पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने जेद्दा में क्राउन प्रिंस MBS से मुलाकात की। जानें ईरान-इस्राइल तनाव के बीच पाकिस्तान और सऊदी अरब के रक्षा समझौते के क्या हैं मायने।

शहबाज शरीफ की सऊदी क्राउन प्रिंस से मुलाकात
जेद्दा। स्टार समाचार वेब
पश्चिम एशिया (Middle East) में बढ़ते तनाव और ईरान-इस्राइल संघर्ष के बीच पाकिस्तान ने सऊदी अरब के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता जाहिर की है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) के साथ जेद्दा में एक उच्च-स्तरीय बैठक की। इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय अस्थिरता के दौर में सऊदी अरब के साथ अपनी एकजुटता प्रदर्शित करना और रणनीतिक सुरक्षा पर चर्चा करना था।
यह दौरा सामान्य कूटनीतिक मुलाकात से कहीं अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अकेले नहीं थे; उनके साथ एक शक्तिशाली प्रतिनिधिमंडल जेद्दा पहुँचा था, जिसमें इशाक डार उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री और जनरल आसिम मुनीर पाकिस्तान के सेना प्रमुख। सेना प्रमुख और प्रधानमंत्री का एक साथ सऊदी अरब पहुँचना इस बात का संकेत है कि पाकिस्तान, सऊदी अरब की सुरक्षा को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के समान प्राथमिकता दे रहा है।
बैठक के दौरान शहबाज शरीफ ने स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया के मौजूदा चुनौतीपूर्ण हालात में पाकिस्तान, सऊदी अरब के साथ मजबूती से खड़ा है। दोनों देशों के नेताओं ने क्षेत्र की शांति और स्थिरता के लिए मिलकर काम करने का संकल्प लिया। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भी पुष्टि की है कि यदि सऊदी अरब की संप्रभुता पर कोई खतरा आता है, तो पाकिस्तान बिना किसी देरी के मदद के लिए तैयार रहेगा।
पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच सितंबर 2023 में एक महत्वपूर्ण रक्षा समझौता हुआ था। इस संधि के तहत, यदि किसी तीसरे देश द्वारा हमला किया जाता है, तो दोनों देश एक-दूसरे की सैन्य मदद करेंगे।
हालाँकि, पाकिस्तान के लिए यह स्थिति कूटनीतिक रूप से काफी जटिल है:
ईरान के साथ संबंध: ईरान पाकिस्तान का पड़ोसी देश है। पाकिस्तान नहीं चाहता कि वह ईरान के साथ सीधे टकराव में आए।
सऊदी की सुरक्षा: सऊदी अरब पाकिस्तान का सबसे बड़ा वित्तीय और रणनीतिक साझेदार है।
शांति की कोशिश: शहबाज शरीफ ने हाल ही में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से फोन पर बात की और तनाव को कम करने की अपील की। पाकिस्तान एक 'मध्यस्थ' की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है ताकि मुस्लिम जगत के दो बड़े देश आपस में न उलझें।
इससे पहले 7 मार्च को सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने भी सऊदी रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान से मुलाकात की थी। उस समय मुख्य चर्चा ईरानी ड्रोन और मिसाइल खतरों से निपटने पर केंद्रित थी। उप-प्रधानमंत्री इशाक डार भी लगातार सऊदी और ईरानी विदेश मंत्रियों के संपर्क में हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि संघर्ष का दायरा सऊदी अरब तक न फैले।

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