वैश्विक बाजार में तांबा, एल्युमीनियम जैसी औद्योगिक धातुओं की कीमतें बढ़ने से आगामी त्योहारी सीजन में घरेलू उपकरण और गाड़ियां 8% तक महंगी हो सकती हैं।

महंगाई का लगेगा तड़का
बाजार पर पड़ रहा असर दुनिया की उछल-पुथल का
बिजनेस डेस्क। स्टार समाचार वेब
यदि आप नया टेलीविजन, फ्रिज, एसी, वाशिंग मशीन या फिर कोई नई गाड़ी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आने वाले समय में आठ फीसदी ज्यादा कीमत चुकानी होगी। वजह, वैश्विक बाजारों में मची भारी उथल-पुथल और सप्लाई क्राइसिस हे, जिसके कारण तांबा, एल्युमीनियम, जिंक और निकल जैसी प्रमुख औद्योगिक धातुओं की कीमतों में तेज रफ्तार से उछाल आया है। कच्चे माल के महंगे होने का सीधा असर घरेलू उपकरणों और ऑटोमोबाइल सेक्टर पर पड़ना तय माना जा रहा है।
वैश्विक स्तर पर लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) पर तांबे का तीन महीने का औसत भाव 1.8 फीसदी तक की तेजी के साथ 14,369.50 डॉलर प्रति टन के स्तर पर पहुंच गया है, जो गत 29 जनवरी के बाद से इसका सबसे उच्चतम स्तर है। इस अंतरराष्ट्रीय तेजी का असर भारतीय बाजारों पर भी साफ देखने को मिला है, जहां तांबे के भाव 2.56 फीसदी उछलकर 1304.90 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गए हैं। खास बात यह है कि महज एक महीने पहले यही तांबा 1187.85 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर बिक रहा था। इसके अलावा, एल्युमीनियम की कीमतों में भी पांच फीसदी तक की जोरदार तेजी दर्ज की गई है।
धातुओं की कीमतों में इस बेकाबू तेजी के पीछे कई बड़े भू-राजनीतिक और आर्थिक कारण जिम्मेदार हैं। अफ्रीकी देश कांगो ने कॉपर और कोबाल्ट कंसंट्रेट के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह सख्त कदम देश के भीतर घरेलू प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) को बढ़ावा देने और अपने खनिज संसाधनों से अधिक आर्थिक मूल्य प्राप्त करने के उद्देश्य से उठाया गया है। इस अप्रत्याशित प्रतिबंध के बाद से वैश्विक धातु बाजार में गहरी चिंता और असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।
कीमतों में रिकॉर्ड तेजी के पीछे केवल निर्यात प्रतिबंध ही नहीं, बल्कि अन्य वैश्विक कारक भी सक्रिय हैं-
परिवहन बाधाएं: पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव के कारण सामरिक रूप से महत्वपूर्ण 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' से जहाजों की आवाजाही गंभीर रूप से बाधित हुई है। इस प्रमुख समुद्री मार्ग से तांबा, एल्युमीनियम और सल्फ्यूरिक एसिड का एक बहुत बड़ा हिस्सा गुजरता है।
जिंक स्टॉक में भारी गिरावट: दुनिया भर के वेयरहाउस में जिंक के स्टॉक में इस साल की शुरुआत से अब तक 75 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बन गया है।
AI और इलेक्ट्रिक वाहनों की भूख: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) डेटा सेंटरों और इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) के निर्माण में तांबे की मांग बेतहाशा बढ़ी है। इसी होड़ के चलते अमेरिका और चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाएं तांबे की अंधाधुंध खरीदारी और भारी जमाखोरी करने में जुटी हैं, जिससे इसके दाम आसमान छू रहे हैं।
किसी भी घरेलू इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, सफेद सामान (White Goods) और चार पहिया या दो पहिया वाहनों के विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) में तांबा, स्टील और एल्युमीनियम प्राथमिक और मुख्य कच्चे माल होते हैं। जब अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार में इन आधारभूत धातुओं के दाम बढ़ते हैं, तो विनिर्माण कंपनियां इस अतिरिक्त लागत का पूरा बोझ अंततः ग्राहकों की यानी आपकी जेब पर डालती हैं। अनुमान के मुताबिक, इस त्योहारी सीजन में विभिन्न उपभोक्ता वस्तुएं और वाहन करीब 8% तक महंगे हो सकते हैं।

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आज भारतीय शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी दबाव में रहे। निवेशकों ने कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, कमजोर वैश्विक संकेतों और कंपनियों के तिमाही नतीजों के बीच सतर्क रुख अपनाया है। वहीं शुरुआती कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले छह पैसे गिरकर 95.28 पर आ गया।
भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) का ऑफर फॉर सेल शानदार प्रतिक्रिया के साथ बंद हुआ। सरकार ने 31,552 करोड़ रुपये जुटाए, जिससे सार्वजनिक शेयरधारिता 10% पहुंच गई।
भारतीय घरेलू शेयर बाजार ने आज सकारात्मक शुरुआत की। कच्चे तेल की कीमतों में हल्की गिरावट और रिलायंस इंडस्ट्रीज समेत कुछ बड़ी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी के चलते सेंसेक्स और निफ्टी शुरुआती कारोबार में बढ़त के साथ खुले। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 201.43 अंक चढ़कर 78,782.43 पर पहुंच गया।
RBI ने रेपो रेट 5.25% पर बरकरार रखा है। वैश्विक महंगाई और अनिश्चितताओं के चलते लोन और ईएमआई में फिलहाल कोई कटौती नहीं होगी।
वित्त मंत्रालय ने ईपीएफ और ईपीएस के तहत अनिवार्य कवरेज की वेतन सीमा 15,000 से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। जानिए इसके नियम, कंपनियों और सरकार पर पड़ने वाले असर की पूरी जानकारी।
सरकार ने LIC में ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए 6.5% हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया है। इसके लिए फ्लोर प्राइस 382 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है। जानिए इससे जुड़ी सभी खास बातें, शेयर बाजार पर असर और पूरी डिटेल।
पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान के बीच तनाव कम होने का असर शेयर बाजार पर भी दिखा। महीने के दूसरे कारोबारी दिन यानी आज 30 शेयरों वाला बीएसई सेसेंक्स बढ़त के साथ कारोबार करते हुए हरे निशान पर खुला। वहीं, 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी गिरावट के साथ लाल निशान पर खुला।
3 अगस्त को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और भोपाल समेत देश के प्रमुख शहरों में 22 और 24 कैरेट गोल्ड तथा चांदी के ताजा रेट्स की पूरी जानकारी यहाँ देखें।
कारोबारी सप्ताह के पहले दिन आज भारतीय शेयर बाजार मजबूत बढ़त के साथ खुला। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट और अमेरिका-ईरान तनाव कम होने के संकेतों से निवेशकों का भरोसा बढ़ा।