आज 1 जून 2025 को वैश्विक अभिभावक दिवस मनाया जा रहा है। जानें कैसे माता-पिता अपने प्रेम, त्याग और अटूट समर्थन से हमारे जीवन की नींव रखते हैं, और कैसे हम उनके संघर्षों को समझकर उन्हें धन्यवाद दे सकते हैं।

एक जून एक ऐसे रिश्ते के उत्सव का दिन है, जो हर बंधन से ऊपर है–माता-पिता का रिश्ता। 'विश्व अभिभावक दिवस' सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि उस निस्वार्थ रिश्ते के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने और नमन करने का अवसर है, जिन्होंने बिना किसी शर्त के हमें अपना सब कुछ दे दिया। यह उनके उस अटूट प्रेम, अथाह त्याग और आजीवन समर्थन का उत्सव है, जो हमारे जीवन की सबसे मजबूत और सबसे खूबसूरत नींव रखता है।
पहली सांस से साथ है यह रिश्ता
सोचिए, जब हमने पहली सांस ली थी, तब से लेकर आज तक, कौन है जो हमारी हर छोटी-बड़ी खुशी में मुस्कुराया और हर दु:ख में हमारे साथ खड़ा रहा? वो हमारे माता-पिता ही हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2012 में इस दिन को घोषित कर, शायद सिर्फ एक औपचारिकता पूरी नहीं की, बल्कि हमें याद दिलाया कि इस भागदौड़ भरी दुनिया में भी कुछ रिश्ते ऐसे हैं जिनकी अहमियत कभी कम नहीं होती। वे हर जाति, धर्म, संस्कृति और आर्थिक पृष्ठभूमि से आते हैं, पर उनका प्रेम एक ही भाषा बोलता है – निःस्वार्थ समर्पण की भाषा।
जीवन के वो शिल्पी, जिनके हाथों ने हमें गढ़ा
एक बच्चे के जन्म से लेकर उसके पैरों पर खड़े होने तक, और उसके बाद भी, माता-पिता की भूमिका सिर्फ शारीरिक जरूरतों को पूरा करना नहीं होती। वे इससे कहीं बढ़कर होते हैं
पहले शिक्षक: वे हमारे नन्हें कदमों को चलना सिखाते हैं, तुतलाती जुबान को शब्द देते हैं, और मासूम सोच को दुनिया को समझने का सलीका देते हैं। वे हमारी पहली पाठशाला होते हैं।
सुरक्षा का आंचल: जब दुनिया मुश्किल लगती है, तो उनका आंचल ही सबसे सुरक्षित पनाहगाह होता है। उनका प्यार, उनकी मौजूदगी हमें हर डर से लड़ने की हिम्मत देती है।
नैतिकता के मार्गदर्शक: वे हमें सिखाते हैं ईमानदारी का पाठ, दया का महत्व, सम्मान की गरिमा और मेहनत का फल। उनके संस्कार ही हमारे भीतर एक बेहतर इंसान को गढ़ते हैं।
सपनों के सारथी: वे हमारे सपनों को अपना मानते हैं, उन्हें पंख देते हैं। उनकी दृढ़ता और त्याग हमें अपने लक्ष्यों की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।
अटूट सहारा: चाहे हम कितनी भी ऊंचाई पर हों या कितनी भी गहरी खाई में गिरें, उनके हाथ हमेशा हमें थामने के लिए तैयार रहते हैं। हमारी सफलताएं उनकी मुस्कान बन जाती हैं और हमारी असफलताएं उनके आँसुओं में घुल जाती हैं।
बदलते वक्त में, उनके संघर्षों को भी समझें
आज का दौर बदल गया है। डिजिटल युग की चकाचौंध में बच्चों को सही रास्ता दिखाना, उन्हें बाहरी दबावों से बचाना, और उन्हें एक संतुलित जीवन जीना सिखाना, अभिभावकों के लिए एक बड़ी चुनौती है। जब माता और पिता दोनों ही काम करते हैं, तो अक्सर वे अपने पेशेवर जीवन और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच एक नाजुक संतुलन बनाने के लिए जूझते हैं। यह दिन हमें सिर्फ उनके त्याग की प्रशंसा करने के लिए नहीं है, बल्कि उनकी इन चुनौतियों को समझने और एक समाज के तौर पर उन्हें समर्थन देने के लिए भी है।
कृतज्ञता व्यक्त करें, प्रेम को महसूस करें
वैश्विक अभिभावक दिवस सिर्फ सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डालने का दिन नहीं है। यह अपने भीतर झांकने का भी अवसर है यह सोचने का दिन है... क्या हमने उन्हें धन्यवाद दिया है? कभी एक छोटे से शब्द में, तो कभी एक गर्मजोशी से गले लगाकर, अपनी कृतज्ञता व्यक्त करें।
क्या हमने उनके साथ समय बिताया है? उनकी बातें सुनें, उनके अनुभवों को जानें। उनके साथ बिताया एक पल, किसी भी भौतिक उपहार से कहीं ज्यादा अनमोल होता है।
क्या हम उनकी मुश्किलों को समझते हैं? यदि आप स्वयं माता-पिता हैं, तो अपनी और दूसरों की चुनौतियों को महसूस करें।
आज, इस विशेष दिन पर, आइए हम सब मिलकर उन सभी माताओं और पिताओं को सैल्यूट करें, जिनके अथक परिश्रम, अनमोल प्रेम और अनगिनत बलिदानों ने इस दुनिया को हमारे लिए एक बेहतर जगह बनाया है। वे ही हैं जो निःस्वार्थ भाव से अपनी संतानों के लिए जीते हैं, और यही कारण है कि वे सच्चे मायनों में 'जीवन के शिल्पी' हैं। उनके बिना हम कुछ नहीं, उनके आशीर्वाद से हम सब कुछ हैं।

जबलपुर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा 100% वेतन और एरियर्स

जैतवारा से लेकर बारामाफी तक आक्रोश

खरमास 2025-2026: कब से कब तक रहेगा, जानें शुभ कार्यों की मनाही का कारण

ऑपरेशन सिंदूर...मुझे एक तस्वीर दिखा दो...जिसमें भारत का एक गिलास भी नहीं टूटा हो

लागू होंगे नए अवकाश नियम: CCL में वेतन कटौती, EL को 'अधिकार' नहीं मानेगा MP वित्त विभाग

MP College Admission 2026: ई-प्रवेश दूसरे चरण की अलॉटमेंट लिस्ट जारी, 13 जून तक जमा करें फीस

सुरक्षित और नेचुरल तरीके से बाल करना है काले तो अपनाएं ये उपाय

बची हुई चाय को दोबारा गर्म करके पीने क्या होगा, जानें इसके बारे में?

अगर 40 की उम्र कर ली है पार और रहना चाहते हैं तंदरुस्त तो अपनाएं ये आदतें

ठंडा पानी पीने और मीठा खाने पर दांतों में होती है झनझनाहट तो हो जाएं सावधान, नहीं तो हो सकती है बड़ी समस्या

ठंड में बढ़ जाती है डिहाइड्रेशन की समस्या, जानें क्या है कारण ?

तनाव से चाहिए है छुटकारा तो इन चीजों से करें तौबा, अपनाएं ये सलाह
भारत एक धर्म प्रधान देश हैं। यहां साल के सभी दिनो का महत्व होता है तथा साल का हर दिन पवित्र माना जाता है। भारत में करवा चौथ हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। यह भारत के राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और पंजाब का पर्व है। यह कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है।
विजयादशमी का पर्व हमें सिखाता है कि सत्य के प्रति आस्था के साथ उसकी रक्षा का साहस भी आवश्यक है। न्याय की कामना तभी फलित होती है, जब समाज उसके लिए खड़ा होने का संकल्प लेता है।
हर साल 17 अक्टूबर को "अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस" गरीबी मिटाने के लिए जनजागृति हेतु पुरे विश्व में मनाया जाता हैं। संयुक्त राष्ट्र द्वारा इस साल 2026 को “सभी के लिए सुरक्षित घर” यह थीम हैं।
एशियन गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश को 85 पदक दिलाए और पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया। भारत के खाते में 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य पदक आए। इस उपलब्धि की सबसे गौरवपूर्ण तस्वीर यह है कि महिला खिलाड़ियों ने 38 पदक अपने नाम किए, जो पुरुष खिलाड़ियों के बराबर हैं।
लाल बहादुर शास्त्री के जीवन, स्वतंत्रता आंदोलन, राजनीतिक सफर, प्रधानमंत्री कार्यकाल, ‘जय जवान जय किसान’ नारे और उनकी सादगी व राष्ट्रसेवा से जुड़ी प्रेरक कहानी पढ़ें।
महात्मा गांधी के जीवन और विचारों से जुड़ी 10 ऐसी सीख, जो आज की तेज रफ्तार जिंदगी में सादगी, अनुशासन, सत्य, समय प्रबंधन, संयम और आत्मविकास का मार्ग दिखा सकती हैं।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का सार्वजनिक जीवन ऐसी ही असाधारण यात्रा का उदाहरण है। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में लगभग 13 वर्षों तक उन्होंने शासन की एक ऐसी शैली विकसित की, जिसमें विकास, सुशासन और जनभागीदारी को केंद्र में रखा गया।
मोदी जी की कूटनीतिक परिपक्वता का प्रमाण है, जिसने पूर्व में जी-20 के मंच पर भी विश्व को चकित किया था। लगभग सात वर्ष बाद चीनी और रूस जैसे देशों को एक साथ एक मंच पर लाना निःसंदेह उनकी उसी भगीरथ भूमिका की पुष्टि करता है, जिसके बल पर वे उभरती बहुध्रुवीय विश्व-व्यवस्था में भारत को केंद्रीय स्थान दिला चुके हैं।
विश्व रोगी सुरक्षा दिवस 17 सितंबर 2026 विशेष। जानिए भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की असलियत, ग्रामीण इलाकों की चुनौतियां, नकली दवाओं का साम्राज्य और मरीज सुरक्षा से जुड़े कड़े सवाल।
1947 में 34 करोड़ से बढ़कर 2026 में 147 करोड़ पहुंची भारत की आबादी।