाहिए।
नकारात्मक प्रभाव: पूजा घर को अत्यंत पवित्र और शुद्ध स्थान माना गया है। मंदिर के बिल्कुल करीब बैठकर भोजन करने से उस स्थान की पवित्रता प्रभावित होती है, जिससे देवी-देवता रुष्ट हो सकते हैं और जीवन में तरक्की व प्रगति रुक सकती है।
घर का वह कोना जहाँ कबाड़ रखा हो, अंधेरा रहता हो या साफ-सफाई न हो, वहाँ बैठकर कभी भी खाने की थाली नहीं लगानी चाहिए।
नकारात्मक प्रभाव: अव्यवस्थित और गंदे स्थानों पर राहू और नकारात्मक शक्तियों का वास माना जाता है। ऐसी जगहों पर बैठकर भोजन करने से दूषित ऊर्जा सीधे हमारे शरीर और मन में प्रवेश करती है, जिससे विचार नकारात्मक होते हैं और भाग्य का साथ मिलना बंद हो जाता है।
वास्तु एक्सपर्ट्स की सलाह: क्या है भोजन का सही नियम?
वास्तु शास्त्र के अनुसार, भोजन हमेशा साफ-सुथरी, शांत और व्यवस्थित जगह पर ही करना चाहिए। इसके लिए डाइनिंग टेबल या जमीन पर आसन बिछाकर बैठना सबसे उत्तम विकल्प है। भोजन करते समय आपका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना सबसे शुभ और फलदायी माना गया है।

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