1 जून 2026 को देवगुरु बृहस्पति कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। ज्योतिष के अनुसार यह महागोचर सुख, समृद्धि, ज्ञान और भाग्य में वृद्धि का संकेत देता है तथा सभी राशियों पर व्यापक प्रभाव डालेगा।

हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
1 जून 2026 की तारीख ज्योतिषीय इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज होने जा रही है। ज्ञान, बुद्धि, संतान, और भाग्य के कारक ग्रह देवगुरु बृहस्पति अपनी सबसे प्रिय और उच्च राशि कर्क में प्रवेश कर रहे हैं। गुरु यहां 31 अक्टूबर 2026 तक यानी पूरे 5 महीने रहेंगे। ज्योतिष शास्त्र में गुरु को सबसे शुभ ग्रह माना गया है, और जब वे अपनी उच्च राशि में होते हैं, तो उनकी शुभता और शक्ति 100 गुना बढ़ जाती है। पिछले कुछ समय से वैश्विक स्तर पर चल रही उथल-पुथल, मंदी की आहट और मानसिक तनाव के बीच गुरु का यह गोचर मानवता के लिए एक 'संजीवनी' की तरह काम करेगा।
महागोचर 2026: सुख, समृद्धि और ज्ञान के प्रदाता अपनी उच्च राशि में
दिनांक 1 जून 2026 को ब्रह्मांड में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव डालने वाली घटना घटने जा रही है। देवताओं के गुरु, ज्ञान, भाग्य, धर्म और संतान के कारक ग्रह बृहस्पति (गुरु) अपनी सबसे प्रिय और उच्च राशि कर्क में प्रवेश करने जा रहे हैं। ज्योतिष शास्त्र में गुरु को सबसे शुभ और कल्याणकारी ग्रह माना गया है। जब ऐसा परोपकारी ग्रह अपनी परम उच्च राशि में आता है, तो उसकी सकारात्मक ऊर्जा और शुभ फल देने की क्षमता सौ गुना बढ़ जाती है।
यह गोचर सामान्य गोचरों की तुलना में बहुत अलग और विशिष्ट है। देवगुरु इस बार कर्क राशि में अपनी सामान्य गति से कहीं अधिक तीव्रता से चलेंगे जिसे ज्योतिष की भाषा में अतिचार अवस्था कहते हैं। गुरुदेव की यह अनोखी चाल पूरी दुनिया के राजनैतिक, सामाजिक और आर्थिक समीकरणों को बदलने वाली साबित होगी।
खगोलीय परिप्रेक्ष्य: क्या है इस गोचर का विज्ञान?
खगोल विज्ञान के दृष्टिकोण से देखें तो सौरमंडल में बृहस्पति सबसे विशाल और भारी ग्रह है। पृथ्वी के जीवन और पर्यावरण को संतुलित रखने में इस ग्रह की गुरुत्वाकर्षण शक्ति का बहुत बड़ा योगदान है।
जब हम पृथ्वी से आकाश मंडल (भचक्र) का अवलोकन करते हैं, तो पूरा आकाश 360 अंशों में बंटा हुआ दिखाई देता है, जिसे 12 बराबर भागों यानी राशियों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक राशि 30 अंश की होती है। अपनी मंद गति के कारण बृहस्पति को एक राशि को पार करने में सामान्यतः 12 से 13 महीने का समय लगता है।
किंतु इस वर्ष, अपनी धुरी पर चक्कर लगाते हुए और सूर्य की परिक्रमा के विशेष पथ के कारण, गुरु अतिचारी होकर बहुत तेजी से कर्क राशि के 30 अंशों को पार करेंगे। खगोल प्रेमियों और वेधशालाओं के लिए अंतरिक्ष में बृहस्पति की यह तीव्र गति और फिर वक्री होकर वापस लौटने की स्थिति एक अद्भुत शोध का विषय है।
ज्योतिषीय महत्व: नवग्रहों के 'मंत्रदाता' का उत्कर्ष
वैदिक ज्योतिष में बृहस्पति को आत्मा का कारक, जीव और ज्ञान का साक्षात स्वरूप माना गया है। कुंडली में गुरु यदि मजबूत स्थिति में हों, तो व्यक्ति विपरीत से विपरीत परिस्थितियों में भी सही निर्णय लेने में सक्षम होता है।
इस गोचर का ज्योतिषीय महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि कर्क राशि में आते ही गुरु केंद्र में आकर 'हंस नामक पंचमहापुरुष राजयोग' का निर्माण करेंगे। यह योग समाज में न्याय, नैतिकता, लोक-कल्याण और धार्मिकता की पुनर्स्थापना करता है। पिछले कुछ समय से वैश्विक स्तर पर जो अशांति, अविश्वास और आर्थिक मंदी का वातावरण बना हुआ था, उच्च के गुरु का यह प्रभाव उस पर मरहम का काम करेगा। यह समय समाज में वैचारिक क्रांति और नई व्यवस्थाओं के जन्म का साक्षी बनेगा।
कर्क राशि में ही गुरु उच्च के क्यों होते हैं?
यह जिज्ञासा हर पाठक और ज्योतिष अनुरागी के मन में होती है कि आखिर 12 राशियों में से कर्क राशि में ही बृहस्पति को 'सर्वोच्च' या 'उच्च' का पद क्यों प्राप्त है? इसके पीछे अत्यंत गूढ़ और वैज्ञानिक कारण छिपे हैं:
1. बृहस्पति स्वयं आकाश तत्व के स्वामी हैं, जो विस्तार और उदारता का प्रतीक है। कर्क राशि जल तत्व की राशि है। जल का स्वभाव है शीतलता देना, जीवन प्रदान करना और सबको अपने भीतर समाहित कर लेना। जब आकाश तत्व का विशाल ज्ञान जल तत्व की संवेदनशीलता से मिलता है, तो ज्ञान का प्रवाह असीमित हो जाता है। जैसे सूखी धरती पर वर्षा की बूंदें जीवन का संचार करती हैं, ठीक वैसे ही कर्क राशि का जल गुरु के ज्ञान को फलने-फूलने के लिए सबसे उपजाऊ भूमि प्रदान करता है।
2. कालपुरुष की नैसर्गिक कुंडली में कर्क राशि चौथे भाव में आती है। चौथा भाव हमारी माता, सुख, हृदय, मानसिक शांति और हमारी जड़ों (संस्कृति) का स्थान है। गुरुदेव एक शिक्षक और मार्गदर्शक हैं। एक गुरु का मूल उद्देश्य शिष्य को आत्मिक शांति और सुख प्रदान करना होता है। इसलिए, जब गुरु चतुर्थ भाव की राशि कर्क में बैठते हैं, तो वे जीव को परम संतोष और आंतरिक आनंद की अनुभूति कराते हैं।
3. कर्क राशि के स्वामी मन के कारक चंद्रमा हैं। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य और चंद्रमा को राजसी ग्रह माना गया है और देवगुरु बृहस्पति इन दोनों के परम मित्र और मार्गदर्शक हैं। चंद्रमा हमारे मन और भावनाओं का प्रतिनिधित्व करता है। जब बुद्धि और विवेक (गुरु) हमारे मन (चंद्रमा) के घर में आकर बैठते हैं, तो मन भटकना बंद कर देता है और सात्विकता की ओर अग्रसर होता है। इसी कारण कर्क राशि में गुरु को अपना पूर्ण विकास करने का अवसर मिलता है और वे कर्क राशि के पांच अंश पर जाकर अपने परम उच्च स्तर को प्राप्त करते हैं।
गुरु की 'अतिचारी' चाल का रहस्य
सामान्य तौर पर प्रत्येक 12 महीनों के बाद बृहस्पति राशि परिवर्तन करते हैं। आमतौर पर शांत और धीमी गति से चलने वाले देवगुरु बृहस्पति साल 2026 में एक अलग ही रंग में नजर आने वाले हैं। ज्योतिष के जानकारों के लिए इस गोचर का सबसे रोमांचक पहलू गुरु की 'अतिचारी गति' (तेज चाल) और उनका 'वक्री' (उल्टी) चाल से दोबारा लौटना है। आइए समझते हैं इस खगोलीय घटनाक्रम का पूरा टाइमलाइन:
1 जून 2026: गुरु अपनी उच्च राशि कर्क में प्रवेश करेंगे।
31 अक्टूबर 2026 (सिर्फ 5 महीने में): अपनी तेज गति (अतिचारी) के कारण गुरु सामान्य से बहुत पहले कर्क राशि का सफर पूरा करके सूर्य की राशि सिंह में प्रवेश कर जाएंगे।
13 दिसंबर 2026: सिंह राशि में चलते हुए गुरुदेव की गति वक्री (Retrograde) हो जाएगी।
24 जनवरी 2027: वक्री गति से उल्टे पैर चलते हुए गुरुदेव एक बार फिर से अपनी उच्च राशि कर्क में प्रवेश कर जाएंगे। जहां पर वे 12 अप्रैल 2027 तक विराजमान रहेंगे।
गुरु के 'आना-जाना और दोबारा लौटने' का दुनिया पर असर
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब कोई शुभ ग्रह उच्च का होकर अतिचारी हो जाता है और फिर वक्री होकर दोबारा उसी राशि में लौटता है, तो वह भूतकाल के अधूरे छूटे हुए कामों को पूरा करवाता है। हालांकि व्यक्तिगत तौर पर कुछ राशि के जातक जातिकाओं के लिए यह अशुभ भी हो सकता है-
फैसलों में यू-टर्न: जून से अक्टूबर 2026 के बीच देश और दुनिया में जो बड़े नीतिगत या राजनैतिक फैसले लिए जाएंगे, दिसंबर 2026 से जनवरी 2027 के बीच उन फैसलों की समीक्षा होगी या उनमें बड़े बदलाव (संशोधन) किए जाएंगे।
बाजार में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव: अक्टूबर में गुरु के सिंह में जाते ही बाजार में जो तेजी या मंदी आएगी, जनवरी 2027 में उनके दोबारा कर्क में लौटते ही बाजार फिर से करवट बदलेगा। निवेशकों के लिए यह समय बहुत संभलकर चलने का होगा।
रुके हुए कार्यों का दोबारा शुरू होना: व्यक्तिगत जीवन में भी, जो काम जून से अक्टूबर के बीच बनते-बनते रह गए थे, वे जनवरी 2027 में गुरु के दोबारा कर्क में आने पर शत-प्रतिशत पूरे होंगे। यह गोचर 'दूसरा मौका' देने वाला साबित होगा।
महागोचर 2026: 12 राशियों पर देवगुरु की चाल
देवगुरु बृहस्पति का कर्क राशि में गोचर सभी राशियों के जीवन में कोई न कोई बड़ा टर्निंग पॉइंट लेकर आने वाला है। आइए जानते हैं कि 1 जून से 31 अक्टूबर 2026 के बीच आपकी राशि पर इसका क्या गहरा असर पड़ेगा:
♈ मेष राशि: सुख, साधन और संपत्ति का विस्तार
मेष राशि के जातकों के लिए गुरु का यह गोचर चौथे (सुख और माता) भाव में होने जा रहा है।
पारिवारिक जीवन: घर में लंबे समय से चला आ रहा तनाव समाप्त होगा। माता के स्वास्थ्य में सुधार होगा और उनके साथ संबंधों में प्रगाढ़ता आएगी।
संपत्ति लाभ: यदि आप नया मकान, फ्लैट या वाहन खरीदने का मन बना रहे थे, तो इस अवधि में आपकी यह इच्छा शत-प्रतिशत पूरी होगी। भूमि में निवेश के लिए यह स्वर्णिम समय है।
करियर: कार्यस्थल पर आपकी स्थिति मजबूत होगी, हालांकि काम का बोझ बढ़ सकता है।
♉ वृषभ राशि: पराक्रम में वृद्धि और भाग्य का उदय
वृषभ राशि के लिए गुरु तीसरे (पराक्रम और संवाद) भाव में गोचर करेंगे, जहां से वे भाग्य भाव को देखेंगे।
साहस और निर्णय: आपके भीतर एक नई ऊर्जा और रिस्क लेने की क्षमता विकसित होगी। आपके द्वारा लिए गए साहसिक निर्णय भविष्य में बड़ा आर्थिक लाभ देंगे।
पारिवारिक सहयोग: छोटे भाई-बहनों के साथ यदि कोई मनमुटाव था, तो वह दूर होगा। धार्मिक और मांगलिक यात्राओं के प्रबल योग हैं।
नेटवर्किंग: मीडिया, लेखन, मार्केटिंग और कंसल्टेंसी से जुड़े लोगों के लिए यह गोचर नए और बड़े अवसर लेकर आएगा।
♊ मिथुन राशि: धन लाभ और वाणी का जादू
मिथुन राशि के जातकों के लिए गुरु दूसरे (धन, परिवार और वाणी) भाव में आ रहे हैं, जो आर्थिक रूप से बेहद शुभ है।
आर्थिक पक्ष: अटका हुआ धन वापस मिलेगा। पैतृक संपत्ति से लाभ होने के योग हैं। बैंक बैलेंस में लगातार बढ़ोतरी दर्ज होगी।
वाणी का प्रभाव: आपकी संचार शैली में एक गजब का आकर्षण और परिपक्वता आएगी। लोग आपकी सलाह को तवज्जो देंगे।
पारिवारिक मांगलिक कार्य: परिवार में किसी नए सदस्य का आगमन (विवाह या संतान के रूप में) हो सकता है।
♋ कर्क राशि: मान-सम्मान और व्यक्तित्व का 'स्वर्ण काल'
गुरु आपकी ही राशि में यानी प्रथम (लग्न) भाव में प्रवेश कर रहे हैं, जहां वे सबसे शक्तिशाली और उच्च के होते हैं।
व्यक्तित्व में निखार: आपके चेहरे पर एक नया तेज और ज्ञान झलकेगा। समाज और कार्यक्षेत्र में आपकी प्रतिष्ठा और कद बहुत ऊंचा होगा।
वैवाहिक जीवन: जो लोग सिंगल हैं, उनके विवाह के पक्के योग बनेंगे। वैवाहिक जीवन में यदि कड़वाहट थी, तो वह प्रेम और समझदारी में बदल जाएगी।
स्वास्थ्य और मानसिक शांति: मानसिक तनाव से पूरी तरह मुक्ति मिलेगी और आप खुद को बेहद सकारात्मक महसूस करेंगे।
♌ सिंह राशि: आध्यात्मिक उत्थान और विदेश से लाभ
सिंह राशि के लिए गुरु बारहवें (व्यय और मोक्ष) भाव में गोचर करेंगे, जो भौतिक से ज्यादा आध्यात्मिक लाभ देगा।
विदेशी संबंध: जो लोग विदेश जाकर पढ़ाई करना चाहते हैं या विदेशी कंपनियों से बिजनेस करते हैं, उनके लिए यह समय मील का पत्थर साबित होगा।
धार्मिक यात्राएं: अध्यात्म, योग, और ध्यान की तरफ आपका झुकाव बहुत तेजी से बढ़ेगा। किसी सिद्ध पुरुष या गुरु से दीक्षा मिल सकती है।
सतर्कता: खर्चों में थोड़ी अधिकता रहेगी, लेकिन वे खर्च शुभ कार्यों, अस्पताल के बजाय तीर्थ यात्राओं या अच्छे निवेश पर होंगे।
♍ कन्या राशि: आय के नए स्रोत और महत्त्वाकांक्षाओं की पूर्ति
कन्या राशि के जातकों के लिए गुरु ग्यारहवें (लाभ और इच्छा) भाव में आ रहे हैं, जो आपकी हर अधूरी ख्वाहिश को पूरा करने का संकेत है।
धन की बौछार: एक से अधिक माध्यमों से आय के रास्ते खुलेंगे। पुराना किया हुआ निवेश अब भारी मुनाफा देगा।
सामाजिक दायरा: समाज के संभ्रांत और प्रभावशाली लोगों से आपके संपर्क स्थापित होंगे, जो आपके करियर में मददगार साबित होंगे।
संतान सुख: संतान पक्ष की ओर से कोई बहुत बड़ी खुशखबरी मिल सकती है, जिससे परिवार में उत्सव का माहौल रहेगा।
♎ तुला राशि: करियर में बड़ी छलांग और सत्ता का सुख
तुला राशि के लिए गुरु दसवें (कर्म और पद) भाव में गोचर करेंगे, जो पेशेवर जीवन के लिए अत्यंत फलदायी है।
प्रमोशन और इंक्रीमेंट: नौकरीपेशा लोगों को मनचाहा ट्रांसफर, प्रमोशन या नई बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। उच्च अधिकारियों का वरदहस्त आप पर रहेगा।
नया बिजनेस: यदि आप नया स्टार्टअप या बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, तो यह गोचर आपको बड़ी सफलता और स्थायित्व देगा।
पिता का सहयोग: पिता और पितातुल्य व्यक्तियों से पूरा सहयोग मिलेगा, जिससे आपके सरकारी काम आसानी से बन जाएंगे।
♏ वृश्चिक राशि : भाग्य का प्रचंड साथ और उच्च शिक्षा में सफलता
बृहस्पति आपके नवम (भाग्य और धर्म) भाव में गोचर करेंगे। त्रिकोण में उच्च के गुरु का आना आपके सोए हुए भाग्य को जगाने जैसा है।
किस्मत का साथ: लंबे समय से रुके हुए या अटक रहे काम अचानक से तेजी पकड़ लेंगे। कम मेहनत में भी आपको बेहतरीन परिणाम मिलेंगे।
उच्च शिक्षा: विद्यार्थियों के लिए यह गोचर वरदान की तरह है। किसी बड़े संस्थान में दाखिला या प्रतियोगी परीक्षाओं में बड़ी सफलता मिलने के पूरे आसार हैं।
धार्मिक कार्यों में रुचि: आप किसी बड़े धार्मिक आयोजन की नींव रख सकते हैं या सामाजिक परोपकार के कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगे।
♐ धनु राशि: शोध, गूढ़ विद्या और अचानक धन लाभ
धनु राशि के स्वामियों के लिए गुरु का गोचर आठवें (आयु, रहस्य और शोध) भाव में होगा।
अचानक धन लाभ: शेयर मार्केट, लॉटरी, बीमा या वसीयत के जरिए अचानक अप्रत्याशित धन लाभ होने के योग हैं।
गूढ़ विद्याओं में रुचि: ज्योतिष, तंत्र-मंत्र, गूढ़ रहस्यों और रिसर्च से जुड़े लोगों के लिए यह समय अद्भुत रहेगा। आपकी अंतर्दृष्टि बहुत मजबूत होगी।
सावधानी: लीवर या पेट से जुड़ी पुरानी दिक्कतों को लेकर थोड़े सावधान रहें। खान-पान को सात्विक रखें।
♑ मकर राशि: साझेदारी में मुनाफा और दांपत्य का सुख
मकर राशि के लिए गुरु सातवें (विवाह और साझेदारी) भाव में उच्च के होकर गोचर करेंगे।
वैवाहिक मधुरता: जीवनसाथी के साथ यदि कोई पुराना विवाद चल रहा था, तो वह पूरी तरह सुलझ जाएगा। साथी का भाग्य आपके काम आएगा।
व्यापारिक उन्नति: पार्टनरशिप में किए जा रहे बिजनेस में अपार सफलता मिलेगी। नए बिजनेस एग्रीमेंट साइन हो सकते हैं जो लंबे समय तक लाभ देंगे।
सामाजिक छवि: आपकी सामाजिक छवि में सुधार होगा और लोग आपके साथ जुड़ना पसंद करेंगे।
♒ कुंभ राशि: शत्रुओं पर विजय और ऋण से मुक्ति
कुंभ राशि के लिए गुरु छठे (रोग, ऋण और शत्रु) भाव में गोचर करेंगे। गुरु की यह स्थिति जीवन की बाधाओं को काटने वाली होगी।
शत्रु परास्त: आपके विरोधी या गुप्त शत्रु चाहकर भी आपका कुछ नहीं बिगाड़ पाएंगे। कोर्ट-कचहरी के मामलों में फैसला आपके पक्ष में आने की प्रबल संभावना है।
कर्ज से मुक्ति: यदि आप लंबे समय से किसी लोन या कर्ज के जाल में फंसे थे, तो इस अवधि में उसे चुकाने के रास्ते खुलेंगे।
प्रतियोगिता में सफलता: बैंकिंग, कानून या सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं को कड़ी मेहनत के बाद सफलता मिलेगी।
♓ मीन राशि: बुद्धि का विकास, प्रेम और संतान का सुख
मीन राशि के स्वामियों के लिए गुरु का यह गोचर पांचवें (बुद्धि, संतान और प्रेम) भाव में होने जा रहा है।
सही निर्णय क्षमता: आपकी बुद्धि अत्यंत तार्किक और सही दिशा में काम करेगी। आपके द्वारा लिए गए फैसले सटीक बैठेंगे।
संतान और शिक्षा: जो दंपत्ति संतान सुख से वंचित थे, उन्हें गुरु की कृपा से संतान प्राप्ति का सुख मिल सकता है। छात्रों का मन पढ़ाई में एकाग्र होगा।
प्रेम संबंध: प्रेम संबंधों के लिए यह समय बेहद अनुकूल है। प्रेम संबंध विवाह के रिश्ते में तब्दील हो सकते हैं।।
देवगुरु बृहस्पति की कृपा के अचूक उपाय
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब देवगुरु बृहस्पति अपनी उच्च राशि में होते हैं, तो कुछ बहुत ही सरल और सात्विक दैनिक आदतों को अपनाकर कोई भी व्यक्ति उनकी असीम कृपा का भागी बन सकता है।
यदि आपकी कुंडली में गुरु कमजोर हैं या आप इस महागोचर का पूरा लाभ उठाना चाहते हैं, तो 1 जून से 31 अक्टूबर के बीच नीचे दिए गए सामान्य उपायों को नियमित रूप से अपने जीवन में शामिल करें:
1. बड़ों का सम्मान और आशीर्वाद (सबसे बड़ा उपाय)
सनातन परंपरा में माता-पिता, गुरु, शिक्षक और वृद्धजनों को साक्षात गुरु का रूप माना गया है। प्रतिदिन सुबह उठकर अपने माता-पिता और घर के बुजुर्गों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें। किसी भी वृद्ध या विद्वान पुरुष का अपमान भूलकर भी न करें।
2. दिव्य मंत्र का नियमित जप
बृहस्पति देव की सकारात्मक ऊर्जा को जाग्रत करने के लिए रोज सुबह स्नान के बाद शांत भाव से बैठकर इस मंत्र की एक माला (108 बार) का जप करें:
मन्त्र: ॐ बृं बृहस्पतये नमः
(यदि संभव हो तो हल्दी या तुलसी की माला का प्रयोग करें।)
3. सात्विक जीवन और माथे पर तिलक
इस पूरे गोचर काल में अपने आचार-विचार को शुद्ध रखें और झूठ बोलने से बचें। प्रतिदिन सुबह स्नान के बाद अपने माथे, कंठ और नाभि पर हल्दी या केसर का तिलक लगाएं। इससे मानसिक एकाग्रता बढ़ती है और भाग्य बलवान होता है।
4. भगवान विष्णु और केले के वृक्ष की पूजा
प्रत्येक गुरुवार को भगवान श्रीहरि विष्णु के सम्मुख शुद्ध घी का दीपक जलाएं और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। गुरुवार के दिन केले के वृक्ष की जड़ में हल्दी मिश्रित जल अर्पित करें, परंतु ध्यान रहे कि इस दिन केले का सेवन स्वयं न करें।
5. पीली वस्तुओं का सामर्थ्य अनुसार दान
गुरुवार के दिन किसी जरूरतमंद व्यक्ति या मंदिर के पुजारी को चने की दाल, बेसन के लड्डू, केले, हल्दी या पीले वस्त्रों का दान करें। गौशाला में जाकर गाय को हल्दी लगी हुई आटे की लोई या चने की भीगी हुई दाल खिलाना भी अत्यंत फलदायी माना गया है।
???? विशेष
गुरु का अर्थ है अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाला विवेक। इसलिए इन भौतिक उपायों के साथ-साथ अपने भीतर न्याय, दया और ईमानदारी की भावना बनाए रखना ही देवगुरु बृहस्पति की सबसे सच्ची और सर्वोत्तम पूजा है।
राजेश साहनी, ज्योतिष एवम वास्तु विशेषज्ञ
सम्पर्क: 98261 88606

1 जून 2026 को देवगुरु बृहस्पति कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। ज्योतिष के अनुसार यह महागोचर सुख, समृद्धि, ज्ञान और भाग्य में वृद्धि का संकेत देता है तथा सभी राशियों पर व्यापक प्रभाव डालेगा।
31 मई 2026 का अंकज्योतिष भविष्यफल। जानिए मूलांक 1 से 9 तक के जातकों के करियर, स्वास्थ्य और प्रेम जीवन के लिए आज का दिन कैसा भाग्य लेकर आया है।
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