नीट पीजी दाखिला प्रणाली की समीक्षा के लिए गठित 12 सदस्यीय समिति ने पर्सेंटाइल की जगह रैंक आधारित मेरिट व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया है। जानिए सुप्रीम कोर्ट में दाखिल रिपोर्ट की मुख्य बातें और प्रस्तावित बदलाव।

मेडिकल के स्नातकोत्तर (पीजी) पाठ्यक्रमों में दाखिले की व्यवस्था में आने वाले दिनों में एक बड़ा प्रशासनिक और नीतिगत बदलाव देखने को मिल सकता है। नीट पीजी (NEET PG) और सुपर स्पेशियलिटी (NEET SS) प्रवेश परीक्षाओं के लिए गठित 12 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति ने वर्तमान में चल रही पर्सेंटाइल आधारित पात्रता प्रणाली को समाप्त कर उसके स्थान पर रैंक आधारित मेरिट व्यवस्था लागू करने की सिफारिश की है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने इस नए प्रस्ताव को सैद्धांतिक रूप से अपनी सहमति दे दी है। इस संबंध में जल्द ही आधिकारिक मसौदा नियम (Draft Rules) जारी किए जाने की संभावना है, जिसके बाद छात्रों, डॉक्टरों और संबंधित पक्षों से सुझाव व आपत्तियां मांगी जाएंगी।
यह पूरा मामला नीट पीजी में खाली पड़ी सीटों को भरने के लिए केंद्र सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा पात्रता कटऑफ पर्सेंटाइल में की गई अभूतपूर्व कटौती के बाद शुरू हुआ था। उस समय सामान्य वर्ग का क्वालिफाइंग स्कोर 276 से घटाकर 103 कर दिया गया था, जबकि आरक्षित वर्गों (SC, ST और OBC) के लिए इसे 235 से घटाकर सीधे -40 कर दिया गया था।
इस फैसले पर कड़ा संज्ञान लेते हुए न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने चिंता व्यक्त की थी कि इतने कम या नकारात्मक अंकों पर दाखिला देने से चिकित्सा शिक्षा के न्यूनतम मानकों और गुणवत्ता से समझौता होता है। यद्यपि अदालत ने स्वीकार किया कि यह एक नीतिगत फैसला है, फिर भी कोर्ट ने केंद्र सरकार को मौजूदा नीट प्रणाली का व्यापक ऑडिट करने, उसकी कमियों को पहचानने और व्यावहारिक समाधान तलाशने के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्देश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में विशेषज्ञ समिति ने माना कि दाखिला प्रक्रिया में सुधार के साथ-साथ चिकित्सा शिक्षा के उच्च मानकों को बनाए रखना बेहद अनिवार्य है। प्रतियोगी परीक्षाओं की गरिमा केवल प्रशासनिक औपचारिकता तक सीमित नहीं होनी चाहिए।
पीजी मेडिकल की खाली सीटों की समस्या को हमेशा के लिए सुलझाने के लिए समिति ने निम्नलिखित मुख्य उपाय सुझाए हैं:
गैर-क्लिनिकल विषयों की फीस में कटौती: क्लिनिकल और नॉन-क्लिनिकल पाठ्यक्रमों के लिए अलग-अलग फीस संरचना बनाई जाए। गैर-क्लिनिकल विषयों की फीस कम रखी जाए ताकि अभ्यर्थी इन क्षेत्रों को चुनने के लिए प्रोत्साहित हों।
सेवा बंधन (Service Bond) से छूट: प्री-क्लिनिकल और पैरा-क्लिनिकल विषयों में प्रवेश लेने वाले उम्मीदवारों को अनिवार्य सेवा बंधन से मुक्त किया जाए।
सीट ब्लॉकिंग पर रोक: फर्जी या केवल सीट रोकने के उद्देश्य से परीक्षा में बैठने वाले उम्मीदवारों की पहचान के लिए एनटीए (NTA) और एनबीईएमएस (NBEMS) को सख्त बायोमेट्रिक जांच और पहचान सत्यापन लागू करने की सलाह दी गई है।
नॉन-वायबल सीटों को बंद करना: यदि किसी संस्थान में लगातार दो से तीन वर्षों तक सीटें खाली रहती हैं, तो उन्हें बंद करने या उनकी फीस काफी कम करने पर विचार किया जाए। इसके साथ ही डेंटल और नर्सिंग स्नातकों के लिए रोजगार के नए अवसर बनाने पर जोर दिया गया है।
मेडिकल काउंसलिंग समिति (MCC) ने विशेषज्ञ पैनल को जानकारी दी कि आगामी सत्रों में देरी और छात्रों की परेशानी को दूर करने के लिए तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। अब अभ्यर्थियों के पास 'फ्रीज' (Freeze) और 'फ्लोट' (Float) श्रेणी के विकल्प होंगे।
'फ्लोट' विकल्प चुनने वाले उम्मीदवार बिना संबंधित संस्थान में व्यक्तिगत रूप से जाए, ऑनलाइन ही सीट स्वीकार कर सकते हैं और अपग्रेडेशन के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा, दस्तावेजों का सत्यापन ऑनलाइन नोडल अधिकारियों द्वारा किया जाएगा और फीस का भुगतान भी केवल एक बार उसी संस्थान में करना होगा जहाँ छात्र अंतिम रूप से प्रवेश लेगा। साथ ही, एनएमसी के रिकॉर्ड को एमसीसी काउंसलिंग पोर्टल से सीधे एकीकृत (Integrate) कर दिया गया है, जिससे मेडिकल कॉलेजों की सीटों के आंकड़ों में कोई दोहराव न हो।
भविष्य में काउंसलिंग को और अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए विशेषज्ञ समिति ने निम्नलिखित पांच प्रमुख बातें सुझाई हैं:
एनटीए, एनबीईएमएस और एनएमसी को काउंसलिंग शुरू होने से काफी पहले सत्यापित सीटों का डेटा जारी करना होगा।
एमसीसी हर शैक्षणिक वर्ष के लिए एक निश्चित समय-सारणी (Schedule) तैयार करे और उसे सुप्रीम कोर्ट से स्वीकृत कराए।
काउंसलिंग के संचालन के लिए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रियाएं (SOPs) बनाई जाएं और उन्हें हर साल अपडेट किया जाए।
काउंसलिंग से पहले और बाद में सभी संबंधित पक्षों (Stakeholders) के साथ समीक्षा बैठकें की जाएं।
नीट के नतीजे सीधे राज्यों की काउंसलिंग अथॉरिटी तक बिना किसी देरी के पहुंचाने के लिए एकीकृत ऑनलाइन सिस्टम बने।
विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट सामने आने के बाद याचिकाकर्ताओं की तरफ से पेश हुए वकील सत्यम सिंह राजपूत ने इस प्रस्ताव की मंशा पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने तर्क दिया कि पर्सेंटाइल घटाने के पिछले विवादित फैसले की समीक्षा करने के बजाय समिति ने पूरी अंक निर्धारण प्रणाली को ही बदलकर विषय को भटकाने का प्रयास किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि पर्सेंटाइल से सीधे रैंक आधारित व्यवस्था में जाने से मूल समस्या का समाधान कैसे होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में याचिकाकर्ताओं को विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट का अध्ययन करने और अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए समय देते हुए अगली सुनवाई तक के लिए मामला स्थगित कर दिया है।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने नार्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (NCL) द्वारा सहायक फोरमैन ग्रेड-सी भर्ती परीक्षा रद्द करने के फैसले पर नोटिस जारी किया है। चयनित अभ्यर्थियों ने पूरी परीक्षा निरस्त करने को अनुचित बताया है।
क्यूएस एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 में भारत 325 संस्थानों के साथ दूसरे स्थान पर पहुंचा। हालांकि, आईआईटी दिल्ली समेत देश के शीर्ष 6 संस्थानों की रैंकिंग में गिरावट आई है।
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मध्य प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षक पात्रता परीक्षा ( टीईटी) 2026 का खाका तैयार कर लिया है। माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा 10 दिसंबर के बाद आयोजित होने वाली इस परीक्षा की संभावित तिथियां 13 या 20 दिसंबर तय की गई हैं, जिसके विस्तृत दिशा-निर्देश अगले दो-तीन दिनों में जारी कर दिए जाएंगे।
सीबीएसई 10वीं और 12वीं के छात्रों के लिए बड़ी खबर! इस साल सीबीएसई बोर्ड परीक्षा 2027 की डेटशीट अभी तक नहीं आई है। पिछले साल जहां सितंबर में ही शेड्यूल जारी हो गया था। वहीं इस बार अक्टूबर आखिरी तक भी कोई आधिकारिक अपडेट न होने से छात्रों में असमंजस की स्थिति है।
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रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) ने स्टेशन मास्टर के 1265 पदों पर भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से ग्रेजुएट उम्मीदवार 25 नवंबर 2026 तक आधिकारिक वेबसाइट rrbapply.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।
मध्यप्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (एमपी टीईटी) 2024 की नियम पुस्तिका में शामिल एक पात्रता शर्त को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ ने इस मामले में राज्य सरकार और कर्मचारी चयन आयोग को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है।
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