भगवान शिव के प्रिय श्रावण मास के दूसरे सोमवार पर देशभर के शिवालयों में आस्था और भक्ति का अद्भुत जनसैलाब उमड़ पड़ा। रिमझिम और तेज बारिश के बावजूद शिवभक्तों के उत्साह में कोई कमी नहीं आई। इस बार सावन सोमवार के साथ प्रदोष व्रत का विशेष संयोग बनने से शिव आराधना का महत्व और बढ़ गया।

दुर्लभ महासंयोग पर शिवभक्ति में लीन हुई बाबा की नगरी
महाकाल में भस्म आरती, काशी में छह द्वारों से मिला प्रवेश
उज्जैन में पंचामृत अभिषेक और ओंकारेश्वर में महाश्रृंगार
शिवालयों में उमड़ा आस्था का सैलाब, शिव का विशेष श्रृंगार

भोपाल/नई दिल्ली।स्टार समाचार वेब
भगवान शिव के प्रिय श्रावण मास के दूसरे सोमवार पर देशभर के शिवालयों में आस्था और भक्ति का अद्भुत जनसैलाब उमड़ पड़ा। रिमझिम और तेज बारिश के बावजूद शिवभक्तों के उत्साह में कोई कमी नहीं आई। इस बार सावन सोमवार के साथ प्रदोष व्रत का विशेष संयोग बनने से शिव आराधना का महत्व और बढ़ गया। उज्जैन के महाकालेश्वर से लेकर काशी विश्वनाथ, ओंकारेश्वर और अयोध्या-गोरखपुर तक पूरा देश बम-बम भोले के जयकारों से गुंजायमान रहा। 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के कपाट तड़के 2:30 बजे खोले गए। वीरभद्र जी से आज्ञा लेने के बाद कर्पूर आरती और नंदी जी का स्नान-ध्यान कराया गया। जल, दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और फलों के रस से पंचामृत अभिषेक के बाद बाबा महाकाल का भांग, चंदन, ड्राई फ्रूट्स, रजत मुकुट और रुद्राक्ष माला से दिव्य श्रृंगार किया गया। महानिवार्णी अखाड़े की ओर से भस्म अर्पित की गई।

वीआईपी-आम दर्शन व्यवस्था

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा भस्म आरती में शामिल हुए। आम श्रद्धालुओं के लिए दो अलग-अलग प्रवेश मार्गों (त्रिवेणी संग्रहालय/नंदी द्वार और नीलकंठ द्वार) से सुगम दर्शन की व्यवस्था की गई। इस दौरान लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। यहां सुरक्षा व्यवस्था के भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में महाश्रृंगार
तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में तड़के 4 बजे से ही दर्शन के लिए लंबी कतारें लगीं। ज्योतिर्लिंग का महाश्रृंगार कर महाभोग लगाया गया। उधर, भिंड के कुंडेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं ने पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण कर रुद्र व पंचाक्षरी मंत्रों के जाप के साथ पूजन किया।
जबलपुर में सबसे बड़ी कांवड़ यात्रा
जबलपुर में गौरीघाट से कैलाश धाम तक 16वें वर्ष की 33 किलोमीटर लंबी संस्कार कावड़ यात्रा निकाली गई। यात्रा में कैबिनेट मंत्री प्रह्लाद सिंह सिंह पटेल और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी एक साथ शामिल हुए, जबकि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी यात्रा में सहभागिता करने पहुंचे। यात्रा के स्वागत के लिए 300 से अधिक सामाजिक संगठनों ने पंडाल लगाए।
काशी विश्वनाथ: छह द्वारों से भक्तों को प्रवेश

बाबा विश्वनाथ धाम में सावन के दूसरे सोमवार को 7 लाख से अधिक श्रद्धालुओं और कांवड़ियों के पहुंचने का दावा किया गया है। गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण सुरक्षा कारणों से गंगा-भैरव द्वार को बंद कर दिया गया। भक्तों को सरस्वती द्वार, गेट नंबर 4, सिल्को गली, काशी द्वार 4बी, नंदूफारिया और ढूंढिराज प्रवेश द्वार से ही प्रवेश दिया गया। भोर में मंगला आरती के बाद से ही श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान कर जलाभिषेक किया।
अयोध्या, कानपुर और गोरखपुर शिवमय
अयोध्या में सरयू नदी में पवित्र स्नान के बाद लाखों कांवड़ियों और शिवभक्तों ने प्रसिद्ध नागेश्वरनाथ और क्षीरेश्वर नाथ मंदिरों में जलाभिषेक किया। सरयू तट से लेकर राम मंदिर परिसर क्षेत्र तक बोल बम का उद्घोष होता रहा। कानपुर के प्रसिद्ध बाबा आनंदेश्वर मंदिर में रविवार देर रात से ही भक्तों की कतारें लग गई थीं। गंगा तट स्थित सभी शिवालयों में दोपहर तक जलाभिषेक का क्रम जारी रहा। वहीं गोरखपुर के महादेव झारखंडी, बाबा मुक्तेश्वरनाथ (राजघाट) और मानसरोवर मंदिर में भोर से ही घंटे-घड़ियाल की गूंज के बीच श्रद्धालुओं ने दूध, जल, बेलपत्र और धतूरा अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की।


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