भारत मातृत्व मृत्यु दर के लक्ष्य को पाने के बहुत करीब है, लेकिन प्रगति धीमी होने के कारण परिणाम में बहुत अंतर नहीं दिख रहा है। हालांकि, पिछले दो दशकों में एमएमआर में भारी गिरावट आई है। ताजा आंकड़ा दर्शाता है कि जो प्रगति पहले बहुत तेजी से हो रही थी, वह अब लगभग थम सी गई है।

रिपोर्ट: दो दशकों के सुधार के बाद प्रगति लगभग स्थिर
उत्तरप्रदेश में सर्वाधिक एमएमआर, झारखंड में बढ़ोतरी
नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
भारत मातृत्व मृत्यु दर के लक्ष्य को पाने के बहुत करीब है, लेकिन प्रगति धीमी होने के कारण परिणाम में बहुत अंतर नहीं दिख रहा है। हालांकि, पिछले दो दशकों में एमएमआर में भारी गिरावट आई है। ताजा आंकड़ा दर्शाता है कि जो प्रगति पहले बहुत तेजी से हो रही थी, वह अब लगभग थम सी गई है। हालांकि राज्यों के बीच अंतर बढ़ता जा रहा है। दरअसल, सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) की रिपोर्ट के अनुसार, देश का मातृत्व मृत्यु अनुपात यानी प्रति एक लाख जीवित जन्मों पर होने वाली माताओं की मृत्यु की संख्या में सिर्फ एक अंक का सुधार हुआ है। यह 2021-23 में 88 से घटकर 2022-24 में 87 हो गया है। राष्ट्रीय स्तर पर आई यह स्थिरता एक बड़े अंतर को छिपाती है, जहां कुछ राज्यों में सुधार हुआ है, वहीं दूसरों की स्थिति बिगड़ी है।
पांच राज्यों में 11 से 29 अंकों की कमी
भारत ने 2007-09 में एमएमआर को 212 से घटाकर 2020-22 में 88 कर दिया था, और ऐसा लग रहा था कि वह 2030 तक सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) के 70 के लक्ष्य को हासिल करने की राह पर है। ओडिशा, असम, छत्तीसगढ़, पंजाब और तेलंगाना सहित कई राज्यों ने एमएमआर में 11 से 29 अंकों की कमी की है।
बिहार-मप्र में काफी सुधार
यहां सबसे खास बात यह है कि बिहार और मध्य प्रदेश, जो दोनों ही उच्च जन्म दर वाले राज्य हैं, उन्होंने भी सुधार किया है। तमिलनाडु और बंगाल ने एमएमआर में 10-10 अंकों की कमी की। लेकिन कुछ उच्च प्रजनन दर या अधिक आबादी वाले राज्यों, जैसे यूपी और झारखंड में, एमएमआर की स्थिति बिगड़ गई। झारखंड में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी देखी गई, जिसके बाद यूपी-गुजरात का नंबर आता है।
यूपी के आंकड़ों ने चौंकाया
यूपी में अब भारत का सबसे ज्यादा एमएमआर 154 है, जो राष्ट्रीय औसत का लगभग दोगुना है। पड़ोसी देशों में, चीन, श्रीलंका और भूटान भारत से काफी आगे हैं। भारत, बांग्लादेश, नेपाल, पाकिस्तान और म्यांमार से बेहतर प्रदर्शन करता है, लेकिन मलेशिया, थाईलैंड और वियतनाम जैसे कई दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों से पीछे है।


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नीट पेपर लीक और अन्य परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ज्यादती के केस में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। साथ ही कोर्ट ने इस मामले से जुड़ी सभी याचिकाओं पर मंगलवार को सुनवाई करने का फैसला किया है।
देशभर में जारी नीट-यूज पेपर लीक विवाद की गूंज आज संसद के दोनों सदनों में स्पष्ट रूप से सुनाई दी। 25 जुलाई को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने वाले पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफे के बाद पहली बार संसद पहुंचे। संसद भवन परिसर में एनडीए सांसदों ने उन्हें शॉल और पारंपरिक मिथिला पाग पहनाकर सम्मानित किया और साथ लेकर सदन के अंदर गए।
स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले पंजाब को दहलाने की एक बड़ी आतंकी साजिश का पर्दाफाश हुआ है। पंजाब पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस और जालंधर देहात पुलिस ने एक संयुक्त आपरेशन में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई समर्थित बब्बर खालसा इंटरनेशनल के मॉड्यूल को तबाह कर दिया।
नीट पेपर लीक को लेकर हुए कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षामंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। उनकी जगह प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। इस बीच तीन राज्यों में अलग-अलग मामलों को लेकर शिक्षामंत्री का इस्तीफा मांगा जा रहा है।
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स्वतंत्रता दिवस के मद्देनजर दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी गई है। सीआरपीएफ और आरएएफ की 83 कंपनियां 15 अगस्त तक दिल्ली में तैनात रहेंगी, जिनमें तीन महिला कंपनियां भी शामिल हैं।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने केंद्र में जाने की अटकलों को नकारा। वहीं शिवसेना सांसद संजय राउत ने दावा किया है कि फड़नवीस देश के अगले स्थायी शिक्षा मंत्री बन सकते हैं।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद पंजाब की राजनीति में भूचाल आ गया है। विपक्षी दलों (कांग्रेस, भाजपा और शिरोमणि अकाली दल) ने इस घटनाक्रम को नैतिक आधार बनाकर पंजाब में हुए पेपर लीक मामलों पर भगवंत मान सरकार को बुरी तरह घेर लिया है।
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