ईरानी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन व्यापारिक जहाजों पर हमला कर उन्हें जब्त किया। ट्रंप के सीजफायर के बावजूद नाकेबंदी से नाराज ईरान ने शांति वार्ता से इनकार किया है। जानें वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका असर।

दुबई/तेहरान। स्टार समाचार वेब
दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री व्यापारिक मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में एक बार फिर युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं। बुधवार को ईरानी नौसेना द्वारा तीन व्यापारिक जहाजों पर की गई अंधाधुंध गोलीबारी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चिंता में डाल दिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका और इस्राइल के साथ शांति वार्ता की उम्मीदें की जा रही थीं।
ईरान की अर्धसैनिक इकाई 'रिवोल्यूशनरी गार्ड' ने बुधवार सुबह इस सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया। खबरों के अनुसार, ईरानी बल ने सबसे पहले एक कंटेनर जहाज पर हमला किया और उसके बाद दूसरे जहाज को निशाना बनाया। जब्त किए गए जहाजों की पहचान एमएससी फ्रांसिस्का और एपामिनोड्स के रूप में हुई है। वहीं, यूफोरिया नामक तीसरा जहाज भी हमले के बाद ईरानी तट के पास फंसे होने की सूचना है। ईरानी मीडिया का तर्क है कि इन जहाजों ने नौसेना की चेतावनियों का उल्लंघन किया था।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को समाप्त हो रहे संघर्षविराम को अनिश्चित काल के लिए बढ़ाने की घोषणा की थी, ताकि कूटनीतिक रास्ते खुले रहें। हालांकि, ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी (Naval Blockade) जारी रहेगी। ईरान इसी नाकेबंदी से आक्रोशित है। ईरानी राजनयिकों का साफ कहना है कि जब तक अमेरिका समुद्री घेराबंदी नहीं हटाता, वे किसी भी शांति वार्ता की मेज पर नहीं बैठेंगे।
होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दिख रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतें 98 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। युद्ध की शुरुआत से अब तक तेल की कीमतों में 35 प्रतिशत तक की वृद्धि हो चुकी है। यदि यह मार्ग बाधित रहता है, तो न केवल ईंधन बल्कि रसद और खाद्यान्न की कीमतों में भी भारी बढ़ोत्तरी होने की आशंका है, जिससे वैश्विक मंदी का खतरा बढ़ जाएगा।
पाकिस्तान इस संघर्ष को सुलझाने के लिए अगले दौर की वार्ता की मेजबानी करना चाहता है, लेकिन ईरान के कड़े रुख ने इसे मुश्किल बना दिया है। मिस्र में मौजूद ईरानी राजनयिक मुजतबा फिरदौसी पोर ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी नाकेबंदी जारी रहने तक कोई भी ईरानी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान नहीं जाएगा। फिलहाल कूटनीति के स्थान पर हथियारों की भाषा हावी होती दिख रही है।
28 फरवरी से शुरू हुए इस भीषण संघर्ष में जान-माल का भारी नुकसान हुआ है:
ईरान: 3,375 से अधिक लोगों की मौत।
लेबनान: 2,290 से ज्यादा लोगों ने जान गंवाई।
इस्राइल: 23 नागरिक और 15 सैनिकों की मौत।
अमेरिकी सेना: संघर्ष के दौरान 13 सैनिकों की मृत्यु।
ईरान में जहां कट्टरपंथी गुट मिसाइल शक्ति का प्रदर्शन कर रैलियां निकाल रहे हैं, वहीं लेबनान में इस्राइल और हिजबुल्लाह के बीच 10 दिनों का सीजफायर होने के बावजूद तनाव चरम पर है।

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अमेरिका-ईरान के बीच बीते दिन शांति समझौते की घोषणा की गई, लेकिन अब इसमें पेंच फंसता नजर आ रहा है। महीनों से जारी संघर्ष को खत्म करने के लिए ईरान ने जिस भारी भरकम फंड 300 अरब डॉलर की मांग की है, उसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने खारिज कर दिया है।
अमेरिका-ईरान के 14-सूत्रीय समझौते का इस्राइल पर क्या असर पड़ा? लेबनान युद्धविराम से सैन्य स्वायत्तता तक, जानें नेतन्याहू के सामने खड़ी नई चुनौतियों का पूरा विश्लेषण।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी दो देशों की यात्रा के दूसरे चरण के तहत स्लोवाकिया पहुंचे। इस दौरान वह स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी और प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इसके अलावा वह व्यापार जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे।
अमेरिका और ईरान के बीच समझौता हो गया है। स्विट्जरलैंड में इस डील पर साइन होंगे। इसमें स्ट्रेट आफ होर्मुज को फिर से खोलने और व्यापार फिर से शुरू करने का एलान भी शामिल है। होर्मुज से शिपिंग फिर से शुरू होने या सामान्य होने से भारत को बड़ी राहत मिलेगी।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि रविवार को ईरान के साथ शांति समझौता होगा और यूरेनियम नष्ट किया जाएगा। वहीं ईरान ने इस दावे को खारिज करते हुए होर्मुज स्ट्रेट पर नया टैक्स लगाने के संकेत दिए हैं।
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भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर बात कर खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
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