भारत को पहला शूटिंग स्वर्ण पदक दिलाने वाले रणधीर सिंह का निधन हो गया है। 79 साल की उम्र में रणधीर सिंह ने अपने आवास पर आखिरी सांस ली। वह पिछले कुछ दिनों से अस्पताल में भर्ती थे और उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे। उनके निधन की खबर से भारतीय खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

राजा को खानदान से मिली थी खेलों की विरासत
खेलों के विकास में भी उनका अहम योगदान रहा
नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
एशियाई खेलों में भारत को पहला शूटिंग स्वर्ण पदक दिलाने वाले रणधीर सिंह का निधन हो गया है। 79 साल की उम्र में रणधीर सिंह ने अपने आवास पर आखिरी सांस ली। वह पिछले कुछ दिनों से अस्पताल में भर्ती थे और उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे। उनके निधन की खबर से भारतीय खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। दरअसल, 26 जनवरी 2026 को ओलंपिक काउंसिल आॅफ एशिया के अध्यक्ष पद से रणधीर सिंह ने इस्तीफा दे दिया था। उन्हें 2024 में 4 साल के कार्यकाल के लिए ओसीए का अध्यक्ष के रूप में चुना गया था। वह लंबे समय तक एशियाई और भारतीय खेल प्रशासन से जुड़े रहे और खेलों के विकास में उनका अहम योगदान रहा। रणधीर सिंह का खेलों से नाता विरासत में मिला था। उनके पिता राजा भलिंद्र सिंह 1947 से 1992 तक आईओसी के सदस्य रहे। उनके चाचा महाराजा यादवेंद्र सिंह ने 1951 में दिल्ली में आयोजित पहले एशियाई खेलों के आयोजन में अहम भूमिका निभाई थी।
1978 में रचा था इतिहास
राजा रणधीर सिंह का जन्म 18 अक्टूबर 1946 को पटियाला, पंजाब के एक राजघराने परिवार में हुआ था। साल 1978 में बैंकॉक में आयोजित एशियाई खेलों में उन्होंने ट्रैप शूटिंग में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा था। वे एशियाई खेलों में यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले भारतीय निशानेबाज बने थे।
सबसे प्रभावशाली खेल अधिकारी
राजा रणधीर सिंह ने 1968 से 1984 तक लगातार पांच ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया और उन्हें अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित भी किया गया। शूटिंग से संन्यास के बाद उन्होंने एक सफल प्रशासनिक करियर बनाया और भारत के सबसे प्रभावशाली खेल अधिकारियों में से एक बन गए।
निर्विरोध चुने गए थे ओसीए के अध्यक्ष
1987 से 2014 तक राजा रणधीर सिंह भारतीय ओलंपिक संघ के मानद सचिव-जनरल रहे। 1991 से 2015 तक ओलंपिक काउंसिल आॅफ एशिया के सचिव-जनरल के रूप में उन्होंने एशियाई खेलों को नई ऊंचाइयां दीं। 2001 से 2014 तक वे अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के सदस्य भी रहे। वहीं, सितंबर 2024 में उन्होंने एक और इतिहास रचा जब वे ओसीए के अध्यक्ष पद पर निर्विरोध चुने गए। ऐसा करने वाले वे पहले भारतीय बने।
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