सीएम डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में आज शुक्रवार को भोपाल के रवीन्द्र भवन में एक भव्य प्रदेश स्तरीय अतिथि विद्वान सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन का आयोजन उच्च शिक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करने और अतिथि विद्वानों की स्थिति व उनके भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण घोषणाओं पर विचार करने के लिए किया गया।

भोपाल में राज्य स्तरीय सम्मेलन में शिक्षकों ने उठाई मांग
फिक्स सैलरी, नियमितीकरण समेत मांगों पर होगा विचार

भोपाल। स्टार समाचार वेब
सीएम डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में आज शुक्रवार को भोपाल के रवीन्द्र भवन में एक भव्य प्रदेश स्तरीय अतिथि विद्वान सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन का आयोजन उच्च शिक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करने और अतिथि विद्वानों की स्थिति व उनके भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण घोषणाओं पर विचार करने के लिए किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीप प्रज्ज्वलन कर सम्मेलन का शुभारंभ किया। उनके साथ उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार भी मौजूद रहे। अतिथि विद्वानों ने इस अवसर पर अपनी मांगों को उठाया और मुख्यमंत्री द्वारा शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने व अतिथि विद्वानों के कल्याण के लिए उठाए गए कदमों पर विस्तृत चर्चा की गई। साथ ही कई घोषणाएं की।

शिक्षकों के हित में मंत्री बनाएं समिति
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंच से ही उच्च और तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार से कहा कि आप अपने स्तर पर समिति बनाएं और कौन-कौन से राज्य का मॉडल लगाना चाहते है, जैसे आप बता रहे थे कि हरियाणा मॉडल, उसे समिति के माध्यम से लगाएं। सरकार पूरा समर्थन करेगी।
हर महीने 57700 वेतन का प्रवधान
दरअसल, लंबे समय से प्रदेश के अतिथि विद्वान हरियाणा की तर्ज पर नौकरी की स्थायी सुरक्षा और समान वेतन की मांग कर रहे हैं। इस मॉडल में 5 साल का अनुभव रखने वाले योग्य शिक्षकों को 62 से 65 वर्ष रिटायरमेंट तक सेवा से न हटाने और यूजीसी नियमों के अनुसार हर महीने लगभग 57700 का न्यूनतम वेतन देने का प्रवधान है।
नियमितीकरण पर होगा मंथन
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार पहले भी अतिथि विद्वानों के लिए कई फैसले ले चुकी है। अब उनकी बाकी समस्याओं के समाधान की दिशा में भी काम होगा। उन्होंने कहा कि हरियाणा समेत जिस राज्य में बेहतर व्यवस्था है, उसका अध्ययन कर मध्यप्रदेश में लागू करने पर विचार किया जाएगा।
11 नहीं, 12 महीने मिलेगा वेतन
उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि सरकार ने अतिथि विद्वानों को 13 आकस्मिक अवकाश, तीन ऐच्छिक अवकाश, महिला अतिथि विद्वानों को प्रसूति अवकाश, असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में 25 प्रतिशत आरक्षण और साल में एक बार स्थानांतरण की सुविधा दी है। वेतन 12 महीने के बजाय 11 महीने मिलने की समस्या को भी दूर किया जाएगा, ताकि दोनों विभागों के अतिथि विद्वानों के लिए एक जैसी व्यवस्था लागू हो सके।


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