मध्यप्रदेश के धार जिले में स्थिति मां वाग्देवी मंदिर भोजशाला परिसर आज आस्था, उत्साह और सनातन चेतना के विराट संगम का साक्षी बना। पूरा परिसर जय मां वाग्देवी... जय श्रीराम... और वैदिक मंत्रोच्चार से गुंजायमान रहा।

भोजशाला में महासत्याग्रह के बाद की गई आतिशबाजी
ऐतिहासिक भोजशाला में सत्याग्रह पर बैठीं मातृशक्ति
जय मां वाग्देवी, जय श्रीराम और मंत्रोच्चार की गुंज
युवा, संत और हिन्दू संगठन भगवा ध्वज लेकर पहुंचे
मंदिर परिसर में भक्ति का अद्भुत वातावरण देख रहा

धार। स्टार समाचार वेब
मध्यप्रदेश के धार जिले में स्थिति मां वाग्देवी मंदिर भोजशाला परिसर आज आस्था, उत्साह और सनातन चेतना के विराट संगम का साक्षी बना। पूरा परिसर जय मां वाग्देवी... जय श्रीराम... और वैदिक मंत्रोच्चार से गुंजायमान रहा। दरअसल, इंदौर हाईकोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के आदेश के बाद पहली बार आयोजित महासत्याग्रह और महाविजय महोत्सव में हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने भोजशाला आंदोलन के वर्षों पुराने संघर्ष को गौरव प्रदान किया। मंगलवार को सुबह तय समय पर परंपरानुसार सत्याग्रह प्रारंभ हुआ, लेकिन इस बार उसका स्वरूप महासत्याग्रह के रूप में दिखाई दिया। बड़ी संख्या में मातृशक्ति, युवा, संत समाज और हिन्दू संगठनों के कार्यकर्ता हाथों में भगवा ध्वज लेकर भोजशाला पहुंचे। मंदिर परिसर में भक्ति, उत्साह और विजय का अद्भुत वातावरण देखने को मिला।
धर्म और आस्था की ऐतिहासिक विजय
महासत्याग्रह के बाद मां वाग्देवी की आराधना, पूजन-अर्चन और हवन संपन्न हुआ। श्रद्धालुओं ने अखंड ज्योति के दर्शन कर इसे सनातन अस्मिता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बताया। आयोजन के दौरान कई श्रद्धालुओं की आंखें भावुक हो उठीं। वर्षों के संघर्ष के बाद मिले इस अवसर को लोगों ने धर्म और आस्था की ऐतिहासिक विजय बताया।
आतिशबाजी से गूंज उठी भोजशाला
सत्याग्रह के बाद शुरू हुआ महाविजय महोत्सव अपने आप में ऐतिहासिक बन गया। श्रद्धालु अपने साथ आतिशबाजी सामग्री लेकर पहुंचे थे और शाम तक भोजशाला परिसर दीपों, जयघोषों और रंग-बिरंगी आतिशबाजी से जगमगा उठा। आयोजन में अपेक्षा से कहीं अधिक भीड़ उमड़ी, जिससे पूरा क्षेत्र उत्सव स्थल में बदल गया। युवाओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया और मातृशक्ति की बड़ी भागीदारी ने आयोजन को और भव्य बना दिया।
सनातन चेतना का बना केंद्र
महाराजा भोज स्मृति वसंतोत्सव समिति और सकल हिंदू समाज के नेतृत्व में हुए इस आयोजन को हिंदू समाज की एकता और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक माना जा रहा है। श्रद्धालुओं ने कहा कि भोजशाला केवल एक स्थल नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, ज्ञान और सनातन परंपरा की पहचान है। दिनभर चले इस आयोजन ने स्पष्ट संदेश दिया कि धर्म, संस्कृति और आस्था के संरक्षण के लिए समाज अब पहले से अधिक जागृत और संगठित है।
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