गृहस्थों के लिए दीपावली का पर्व विशेष रूप से देवी लक्ष्मी, भगवान गणेश, देवी सरस्वती और कुबेर जी की आराधना का दिन होता है।

गृहस्थों के लिए दीपावली का पर्व विशेष रूप से देवी लक्ष्मी, भगवान गणेश, देवी सरस्वती और कुबेर जी की आराधना का दिन होता है। यह पूजन मुख्य रूप से धन, धान्य, सुख और समृद्धि की कामना के साथ किया जाता है। माना जाता है कि दीपावली पर लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व है क्योंकि इस दिन माता लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं। यह पूजन प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद) या स्थिर लग्न (जैसे वृषभ, सिंह, कुंभ) में किया जाता है, जिससे देवी लक्ष्मी घर में स्थिर रूप से निवास करें।
दीपावली से पूर्व पूरे घर और पूजा स्थान को स्वच्छ कर गंगाजल छिड़ककर शुद्ध किया जाता है।
चौकी स्थापना: एक स्वच्छ चौकी (पटिया) पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर उसे स्थापित किया जाता है।
मूर्ति स्थापना: चौकी पर सर्वप्रथम भगवान गणेश (दाईं ओर), देवी लक्ष्मी (मध्य में) और देवी सरस्वती तथा कुबेर जी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जाती है।
कलश स्थापना: चौकी के पास चावलों की ढेरी पर जल से भरा तांबे या मिट्टी का कलश रखा जाता है। कलश में सिक्का, सुपारी, हल्दी की गांठ और गंगाजल डालकर, उसके मुख पर आम के पत्ते लगाकर ऊपर नारियल रखा जाता है। कलश पर रोली से स्वास्तिक बनाया जाता है।
अन्य सामग्री: कलश के पास नवग्रहों के प्रतीक स्वरूप चावलों की नौ और षोडशमातृकाओं के लिए सोलह छोटी ढेरियाँ बनाई जाती हैं।
बही-खाता और तिजोरी: व्यवसाय से संबंधित पूजा के लिए नए बही-खाते, पेन-दवात, तिजोरी और धन रखने के स्थान को भी पूजा के लिए तैयार किया जाता है।
दीपक और रंगोली: घर के प्रवेश द्वार पर आकर्षक रंगोली बनाकर घी का एक बड़ा दीया और तेल के छोटे दीये जलाए जाते हैं।
पूजा का आरंभ आत्म-शुद्धि और संकल्प से होता है। हाथ में जल, अक्षत, पुष्प और द्रव्य लेकर शुभ मुहूर्त, तिथि, वार और अपने नाम-गोत्र का उच्चारण करते हुए पूजन का संकल्प लिया जाता है।
गणेश जी का पूजन (सर्वप्रथम): सबसे पहले भगवान गणेश का आह्वान कर उन्हें जल, रोली/चंदन, कलावा, दूर्वा, अक्षत, पुष्प और मोदक (लड्डू/मिठाई) अर्पित किए जाते हैं। 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का जाप किया जाता है।
महालक्ष्मी का पूजन (मुख्य पूजा): गणेश पूजन के बाद कलश में स्थापित वरुण देव, नवग्रहों और षोडशमातृकाओं का संक्षिप्त पूजन किया जाता है। इसके उपरान्त, माता लक्ष्मी का आवाहन किया जाता है।
यदि मूर्ति छोटी है तो पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल) और शुद्ध जल से स्नान कराया जाता है।
उन्हें वस्त्र (लाल वस्त्र), आभूषण, इत्र, कमल का फूल या पुष्पमाला अर्पित की जाती है।
रोली/सिंदूर से तिलक किया जाता है।
पूजा सामग्री में विशेष रूप से कमल गट्टा, धनिया, खील (धान का लावा), बताशे, गन्ना (ईख), पान, सुपारी और फल (जैसे सिंघाड़ा) अर्पित किए जाते हैं।
घी का दीपक और धूप प्रज्वलित कर 'ॐ महालक्ष्म्यै नमः' या 'ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः' मंत्र का यथाशक्ति जाप किया जाता है।
कुबेर जी और बही-खाता पूजन: लक्ष्मी पूजन के बाद धन के देवता कुबेर जी की पूजा की जाती है। उन्हें अक्षत, पुष्प और भोग अर्पित किया जाता है। इसके बाद, तिजोरी और नए बही-खातों पर स्वास्तिक बनाकर 'शुभ-लाभ' लिखा जाता है और व्यापार में उन्नति की कामना के साथ अक्षत-पुष्प चढ़ाए जाते हैं।
पूजा का समापन सर्वप्रथम गणेश जी की और फिर लक्ष्मी जी की आरती से होता है। आरती के बाद हाथ जोड़कर जाने-अनजाने में हुई त्रुटियों के लिए क्षमा प्रार्थना की जाती है। माता लक्ष्मी से घर में स्थिर निवास करने और धन-धान्य की वृद्धि की प्रार्थना की जाती है। पूजा के बाद प्रसाद सभी में वितरित किया जाता है और घर के हर कोने में दीये जलाकर पूरे घर को जगमगाया जाता है।
ओम जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।
मैया तुम ही जग-माता।।
सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
दुर्गा रुप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता।
मैया सुख सम्पत्ति दाता॥
जो कोई तुमको ध्याता, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता।
मैया तुम ही शुभदाता॥
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।
मैया सब सद्गुण आता॥
सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।
मैया वस्त्र न कोई पाता॥
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
शुभ-गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता।
मैया क्षीरोदधि-जाता॥
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता।
मैया जो कोई जन गाता॥
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
ऊं जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता। ऊं जय लक्ष्मी माता।।

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