पूर्व मध्य अरब सागर में बने डिप्रेशन (अवदाब) से मध्य प्रदेश के कई जिलों में अगले 4 दिन तक बारिश का अलर्ट। भोपाल, इंदौर, सागर समेत कई स्थानों पर मौसम बदला। नवंबर से फरवरी तक पड़ सकती है भीषण ठंड। मानसून की 'हैप्पी एंडिंग' के बाद भी बारिश जारी रहने की संभावना।

हाइलाइट्स
भोपाल. स्टार समाचार वेब
पूर्व मध्य अरब सागर के ऊपर सक्रिय हुए एक डिप्रेशन (अवदाब) के कारण मध्य प्रदेश का मौसम अचानक बदल गया है। मौसम विभाग के अनुसार, इस मौसमी सिस्टम का असर अगले चार दिनों तक प्रदेश में देखने को मिलेगा। राजधानी भोपाल में सुबह से ही बादल छाए रहे और धुंध की वजह से विजिबिलिटी (दृश्यता) में कमी आई। कुछ इलाकों में हल्की बूंदाबांदी भी दर्ज की गई।
कई जिलों में तेज बारिश
शनिवार को प्रदेश के कई हिस्सों में तेज बारिश हुई। सागर में तेज हवाओं के साथ भारी वर्षा हुई। शाजापुर जिले के अकोदिया में गरज-चमक के साथ पानी गिरा, जबकि पांढुर्णा में लगभग एक घंटे तक बारिश दर्ज की गई। इस प्री-विंटर बारिश ने प्रदेश के मौसम में ठंडक घोल दी है।
आज इन जिलों में बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग ने शनिवार को भोपाल, इंदौर, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बड़वानी, खरगोन, शाजापुर, देवास, खंडवा, बुरहानपुर, सीहोर, हरदा, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, जबलपुर, सिवनी, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। बादल छाए रहने की वजह से दिन के अधिकतम तापमान में भी गिरावट आने की संभावना है।
आगामी तीन दिन भी बारिश के आसार
मौसम विभाग का अनुमान है कि 26, 27 और 28 अक्टूबर को भी मौसम का मिजाज बदला रहेगा। भोपाल, इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग के जिलों में हल्की बारिश के आसार हैं। इन दिनों कुछ जिलों में दिनभर बादल छाए रहेंगे।
तापमान में उतार-चढ़ाव
पिछले कुछ दिनों की गिरावट के बाद अब प्रदेश में अधिकतम और न्यूनतम तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, खजुराहो, मंडला, नरसिंहपुर, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, सीधी, टीकमगढ़, उमरिया, भोपाल, बैतूल, गुना, नर्मदापुरम, इंदौर, पचमढ़ी, रतलाम, उज्जैन में रात का तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला गया है। वहीं, दिन का पारा भी 34 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है।
नवंबर से पड़ेगी भीषण ठंड
मौसम विभाग ने आने वाली सर्दियों को लेकर बड़ा अनुमान जताया है। नवंबर से शुरू होने वाला कड़ाके की ठंड का दौर इस बार जनवरी तक जारी रहेगा, और फरवरी तक भी ठंड का असर महसूस किया जा सकता है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि आगामी सर्दियों का मौसम 2010 के बाद सबसे भीषण हो सकता है।
ला-नीना परिस्थितियां जल्द विकसित होने की आईएमडी की पुष्टि और उत्तर-पश्चिम भारत में पश्चिमी विक्षोभों की अधिक सक्रियता के कारण इस बार सर्दियों के दौरान सामान्य से अधिक बारिश भी देखने को मिल सकती है।
हालांकि, मौसम विभाग के अनुसार मानसून पूरे प्रदेश से विदा हो चुका है। 16 जून को प्रदेश में दस्तक देने वाला मानसून 13 अक्टूबर को वापस हुआ, यानी इस साल यह 3 महीने 28 दिन एक्टिव रहा। इस बार प्रदेश में मानसून की 'हैप्पी एंडिंग' हुई, जिसमें भोपाल, ग्वालियर समेत 30 जिलों में 'बहुत ज्यादा' बारिश दर्ज की गई। गुना जिला (65.7 इंच) ओवरऑल सबसे ज्यादा बारिश वाला रहा, जबकि श्योपुर में 216.3% बारिश दर्ज हुई। अच्छी बारिश के कारण पेयजल और सिंचाई के लिए भरपूर पानी उपलब्ध है, साथ ही भू-जल स्तर भी बढ़ा रहेगा। पूरे प्रदेश में मानसूनी सीजन के दौरान अनुमानित 106 प्रतिशत की तुलना में 15 प्रतिशत अधिक पानी गिरा। हालांकि, उज्जैन, शाजापुर, बैतूल और सीहोर (98.6% तक) जैसे 4 जिलों में अपेक्षित कोटा पूरा नहीं हो पाया। इनमें से शाजापुर 'बारिश की भारी कमी' की श्रेणी में रहा, जहां कोटे का केवल 81 प्रतिशत पानी ही गिरा।

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