ब्रिटिश एयरवेज की फ्लाइट में एक महिला की मौत के बाद 13 घंटे तक शव को विमान में ही रखा गया। जानें उड़ान के दौरान मौत होने पर एयरलाइंस किन अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करती हैं।
By: Ajay Tiwari
Mar 22, 20266:06 PM
नई दिल्ली. स्टार समाचार वेब
विमानन नियमों के अनुसार, उड़ान के दौरान किसी यात्री की मृत्यु को हमेशा 'इमरजेंसी' नहीं माना जाता है। इसी आधार पर पायलट ने विमान को बीच में लैंड कराने या वापस लौटने के बजाय अपनी मंजिल (लंदन) तक यात्रा जारी रखने का फैसला किया। महिला के शव को कंबल में लपेटकर विमान के गैली (Galley) वाले हिस्से में रखा गया था।
शव को विमान के पिछले हिस्से में रखा गया था, जहाँ फर्श गर्म होने के कारण कुछ घंटों बाद दुर्गंध फैलने लगी। चूंकि गैली वही स्थान है जहाँ यात्रियों के लिए भोजन और पेय पदार्थ तैयार किए जाते हैं, इसलिए वहां शव रखे होने से यात्रियों को काफी असुविधा का सामना करना पड़ा। लंदन पहुँचने पर पुलिस ने विमान की जांच की और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक यात्रियों को लगभग 45 मिनट तक सीटों पर ही बैठाए रखा गया।
इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) की गाइडलाइन्स के मुताबिक, उड़ान के दौरान मौत होने पर क्रू निम्नलिखित प्रक्रिया अपनाता है। सबसे पहले यात्री को CPR दिया जाता है और विमान में मौजूद किसी डॉक्टर की मदद ली जाती है। मौत की पुष्टि के बाद पायलट तय करता है कि फ्लाइट को डायवर्ट करना है या गंतव्य तक ले जाना है। अक्सर फ्लाइट जारी रखी जाती है। शव को खाली सीट, बॉडी बैग या गैली में रखा जाता है। यदि सीट खाली न हो, तो उसे उसी सीट पर बेल्ट बांधकर ढंक दिया जाता है। यदि मौत प्राकृतिक कारणों (जैसे हार्ट अटैक) से हुई है और एयरलाइन ने समय पर मदद दी है, तो मुआवजा देना अनिवार्य नहीं होता।
विमानन नियमों (जैसे FAA) के अनुसार, केवल उन्हीं स्थितियों को इमरजेंसी माना जाता है जहाँ विमान, क्रू या अन्य यात्रियों की जान को तत्काल खतरा हो। इसमें इंजन फेल होना, केबिन प्रेशर कम होना, आग लगना या बम की धमकी शामिल है। गंभीर मेडिकल इमरजेंसी में फ्लाइट डायवर्ट की जा सकती है, लेकिन यात्री की मृत्यु के बाद अक्सर उसे गंतव्य तक ही ले जाया जाता है।