CACP ने चीनी मिलों को संकट से उबारने के लिए इथेनॉल की कीमतें बढ़ाने और औद्योगिक उपयोग के लिए चीनी के अलग दाम तय करने की सिफारिश की है।

बिजनेस डेस्क। स्टार समाचार
केंद्र सरकार द्वारा गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) में हालिया बढ़ोतरी के बाद, अब चीनी उद्योग की वित्तीय सेहत सुधारने के लिए बड़े बदलावों की तैयारी चल रही है। कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) ने केंद्र सरकार को गन्ने से बनने वाले इथेनॉल की कीमतों में संशोधन करने और देश में चीनी के लिए 'डुअल प्राइसिंग सिस्टम' (दोहरी मूल्य प्रणाली) लागू करने का सुझाव दिया है।
CACP की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में जहाँ अनाज आधारित इथेनॉल और गन्ने के FRP में वृद्धि देखी गई है, वहीं गन्ने के रस, चीनी की चाशनी और बी-हैवी शीरे (B-heavy molasses) से बनने वाले इथेनॉल की कीमतें लगभग स्थिर बनी हुई हैं। इस असंतुलन के कारण चीनी मिलों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। आयोग का तर्क है कि मिलों की परिचालन लागत निकालने के लिए इथेनॉल की दरों में इजाफा करना अनिवार्य हो गया है।
आयोग ने एक महत्वपूर्ण सिफारिश करते हुए चीनी के लिए अलग-अलग दामों की वकालत की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में उत्पादित कुल चीनी का लगभग 60-65% हिस्सा औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्रों (जैसे कोल्ड ड्रिंक्स, मिठाई कंपनियां) में इस्तेमाल होता है। CACP का सुझाव है कि घरेलू उपभोक्ताओं और औद्योगिक खरीदारों के लिए अलग-अलग मूल्य निर्धारित करने की संभावना पर विचार किया जाना चाहिए। कई राज्यों और उद्योग संगठनों ने भी इस 'डुअल प्राइसिंग' का समर्थन किया है।
आयोग ने चेतावनी दी है कि पिछले दशक में इथेनॉल उत्पादन क्षमता तो बढ़ी है, लेकिन गन्ने की उपलब्धता और बाजार की मांग उस अनुपात में नहीं बढ़ी। इसका परिणाम यह हुआ कि सीजन 2024-25 के दौरान 30% से अधिक चीनी मिलें बंद हो गईं, क्योंकि वे अपनी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं कर पा रही थीं।
चीनी उद्योग की जटिल समस्याओं को सुलझाने के लिए CACP ने एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति बनाने की सिफारिश की है। इस समिति में केंद्र, राज्यों, उद्योग जगत, शिक्षाविदों और किसानों के प्रतिनिधियों को शामिल करने का सुझाव दिया गया है। यह समिति गन्ने के क्षेत्र निर्धारण, मिलों के बीच की दूरी, राजस्व साझा करने के फार्मूले और दोहरी कीमत व्यवस्था जैसे तकनीकी मुद्दों की गहन समीक्षा करेगी।
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