भारतीय रिजर्व बैंक ने आज देश की मौद्रिक नीतियों से जुड़े बड़े एलान किए। मौद्रिक नीति समिति की तीन दिनों की बैठक के बाद आज आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने ब्याज दरों पर भी अहम जानकारी दी। उन्होंने एमपीसी के फैसलों को देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति और भावी रणनीतियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण करार दिया।

आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा।
भारतीय भारतीय रिजर्व बैंक ने आज देश की मौद्रिक नीतियों से जुड़े बड़े एलान किए। मौद्रिक नीति समिति की तीन दिनों की बैठक के बाद आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने ब्याज दरों पर भी अहम जानकारी दी। उन्होंने एमपीसी के फैसलों को देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति और भावी रणनीतियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण करार दिया।
आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मुंबई में आज प्रमुख नीतिगत दरों की घोषणा की। आरबीआई गवर्नर ने बताया कि मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने तटस्थ रुख जारी रखने का फैसला किया है। उन्होंने बताया कि ब्याज दरों को भारतीय अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति और देश में मौजूद क्षमता को देखते हुए तय किया गया है।
संजय मल्होत्रा ने रेपो रेट में कमी का एलान नहीं किया। इससे पहले उन्होंने जून की मॉनेटरी पॉलिसी में रेपो रेट में 50 बेसिस प्वाइंट्स का एलान किया था। अप्रैल की पॉलिसी में भी केंद्रीय बैंक ने 25 बेसिस प्वाइंट्स की कमी की थी। फिलहाल यह 5.50 फीसदी पर बरकरार है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा-मध्यम अवधि में, बदलती विश्व व्यवस्था में भारतीय अर्थव्यवस्था की संभावनाएं उज्ज्वल हैं, जो अपनी अंतर्निहित शक्तियों का लाभ उठा रही है।
आरबीआई गवर्नर ने सबसे पहले कहा कि मानसून सीजन अच्छा रहा है। आगामी त्योहारी सीजन का जिक्र करते हुए गवर्नर ने कहा कि इससे आर्थिक मार्चे पर उत्साहजनक नतीजे मिलने की आशा है। उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार चुनौतियों के बीच सरकार और आरबीआई की सकारात्मक और सहारा देने वाली नीतियां अर्थव्यस्था के लिए बेहतर साबित होंगी। आरबीआई गवर्नर ने भूराजनीतिक अनिश्चितता को भी रेखांकित किया। बदलते वैश्विक समीकरण के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था शानदार अवसरों और ठोस बुनियाद के साथ मजबूती से आगे बढ़ रही है।
बीती लगातार तीन बैठकों में केंद्रीय बैंक ने रेपोट रेट घटाने का ऐलान किया था और फिलहाल ये 5.50 प्रतिशत पर आ चुका है। इससे साफ है कि आपके लोन की ईएमआई पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा और ये न तो कम होगी और न ही आपका बोझ बढ़ेगा। यहां ये जान लेना जरूरी है कि आखिर ये रेपो रेट होता क्या है और कैसे ये सीधे आपके लोन की ईएमआई को प्रभावित करता है, तो बता दें कि रेपो रेट वह ब्याज दर है, जिस पर आरबीआई देश के तमाम बैंकों को कर्ज देता है।
इसमें उतार-चढ़ाव सीधे लोन लेने वाले ग्राहकों पर असर डालता है, क्योंकि जब रिजर्व बैंक इस रेपो रेट को घटाने का फैसला करता है यानी रेपो रेट कट करता है, तो बैंकों को सस्ता लोन मिलता है और वे होम लोन, आटो लोन और पर्सनल लोन लेने वाले ग्राहकों को भी ब्याज दरें कम करते हुए तोहफा देते हैं।
चार अगस्त को शुरू हुई इस बैठक का मकसद रेपो दरों की समीक्षा करने के साथ-साथ आगामी महीनों में रिजर्व बैंक के नीतिगत रुख को निर्धारित करना था। गौरतलब है कि छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति का नेतृत्व आरबीआई गवर्नर करते हैं। इसमें केंद्रीय बैंक के तीन अधिकारी और भारत सरकार द्वारा नामित तीन बाहरी सदस्य शामिल होते हैं। एमपीसी प्रत्येक दो माह में बैठक कर प्रमुख ब्याज दरों पर निर्णय लेती है तथा देश की मौद्रिक नीति की दिशा निर्धारित करती है।


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