मई और जून के मौसम में उलटफेर से इस साल मानसून का गणित उलझ गया है। सवाल यह है कि क्या मानसून अपने सामान्य समय पर दस्तक देगा या फिर देरी से आयेगा। मई में आमतौर पर भीषण गर्मी और नौतपा रहता है, वहीं जून में शुरुआती दिनों में आंधी और बारिश की स्थिति बनती है।

जल्दी आते-आते रुका मानसून, समय पर पहुंचने की आहट
भ्मेपाल. स्टार समाचार वेब
मई और जून के मौसम में उलटफेर से इस साल मानसून का गणित उलझ गया है। सवाल यह है कि क्या मानसून अपने सामान्य समय पर दस्तक देगा या फिर देरी से आयेगा। मई में आमतौर पर भीषण गर्मी और नौतपा रहता है, वहीं जून में शुरुआती दिनों में आंधी और बारिश की स्थिति बनती है। सामान्यत: इन स्थितियों में प्री-मानसून की हलचल और फिर मानसून का प्रवेश होता है। लेकिन इस साल मई और जून में मौसम का समीकरण बदला हुआ नजर आया। मई जहां आंधी, बारिश और ओले वाला मौसम रहा, वहीं जून में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में भीषण गर्मी और लू जैसे हालात बने। हालांकि 11 जून को मानसून की हलचलों में तेजी देखी जा रही है, जिसके आगे बढ़ने की संभावना है।
मौसम विभाग के अनुसार मानसून की हलचलें तेज हुईं है। मौसम विभाग ने 14-15 जून को मध्य और पूर्वी भारत के हिस्सों में दक्षिण-पश्चिम मानसून के प्रवेश करने की संभावना जताई है। मानसून की उत्तरी सीमा वर्तमान में मुंबई, अहिल्यानगर, आदिलाबाद, भवानीपटना, पुरी और बालुरघाट से होकर गुजर रही है। उत्तर-पूर्व राजस्थान और पूर्वी यूपी में हवा के ऊपरी भाग में चक्रवात भी बने हुए हैं। वहीं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ से होते हुए बंगाल की खाड़ी तक एक ट्रफ लाइन सक्रिय है। बंगाल की खाड़ी में उत्तरी ओडिशा के ऊपर बने चक्रवात के कम दबाव क्षेत्र में परिवर्तित होकर पश्चिम की ओर बढ़ने की संभावना है। तमिलनाडु पर शियर जोन भी बना हुआ है। इन सभी परिस्थितियों के चलते प्रदेश में बादल और बारिश की स्थिति बन रही है। 15 जून को मानसून के मंडला व बालाघाट के रास्ते प्रदेश में प्रवेश करने का अनुमान है।
मौसम विभाग के अनुसार मई में पूरे माह साइक्लोनिक सकुर्लेशन, वेस्टर्न डिस्टरबेंस और ट्रफ की एक्टिविटी देखने को मिली। लगातार सिस्टम एक्टिव होते रहने के कारण आंधी-बारिश और ओले का दौर भी चलता रहा। पूरे माह प्रदेश के किसी न किसी जिले में आंधी और बारिश देखी गई। इधर जून शुरु होते ही मौसम ने फिर चौका दिया। सूरज के तीखे तेवरों ने मई जैसी भीषण गर्मी और लू के हालात बना दिये। प्रदेश के कई जिलों में पारा 45 से 46 डिग्री तक दर्ज किया गया।
मई के अंत में सिस्टम एक्टिव होते रहने के कारण आंधी-बारिश की स्थिति से यह अनुमान था कि इस साल मानसून जल्दी आ जायेगा। देश में एंटर होने के बाद मानसून महाराष्टÑ और छत्तीसगढ़ में एक ही जगह पर ठह गया और आगे नहीं बढ़ा। जून में लू की घूसपैठ ने प्रदेश में मानसून की एंट्री को रोक दिया और जल्दी मानसून से राहत की उम्मीद पर पानी फेर दिया।
प्रदेश में सामान्यत: 15 जून तक मानसून दस्तक दे देता है। पिछले 10 सालों में चार बार ही, वर्ष 2015और 2020(14 जून), 2021 (09 जून) और 2022 (16 जून), मानसून ने अपने सामान्य अवधि में प्रदेश में प्रवेश किया है। पिछले दो सालों से मानसून 20 जून के बाद ही आया है। मौसम विभाग का अनुमान के मुताबिक मानूसन आया, तो पिछले साल की तुलना में जल्दी आ जायेगा।
पिछले साल की तरह इस साल भी प्रदेश में अच्छी बारिश होगी। मौसम विभाग के अनुसार इस साल मानसून सामान्य से बेहतर रहने की उम्मीद है। प्रदेश में बारिश का सामान्य औसत 38-39 इंच है। पिछले दस सालों में तीन बार 2015 (32.4 इंच), 2017 (29.9 इंच), 2018 (34.3 इंच), सामान्य औसत से कम बारिश हुई है। वर्ष 2019 में प्रदेश में भारी बारिश (53.0 इंच) दर्ज की गई।


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