मोहन कैबिनेट ने पचमढ़ी में लिए ऐतिहासिक फैसले: वन्य जीव अभ्यारण्य अब राजा भभूत सिंह के नाम पर, राजस्व विभाग में 'तारीख पे तारीख' खत्म होगी, और श्रम कानूनों में बड़ा संशोधन। जानें MP सरकार के इन निर्णयों का पूरा असर।

पचमढ़ी.
मोहन कैबिनेट ने सुशासन, पारदर्शिता और औद्योगिक विकास को गति देने के लिए अहम फैसले लिए। वन्य जीव अभ्यारण्य का नामकरण, राजस्व विभाग में व्यापक सुधार और श्रम कानूनों में संशोधन का फैसला लिया गया।

मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई बैठक में तय किया गया कि पचमढ़ी वन्य जीव अभ्यारण्य का नाम राजा भभूत सिंह के नाम पर होगा। नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बैठक का ब्योरा देत हुए बताया कि यह विशेष बैठक राजा भभूत सिंह की जन्म और कर्मभूमि पर आयोजित की गई थी। उन्होंने राजा भभूत सिंह को अंग्रेजों के खिलाफ साहसिक संघर्ष करने वाला और "नर्मदा अंचल का शिवाजी" बताया। यह फैसला उनकी वीरता और जनजातीय समाज के प्रति उनके अतुलनीय योगदान को सम्मान देने के उद्देश्य से लिया गया है।
कैबिनेट ने राजस्व विभाग के एक महत्वपूर्ण बिल को भी स्वीकृति दी है, जिसका लक्ष्य पारदर्शिता और गति लाना है। प्रमुख राजस्व आयुक्त और अभिलेख आयुक्त के पदों को मिलाकर अब एक नया पद "कमिश्नर लैंड रिसोर्स एंड मैनेजमेंट" बनाया जाएगा। मंत्री विजयवर्गीय ने जानकारी दी कि अब तहसीलदारों को दो श्रेणियों में बांटा जाएगा: एक श्रेणी राजस्व न्यायालयों के मामलों का निराकरण करेगी, जबकि दूसरी श्रेणी कानून व्यवस्था (लॉ एंड ऑर्डर) संबंधी कार्य संभालेगी। इस विभाजन से राजस्व प्रकरणों का निपटारा तेज होगा और 'तारीख पर तारीख' की समस्या खत्म होगी। आईटी के बढ़ते उपयोग के चलते विभाग के 500 पुराने पदों को समाप्त कर 1200 नए पद सृजित किए जाएंगे, जिनमें सूचना प्रौद्योगिकी से संबंधित पदों को प्राथमिकता मिलेगी। विजयवर्गीय ने दावा किया कि मध्य प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य होगा जो इतनी तेज गति से राजस्व प्रक्रियाओं को चलाएगा।
बैठक में श्रम विभाग के संशोधन प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली। ठेका श्रम विनियम उत्पादन अधिनियम 1970 में अब 20 ठेका श्रमिकों की सीमा को बढ़ाकर 50 कर दिया गया है। वहीं, कारखाना अधिनियम 1948 में बिना हाथ से काम करने वाले (मशीन पर काम करने वाले) श्रमिकों की संख्या 10 से बढ़ाकर 20 और हाथ से काम करने वालों की संख्या 20 से बढ़ाकर 40 की गई है।
इन परिवर्तनों का उद्देश्य औद्योगिकरण को बढ़ावा देना और श्रमिकों के अधिकारों का संरक्षण करना है। विशेष रूप से, महिलाओं को सुरक्षित वातावरण में रात में काम करने की अनुमति देने हेतु श्रम कानूनों में संशोधन को भी मंजूरी मिली है। इसके अतिरिक्त, ठेका श्रमिकों से जुड़े नियमों को भी संशोधित किया जाएगा ताकि उनके शोषण को रोका जा सके।
कैबिनेट ने इंदौर स्थित आईआईटी में "एग्रो आईआईटी हब" स्थापित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। यह हब कृषि क्षेत्र में नवाचार और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देगा, जिसका मुख्य लक्ष्य अच्छे बीज, उन्नत खेती और उत्पादन में वृद्धि सुनिश्चित करना होगा, ताकि खेती को लाभ का धंधा बनाया जा सके। इस संबंध में भारत सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है।
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