मध्य प्रदेश की कोई बड़ी उपलब्धि हो या कोई हैरान करने वाली घटना या जिम्मेदार अफसरों से जुड़ा किस्सा...अक्सर इन्हें पेश करते हुए यह टैग लाइन जोड़ दी जाती है... एमपी अजब है, सबसे गजब है। दरअसल, मध्यप्रदेश के राजभवन का नाम बदलकर अब लोक भवन कर दिया गया है।

राज्यपाल ने जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारियों से शुक्रवार को लोकभवन में चर्चा की।
भोपाल। स्टार समाचार वेब
मध्य प्रदेश की कोई बड़ी उपलब्धि हो या कोई हैरान करने वाली घटना या जिम्मेदार अफसरों से जुड़ा किस्सा...अक्सर इन्हें पेश करते हुए यह टैग लाइन जोड़ दी जाती है... एमपी अजब है, सबसे गजब है। दरअसल, मध्यप्रदेश के राजभवन का नाम बदलकर अब लोक भवन कर दिया गया है। राज भवन के मुख्य द्वार पर नाम पट्टिका अब लोक भवन दर्ज हो गया है। यह बदलाव एक सप्ताह पूर्व ही किया गया है। लेकिन यहां चौंकाने वाली बात यह है कि यह नाम सिर्फ बाहर की ही पट्टिका में बदला गया है। अंदर आज भी राज भवन की दर्ज है। इससे आम जनता में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। साथ ही लोगों में यह दुविधा भी उत्पन्न हो गई है कि राज भवन माने या लोक भवन...। यह बात हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि लोक भवन से जारी तस्वीर के बाद सामने आई है। जहां बड़े-बड़े अक्षरों में राज भवन मध्यप्रदेश लिखा हुआ है। यही नहीं, नाम पट्टिका के ऊपर वाले हिस्से में दोनों तरफ दो तस्वीर भी लगी हुई हैं। एक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की है और दूसरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी है।
शुक्रवार को देर शाम राज्यपाल लोक भवन में जनजातीय प्रकोष्ठ की पीएम जनमन योजना की समीक्षा बैठक लिए। जहां जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारियों से विभिन्न मुद्दों पर गहन चर्चा कर रहे थे। इस अवसर पर जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष दीपक खांडेकर, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, प्रमुख सचिव जनजातीय कार्य विभाग गुलशन बामरा, आयुक्त एवं संचालक, जनजातीय क्षेत्रीय विकास योजना सतेंद्र सिंह, राज्यपाल के अपर सचिव उमाशंकर भार्गव सहित अन्य जिम्मेदार अधिकारी मौजूद रहे।
सिर्फ बाहर किया बदलाव
गौरतलब है कि विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान मप्र राजभवन के प्रवेश द्वार पर लगी नाम पट्टिका से राज भवन को बदलकर लोक भवन कर दिया है। यह बदलाव केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के निर्देश के बाद हुआ है। केंद्र ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से औपनिवेशिक काल के नामों को हटाने को कहा था। जिसके बाद राजभवन ने अपने लेटरहेड बदल दिए हैं और अब वह खुद को लोक भवन कह रहा है।
केंद्र सरकार की पहल
यह कदम केंद्र सरकार के उस निर्देश का पालन है जो पिछले साल हुई राज्यपालों की बैठक में लिया गया था। उस बैठक में यह सुझाव दिया गया था कि राजभवन और राज निवास जैसे नामों को बदला जाए, क्योंकि ये नाम अंग्रेजों के जमाने के हैं। इस सुझाव पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इसी सुझाव के आधार पर राज्यों को निर्देश दिया था।
नई फेहरिस्त में शामिल एमपी
केंद्र के निर्देश में कहा गया-यह अनुरोध किया जाता है कि राज्यपाल के कार्यालय और उपराज्यपाल के कार्यालय को सभी आधिकारिक उद्देश्यों के लिए क्रमश: लोक भवन और लोक निवास नाम दिया जाए। दावा किया गया कि मध्य प्रदेश अब उन दस राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शामिल हो गया है, जिन्होंने यह नया नाम अपनाया है। इससे पहले पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम, उत्तराखंड, ओडिशा, गुजरात और त्रिपुरा जैसे राज्य अपने राजभवनों का नाम बदलकर लोक भवन कर चुके हैं। वहीं, लद्दाख ने राज निवास का नाम बदलकर लोक निवास कर दिया है।


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