बीना विधायक निर्मला सप्रे एक बार फिर विधानसभा अध्यक्ष के सामने पेश नहीं हुईं। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने देरी पर उठाए सवाल। जानें क्या है पूरा मामला और अगली सुनवाई की तारी

भोपाल। स्टार समाचार वेब
बीना से विधायक निर्मला सप्रे को बुधवार, 22 अप्रैल 2026 को विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना था। हालांकि, वह इस बार भी उपस्थित नहीं हुईं; उनकी ओर से केवल प्रतिनिधि ही विधानसभा कार्यालय पहुँचे। अब इस मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में होगी।
इससे पूर्व, हाईकोर्ट ने 9 अप्रैल को विधायक सप्रे को विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया था। लेकिन अध्यक्ष की व्यस्तता के कारण इस तिथि को बढ़ाकर 22 अप्रैल किया गया था। निर्धारित समय पर विधायक के अनुपस्थित रहने के बाद अब सबकी नजरें 29 अप्रैल को होने वाली अदालती कार्यवाही पर टिकी हैं।
याचिकाकर्ता और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस देरी को लेकर विधानसभा अध्यक्ष की कार्यप्रणाली और निष्पक्षता पर कड़े सवाल उठाए हैं। सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार बीना में उपचुनाव कराने से कतरा रही है, इसलिए जानबूझकर फैसले में विलंब किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि निर्णय लेने का अधिकार विधानसभा अध्यक्ष का है, लेकिन प्रक्रिया को लंबा खींचा जा रहा है।
उमंग सिंघार ने तंज कसते हुए कहा कि जिस मामले का फैसला 90 दिनों के भीतर आ जाना चाहिए था, वह ढाई साल बाद भी लंबित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्मला सप्रे के कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने के पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत किए जा चुके हैं। यदि विधानसभा सचिवालय समय पर रिपोर्ट और निर्णय पेश नहीं करता, तो अंततः हाईकोर्ट को इस पर कड़ा फैसला लेना होगा।

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